
मप्र हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने कई याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए आईटीसी रोके जाने के मामलों पर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ देरी से जीएसटी रिटर्न फाइल करने के कारण धारा 16(4) के तहत इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) को अस्वीकार नहीं किया जा सकता। विशेष रूप से तब, जब पहले ही व्यापारी पर धारा 47 के तहत लेट फीस और धारा 50 के तहत ब्याज लगाया जा चुका हो।
इस मामले को लेकर आनंद स्टील समेत कई कंपनियों ने याचिका लगाई थी। व्यापारियों की शिकायत रही कि विभाग देरी से रिटर्न देने पर एक तो लेट फीस और पेनल्टी वसूलता है और बाद में उस सौदे से मिली आईटीसी भी रोक देता है। अदालत ने कहा जीएसटी कानूनों में संशोधित रिटर्न दाखिल करने का प्रावधान नहीं है, जिससे मिलान में देरी के लिए करदाताओं को दंडित करना अनुचित है।
देरी से रिटर्न दाखिल करने के लिए लेट फीस और ब्याज लगाने के साथ-साथ आईटीसी के लिए मना करना दंडात्मक है और न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। कोर्ट ने सभी व्यापारियों को भेजे गए नोटिस भी रद्द करने के आदेश दिए हैं। इस मामले में एक्सपर्ट ने कहा, कोर्ट ने साफ किया कि एक ही गलती की दो बार सजा नहीं दी जा सकती।