
मेट्रो में हुए 110 करोड़ के घोटाले की जांच शुरू कर दी गई है। मंगलवार को मेट्रो प्रबंधन के जीएम ने सभी फाइलें और उन्हें पास करने वाले अधिकारियों की जानकारी निकलवाई। गांधीनगर से शहीद पार्क तक 17.5 किमी के कॉरिडोर में 11 किमी वायाडक्ट व 16 स्टेशन का काम आरवीएनएल को 1400 करोड़ में दिया गया है। शिकायत में, जिस 110 करोड़ के अतिरिक्त भुगतान की बात है, उसके लिए काॅन्ट्रैक्टर ने 10 से ज्यादा फाइलें लगाई थीं।
जीएम एलीवेटेड सभी की जांच के लिए कहा गया है। भुगतान के समय चीफ कॉस्ट कंट्रोलर एम व्यंकटेश, प्रोजेक्ट डायरेक्टर साइमन फौरी व डायरेक्टर अजय शर्मा थे। जांच में अगर अतिरिक्त भुगतान का खुलासा होता है तो उसकी पूरी रिकवरी की जाएगी।
जीएम बोले- भुगतान की पूरी प्रक्रिया में कई लोग शामिल मेट्रो के जीएम अंडरग्राउंड अजय कुमार ने बताया, यह सही है कि यह भुगतान मेरे कार्यकाल में हुआ। इस प्रक्रिया में कई लोग शामिल होते हैं। जांच में सबकुछ सामने आ जाएगा। जुलाई 2024 से जीएम एलीवेटेड आरएस राजपूत देख रहे हैं।
प्रोजेक्ट डायरेक्टर की आपत्ति के बाद भुगतान कैसे
तत्कालीन अधिकारियों ने बताया तत्कालीन प्रोजेक्ट डायरेक्टर साइमन फौरी ने भी आरवीएनएल के अतिरिक्त भुगतान पर आपत्ति जताई थी। मीटिंग में मेट्रो के तत्कालीन एमडी, डायरेक्टर प्रोजेक्ट, जीएम भी मौजूद थे। चीफ कॉस्ट कंट्रोलर ने भी भुगतान से इंकार कर दिया था। फिर भी भुगतान किया गया। 110 में से करीब 70 करोड़ 2023 में ही दे दिए गए थे।
शिकायत के बाद मेरा ई-मेल बंद कर दिया
विजिलेंस कमिश्नर को शिकायत करने वाले एम व्यंकटेश ने बताया, मैंने ही भुगतान का विरोध किया था। जो भुगतान किए गए हैं, उनमें मेरे हस्ताक्षर नहीं हैं। मैंने शिकायत अधिकारिक ई-मेल से की थी। इसे ब्लाॅक कर दिया गया है।