
हमारे लोग भारत से नाराज हैं क्योंकि वो शेख हसीना की मदद कर रहा है। शेख हसीना वहां रहकर स्पीच दे रही हैं। भारत उन्हें वापस भेजे, इससे बांग्लादेश के साथ उसके रिश्ते सुधरेंगे।’
ये बात कहने वाले 26 साल के आसिफ महमूद कुछ महीने पहले तक नॉर्मल स्टूडेंट थे। फिर बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ अगस्त में हुए प्रोटेस्ट का चेहरा बन गए। शेख हसीना को देश छोड़कर भागना पड़ा।
आसिफ महमूद अब बांग्लादेश की अंतरिम सरकार में एडवाइजर हैं। उनके पास यूथ अफेयर्स एंड स्पोर्ट्स, लोकल गवर्नमेंट और रूरल डेवलपमेंट डिपार्टमेंट की जिम्मेदारी है। उनसे हिंदुओं पर हमले, भारत से रिश्तों और बांग्लादेश को आजाद कराने वाले शेख मुजीबुर्रहमान के खिलाफ बढ़ रहे गुस्से पर बात की।

बातचीत में आसिफ महमूद ने कहा कि भारत के कई नेता बांग्लादेश के खिलाफ नफरत फैला रहे हैं। हमारे यहां लोग हिंदुत्व के खिलाफ हैं
सवाल: अंतरिम सरकार बने 4 महीने हो गए। शेख हसीना सरकार के खिलाफ आंदोलन करते वक्त आपने जो सोचा था, वो कर पाए या नहीं?
जवाब: हमने 10 तरह के रिफॉर्म कमीशन बनाए हैं। वे लोगों और पॉलिटिकल पार्टियों से बात कर रहे है कि बांग्लादेश में कैसे सुधार ला सकते हैं। उन्हें काम करते हुए 3 महीने हो गए हैं। हम रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। उसके आधार पर ही काम करेंगे।

सवाल: बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले हो रहे हैं। अल्पसंख्यक संगठन भारत और पाकिस्तान की तरह माइनॉरिटी कमीशन बनाने की मांग कर रहे हैं। इस पर क्या सोचते हैं?
जवाब: अल्पसंख्यकों पर हमले पॉलिटिकल इश्यू है। शेख हसीना की सरकार में भी अल्पसंख्यकों पर हमला होता था। बस इंडियन मीडिया ने उसे उतना नहीं दिखाया, जितना अभी दिखा रहा है। पिछले साल दुर्गा पूजा पर हिंदुओं पर कई हमले हुए थे। इस बार दुर्गा पूजा का आयोजन बहुत शांति से हुआ है।
अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले नेता नए सुधारों से संतुष्ट हैं। वे इस बदलाव का हिस्सा बनना चाहते हैं। कुछ पॉलिटिकल पार्टियां इसमें मुद्दा ढूंढ रही हैं।

सवाल: ढाका में इस्कॉन और BJP के खिलाफ रोज प्रोटेस्ट हो रहे हैं। क्यों?
जवाब: ये प्रोटेस्ट BJP या किसी खास पार्टी के खिलाफ नहीं हैं। BJP भारत में सरकार चला रही है। उनका मैनिफेस्टो हिंदू घोषणापत्र है। बांग्लादेश के लोगों को हिंदुत्व पसंद नहीं है। हम हिंदुत्व के खिलाफ हैं।
2019 में भारतीय संसद ने CAA-NRC एक्ट पास किया। हमने इसका विरोध किया क्योंकि इससे दोनों देशों के बीच हालात नाजुक हो सकते हैं। भारत से बड़ी संख्या में प्रवासी बांग्लादेश वापस आ सकते हैं। ये पॉलिसी मुसलमानों के खिलाफ है। इससे साउथ एशिया का सेक्युलर फैब्रिक बिगड़ सकता है। हमें इससे खतरा महसूस हो रहा है।
हाल में भारत के डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह, होम मिनिस्टर अमित शाह और पश्चिम बंगाल के नेताओं ने बांग्लादेश पर अटैकिंग बयान दिए हैं। खासकर शुभेंदु अधिकारी बांग्लादेश के खिलाफ नफरत फैला रहे हैं।
BJP नेताओं ने हमारे खिलाफ बयान दिए। इससे बांग्लादेश के लोगों और सरकार में अविश्वास पैदा होता हैं। अच्छे रिश्ते बनाने में ये बड़ी रुकावटें हैं, जिन पर भारत को सोचना होगा।
सवाल: चटगांव और ढाका में जगह-जगह भारत के खिलाफ पोस्टर लगे हैं। दीवारों पर ‘बैन इंडिया’ लिखा है। क्या बांग्लादेश में एंटी-इंडिया सेंटिमेंट है?
जवाब: भारत के खिलाफ गुस्सा पिछले 4 महीने से नहीं है। ये शेख हसीना के सत्ता में आने के बाद से है। भारत सरकार खुलकर उनका सपोर्ट कर रही थी। शेख हसीना अपने लोगों पर जुल्म करती थीं। देश में बोलने की आजादी नहीं थी।
हम उन लोगों के खिलाफ हैं, जो शेख हसीना सरकार के साथ थे। यही भारत के लिए नफरत की वजह है। इसीलिए बांग्लादेश के लोग इंडियन प्रोडक्ट बैन करने की मांग कर रहे हैं। लोगों में एंटी इंडिया सेंटिमेंट हैं।
पड़ोसी होने के नाते हम भारत से अच्छे रिश्ते चाहते हैं, लेकिन रिश्तों में सुधार लाने के लिए भारत को भी कुछ करना होगा। सब जानते हैं कि शेख हसीना इस्तीफा देकर भारत भाग गईं। इसलिए हमारे लोग भारत से नाराज हैं। मैंने भारत को दुश्मन देश घोषित करने की मांग वाला कोई पोस्टर नहीं देखा। हमारी सरकार तो दोस्ती चाहती है।

सवाल: अल्पसंख्यकों पर हमले के बाद अमेरिका ने कहा कि वो इस पर नजर बनाए हुए है। क्या इन हमलों से दुनिया में बांग्लादेश की इमेज खराब हुई है?
जवाब: शेख हसीना के समर्थक और उनकी पैरवी करने वाले ये कहानियां गढ़ रहे हैं कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक खतरे में हैं। भारतीय मीडिया इस कहानी को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक शांति से रह रहे हैं।
हम किसी को अल्पसंख्यक नहीं मानते, सभी को देश के नागरिक के तौर पर देखते हैं। देश का नागरिक होने के नाते मेरे कुछ अधिकार हैं और उनके भी। अलग-अलग कल्चर के बावजूद शांति से रहना हमारी परंपरा है।

सवाल: अंतरिम सरकार ने जमात-ए-इस्लामी पर से बैन हटा दिया। इस संगठन का नाम हिंदुओं पर हमले में आया है। सरकार ने बैन क्यों हटाया?
जवाब: शेख हसीना ने 5 अगस्त से कुछ दिन पहले जमात पर बैन लगाया था। यह शेख हसीना का फैसला था। इसके लिए किसी से सलाह नहीं ली गई। ऐसा सिर्फ समस्या पैदा करने और आंदोलन से जुड़े लोगों को परेशान करने के लिए किया गया। इसीलिए हमने जमात से बैन हटा दिया।
सवाल: बांग्लादेश और पाकिस्तान की नजदीकियां बढ़ रही हैं। क्या इसमें भारत के लिए कोई मैसेज है?
जवाब: हम पड़ोसी देशों से बिना किसी रुकावट के बात कर सकते हैं। आपको हर देश, खासकर पड़ोसियों से रिश्ते बनाने होंगे। हम हमारे आयात-निर्यात और कारोबार पर किसी एक देश का अधिकार नहीं चाहते। हम दूसरे बाजारों और संबंधों को भी एक्सप्लोर करना चाहते हैं।
बांग्लादेश विकासशील देश है। हमें चीन, पश्चिमी देशों और पड़ोसियों की मदद की जरूरत है। शेख हसीना की सरकार में इन देशों के साथ रिश्ते बढ़ाने में कई रुकावटें थीं। हमारी किसी से दुश्मनी नहीं है। हमारा संविधान सभी से दोस्ती बनाने की बात कहता है।
सवाल: इस्लामिक पार्टियां कह रही हैं कि अगर चुनाव जीतकर सत्ता में आईं तो कुरान और शरीया कानूनों को संविधान में शामिल किया जाएगा। इस पर आपका क्या सोचना है?
जवाब: बांग्लादेश के लोगों की स्थिति को देखते हुए यह मुमकिन नहीं है। पिछले 15 साल में इन पार्टियों ने भी चुनाव लड़े हैं। ये पार्टियां अकेले या अपने दम पर सरकार में नहीं आ सकतीं। बांग्लादेश के ज्यादातर लोग किसी एक विचारधारा की तरफ झुकाव नहीं रखते।
हम अच्छी सरकार और डेवलप देश चाहते हैं। वैचारिक और सांस्कृतिक लड़ाई नहीं लड़ना चाहते। मुझे नहीं लगता कि आने वाले वक्त में देश के सेक्युलर ताने-बाने को तोड़ने की कोई कोशिश हो सकती है।

सवाल: शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के नेता कह रहे हैं कि उनकी जान को खतरा है, इसलिए छिपकर रहना पड़ रहा है?
जवाब: अवामी लीग के वही लीडर और वर्कर्स छिप रहे हैं, जो लोगों की हत्या में शामिल थे। उनके खिलाफ केस दर्ज हैं। हम डिजिटल युग में हैं। आज हर घटना का वीडियो मौजूद होता है। हम देख सकते हैं कि आंदोलन के दौरान अवामी लीग के लोगों ने हत्याएं की थीं।
वे हमसे नहीं छिप रहे है। वे इंसाफ से भाग रहे हैं। उन लोगों को जेल में होना चाहिए था। अवामी लीग के वे नेता, जो नरसंहार में शामिल नहीं थे, आजाद घूम रहे हैं। हमने अब तक सिर्फ 10 हजार लोगों को कैद किया है। आंदोलन के दौरान अवामी लीग की सरकार ने 25 हजार लोगों को अरेस्ट किया था।


सवाल: आपका आंदोलन रिजर्वेशन सिस्टम में बदलाव के लिए था, ये शेख मुजीबुर्रहमान और शेख हसीना के खिलाफ कैसे हो गया?
जवाब: हम कोटा सिस्टम हटाना चाहते थे। 2018 में हमने आंदोलन शुरू किया। तब कोटा सिस्टम खत्म कर दिया गया। 2024 में हाईकोर्ट ने कोटा सिस्टम फिर से लागू कर दिया। इसलिए हमें सड़क पर उतरना पड़ा।
हम शांति से आंदोलन कर रहे थे। अवामी लीग की सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर जुल्म किया। पुलिस ने हमले किए। आंदोलन के पहले फेज में करीब 300 लोगों को मार डाला। इसके बाद हमने फैसला लिया कि हम मनमानी और कत्ल करवाने वाली सरकार को नहीं झेल सकते।
बांग्लादेश के लोगों में हमेशा से शेख हसीना की तानाशाही सरकार के खिलाफ विरोध था। पिछले तीन चुनावों में लोगों को वोट देने का अधिकार नहीं मिला। शेख हसीना ने आंदोलन में शामिल हमारे लोगों को मारा, तब लोगों की भावना सामने आ गई। इसलिए हमने आंदोलन को फासीवाद के विरोध के तौर पर आगे बढ़ाया।
सवाल: जॉय बांग्ला को राष्ट्रीय नारा न मानना, नोटों से शेख मुजीबुर्रहमान की फोटो हटाने की तैयारी, उनकी निशानियों को खत्म करना, ये सब क्यों किया जा रहा है?
जवाब: बांग्लादेश ने 1947, 1971 और 1990 में लड़ाई लड़ी है। इसका कोई एक राष्ट्रपिता नहीं हो सकता। आजादी की जंग में कई लोग शामिल थे। हमारे पास मौलाना हामिद खान वसानी, हुसैन सुहरावर्दी और जोगेन मंडल जैसे कई संस्थापक पिता हैं।
हम उन नेताओं का भी सम्मान करना चाहते हैं, जिन्होंने क्रांति में हिस्सा लिया। उन्होंने पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ लंबी लड़ाई को लीड किया। हम किसी एक शख्सियत को अपना आइकॉन नहीं बना सकते।

अवामी लीग ने मुजीबुर्रहमान का चेहरा दिखाकर फासीवादी सरकार चलाई। लोगों की हत्या और उन्हें जबरन गायब करवाने को सही ठहराया। उन्होंने शेख मुजीबुर्रहमान का नाम लेकर अपने हर गलत काम को सही ठहराया। हम मानते हैं कि मुजीबुर्रहमान बांग्लादेश के संस्थापकों में से एक हैं, लेकिन वे राष्ट्र के इकलौते पिता नहीं हो सकते।