एम्स डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया ने किया आने वाले खतरे के लिए आगाह

बीते कुछ दिनों से महाराष्ट्र, यूपी समेत देशभर में कोरोना वायरस (Corona virus news) के मामलों में तेजी से कमी आ रही है। नतीजा है कि देश में ऐक्टिव केस भी तेजी से कम हो रहे हैं और जनजीवन सामान्य होता दिख रहा है। हालांकि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों को आगाह किया है और मास्क और दो गज की दूरी जैसी सावधानियां अब भी बरतने के लिए कहा है। वहीं अब एम्स के डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया की मानें तो यह राहत ज्यादा दिन नहीं टिकने वाली।

एम्स के डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया ने चेताया है कि यह राहत ज्यादा दिन नहीं टिकने वाली। उन्होंने कहा कि स्वाइन फ्लू सर्दियों में तेजी से फैलता है। इसी तरह कोविड भी फैलेगा। इस बात के भी सबूत हैं कि वायु प्रदूषण भी कोविड-19 के प्रसार में काफी हद तक मदद करेगा। इस पर इटली और चीन में कुछ महीनों पहले ही स्टडी की गई है।

प्लाज्मा थेरपी की सफलता पर कुछ बोलना अभी जल्दबाजी’
दूसरी तरफ डॉ. रणदीप गुलेरिया ने आईसीएमआर के उस दावे पर भी प्रतिक्रिया दी जिसमें कहा गया है कि प्लाज्मा थेरपी से कोविड से होने वाली मौतों में कमी नहीं आई है। उन्होंने कहा, ‘यह कहना जल्दबाजी होगी। अभी हमें और डेटा का इंतजार करना चाहिए। आईसीएमआर की स्टडी में जिन मरीजों पर अध्ययन किया गया उनमें से ज्यादातर में पहले से एंटीबॉडीज थे। अगर आपमें पहले से एंटीबॉडी हैं तो बाहर से उसे देने का कोई खास लाभ नहीं होता।’

 

‘प्लाज्मा सबके लिए लाभकारी, यह दावा करना गलत’
उन्होंने कहा, ‘प्लाज्मा कोई मैजिक बुलेट नहीं है। हमें इसे वहीं इस्तेमाल करना है जहां इसकी सख्त जरूरत है। यह दावा करना गलत है कि ये सबके लिए लाभकारी है। कोविड से हमने यही सीखा है कि इलाज में सही समय का खास महत्व है।’

प्रधानमंत्री ने किया आगाह, जब तक वैक्सीन नहीं तब तक सावधानी जरूरी
मंगलवार शाम राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में भी पीएम मोदी ने लोगों ने सावधानी बरतने की अपील की थी। प्रधानमंत्री ने कबीरदास के दोहे ‘पकी खेती देखिके, गरब किया किसान। अजहूं झोला बहुत है, घर आवै तब जान…’ का जिक्र करते हुए समझाया कि पकी हुई फसल देखकर ही कुछ लोग अति आत्मविश्वास से भर जाते हैं कि अब तो काम हो गया। लेकिन जब तक सफलता पूरी ना मिल जाए, लापरवाही नहीं करनी चाहिए। जब तक इस महामारी की वैक्सीन नहीं आ जाती, हमें अपनी इस लड़ाई को कमजोर नहीं पड़ने देना है।

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