विधायक ऑफिस पर दनादन गोलियां दागते कौन है प्रणव चैंपियन ? विवादों से रहा है पुराना नाता; जानें कब-कब रहे सुर्खियों में — देखें VIDEO

रंग-बिरंगी पगड़ी पहने, एक हाथ में रायफल और दूसरे हाथ की रिवॉल्वर से दनादन गोलियां दागते शख्स का नाम है प्रणव सिंह चैंपियन। ये उत्तराखंड में हरिद्वार की खानपुर विधानसभा सीट से BJP के पूर्व विधायक हैं। जिस पर फायरिंग कर रहे हैं, वो वर्तमान निर्दलीय विधायक उमेश कुमार का ऑफिस है। एक अन्य वीडियो में उमेश कुमार भी पुलिस के सामने अपनी पिस्टल लहराते हुए प्रणव चैंपियन को ललकार रहे हैं।

एक-दूसरे के खून के प्यासे क्यों हुए मौजूदा और पूर्व विधायक, कितनी पुरानी है रंजिश और क्या दिनदहाड़े गोलीबारी करने वालों के सामने पुलिस बेबस है; जानेंगे…

सवाल 1: प्रणव सिंह और उमेश कुमार के बीच रंजिश की असली वजह क्या है? जवाब: प्रणव सिंह चैंपियन खानपुर सीट पर 4 बार विधायक रहे हैं। पहलवानी के पुराने शौकीन प्रणव इस इलाके की संपन्न लंढौरा रियासत से आते हैं और खुद को राजा बताते हैं। विधायक रहते हुए भी प्रणव सिंह कई बार पब्लिक प्लेस पर फायरिंग करने और ऑफिस में डांस पार्टी करवाने के चलते चर्चा में रहे।

2022 में BJP ने खानपुर सीट से प्रणव की पत्नी कुंवरानी देवयानी सिंह को उम्मीदवार बनाया था। उन्हें कड़ी टक्कर दे रहे थे निर्दलीय उम्मीदवार उमेश कुमार। पेशे से पत्रकार उमेश कुमार मूलतः मुजफ्फरनगर के रहने वाले हैं। यह इलाका खानपुर से बहुत दूर नहीं है।

उमेश के क्रिकेटर सुरेश रैना जैसे कई बड़े लोगों से अच्छे संबंध हैं। उनका चुनाव निशान हेलिकॉप्टर था। चुनाव प्रचार में उमेश ने कई बार रैलियों में हेलीकॉप्टर उतारा। इसी समय से प्रणव और उमेश सोशल मीडिया पर एक-दूसरे को लेकर बयानबाजी करने लगे। प्रणव उमेश को लगातार बाहरी बताते रहते थे।

चुनाव के नतीजे आए तो प्रणव की पत्नी देवयानी तीसरे स्थान पर रहीं और उमेश कुमार चुनाव जीत गए। उमेश को 38 हजार से ज्यादा वोट मिले, वहीं बसपा के उम्मीदवार रवींद्र सिंह को करीब 31 हजार और देवयानी सिंह को करीब 30 हजार वोट मिले। देवयानी की हार के बाद उमेश और प्रणव की चुनावी अदावत रंजिश में बदल गई।

स्थानीय पत्रकार पंकज राणा बताते हैं कि 2022 के बाद से ही दोनों लोग सोशल मीडिया पर एक-दूसरे के लिए गालीगलौच और बेहद घटिया बयानबाजी करने लगे थे। हालांकि, दोनों का कभी आमना-सामना नहीं हुआ।

सवाल 2: पिछले दिनों ऐसा क्या हुआ कि प्रणव सिंह दिनदहाड़े गोलियां बरसाने लगे? जवाब: 23 जनवरी को हरिद्वार में नगर निकाय के चुनाव थे। 25 जनवरी को आए नतीजे में रुड़की नगर निगम के मेयर पद के लिए उमेश की समर्थित उम्मीदवार श्रेष्ठा राणा की हार हुई और प्रणव BJP की उम्मीदवार अनीता अग्रवाल के लिए मेहनत कर रहे थे, वो जीत गईं। इसके बाद का घटनाक्रम…

  • 25 जनवरी की शाम को सोशल मीडिया पर प्रणव सिंह ने उमेश को लेकर अपमानजनक पोस्ट लिखी और लाइव वीडियो में गाली-गलौच की।
  • जब उमेश को इसके बारे में पता चला तो रात करीब 11 बजे वह अपने कुछ लोगों के साथ लंढौरा में प्रणव के घर के बाहर पहुंचे। वहीं से लाइव वीडियो बनाकर प्रणव को बाहर निकलने की चुनौती देने लगे।
  • रात में प्रणव बाहर नहीं आए। वह संभवतः अपने देहरादून वाले घर में थे। अगले दिन यानी 26 जनवरी की शाम 4 बजे तीन गाड़ियों से उमेश के कैंप ऑफिस पहुंचकर प्रणव ने ऑफिस पर हमला कर दिया। प्रणव सिंह और उनके लोगों ने करीब 50 राउंड फायरिंग की, गाली-गलौच की और ऑफिस में तोड़फोड़ भी की।
  • उस समय उमेश ऑफिस में ही मौजूद थे, लेकिन वह पुलिस के आने के बाद ही बाहर निकले। उनके हाथ में पिस्तौल थी। हालांकि, पुलिस कर्मियों ने उन्हें रोक लिया। इस दौरान प्रणव और उनके लोगों की गाड़ियां मौके से चली गईं।
पिस्तौल लेकर ऑफिस से निकलते उमेश।

कुछ देर बाद प्रणव ने उमेश के ऑफिस पर हमले और फायरिंग के वीडियो अपने फेसबुक अकाउंट पर खुद शेयर किए। उमेश का कहना था, ‘कल प्रणव ने मेरी मां को लेकर अपशब्द कहे थे। उसके बदले में मैं उनके घर पर गया। मैंने कोई गोलीबारी या हमला नहीं किया। आज इन्होंने गोलीबारी की है। इसका जवाब मैं दूंगा। इन्हें छोडूंगा नहीं।’

सवाल 3: दोनों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई हुई है? जवाब: उमेश की तरफ से प्रणव सिंह चैंपियन की गिरफ्तारी की मांग को लेकर सिविल लाइन्स कोतवाली में शिकायत दी गई। फोरेंसिक टीम ने मौके से सबूत जुटाए। इसके बाद देर रात प्रणव ने देहरादून में नेहरू कॉलोनी वाले घर पर पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया। प्रणव को रात में हरिद्वार के रानीपुर थाने में रखा गया था। जहां से मेडिकल के बाद कोर्ट ले जाया गया। वहीं प्रणव की पत्नी देवयानी सिंह की शिकायत के बाद उमेश को भी हिरासत में लिया गया था।

हरिद्वार SSP परमेंद्र सिंह डोभाल ने बताया कि दोनों पक्षों के 5-5 लोगों को हिरासत में लिया गया था। प्रणव और उमेश की कोर्ट में पेशी हुई, इसके बाद प्रणव को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।

वहीं उमेश के खिलाफ हमले के सबूत नहीं मिले, इसलिए उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया। इसके अलावा प्रणव, उनके बेटे और पत्नी के नाम 3-3 यानी कुल 9 लाइसेंसी हथियार हैं। इन सभी का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रणव की पुलिस सुरक्षा भी वापस ले ली गई है।

सवाल 4: जिन धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ, उनमें क्या सजा हो सकती है? जवाब: प्रणव सिंह के खिलाफ दर्ज FIR में भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की धारा 109 (हत्या का प्रयास) सहित 191(2) और (3) यानी जानलेवा हथियार लेकर दंगा भड़काना, 333 (किसी के घर में घुसकर हमला करना) जैसी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा FIR में 190, 115(2), 191(2), 191(3), 324(4) जैसी धाराएं भी शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील आशीष कुमार पांडेय के मुताबिक, BNS की धारा 109 के तहत जानलेवा हमला करने के लिए कम से कम 10 साल की सजा होती है। अगर गोलीबारी में कोई घायल हुआ है तो यह सजा उम्रकैद में भी बदल सकती है। इसके अलावा अन्य कई धाराएं लगाई गई हैं, जिनके तहत 2 साल से 7 साल कैद की सजा हो सकती है।

सवाल 5: प्रणव सिंह सत्ताधारी BJP के नेता हैं, पार्टी ने इस पर क्या एक्शन लिया? जवाब: उत्तराखंड के BJP प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने बातचीत में प्रणव सिंह का बचाव करते हुए कहा, ‘पहले उमेश उनके घर पर पहुंचे थे। अगर प्रणव सिंह ने उनके लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया था तो उन्हें पुलिस में शिकायत दर्ज करवानी चाहिए थी। अभी प्रणव पुलिस की हिरासत में हैं। पार्टी उनसे आमने-सामने बात करेगी, इसके पहले कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता।’

भट्ट ने आगे कहा कि प्रणव से जुड़ी इस तरह की घटनाओं पर पार्टी ने उन्हें नोटिस जारी किया था। उन्होंने कहा था कि आगे ऐसी कोई घटना नहीं होगी।

प्रणव सिंह चैंपियन मंत्री की डिनर पार्टी में भी गोली चला चुके

उमेश कुमार पत्रकारिता से जुड़े रहे जेल भी जा चुके

 

सवाल 6: इस घटना से उत्तराखंड की राजनीति पर क्या फर्क पड़ेगा?

जवाब: स्थानीय पत्रकार पंकज राणा बताते हैं,

उत्तराखंड में नेताओं के बीच इस तरह के गैंगवॉर पहले कभी नहीं हुए। चैंपियन की छवि ऐसी ही है। उमेश कुमार भी कई विवादों में रहे। खानपुर विधानसभा में बाहुबली नेता पसंद किया जाता है। इसलिए अब ये वर्चस्व की जंग बन चुकी है।

उत्तराखंड के सीनियर पत्रकार अजीत सिंह भी कहते हैं कि पहले उत्तराखंड में इस तरह की हिंसक राजनीति पसंद नहीं की जाती थी कि लोग एक दूसरे के खून के प्यासे हो जाएं। हालांकि, इन दोनों नेताओं की छवि बाहुबली की है। बड़ी तादाद में दोनों के पास ऐसे समर्थक हैं जिन्हें ये छवि पसंद आती है।

वह आगे कहते हैं कि उत्तराखंड बहुत संघर्षों के बाद बना राज्य है। सरकार और प्रशासन के सामने चुनौती है कि वह इस मामले को कैसे संभालते हैं, क्योंकि ये घटना पूरे प्रदेश के लिए चिंताजनक है। इस घटना में कई लोगों की जान भी जा सकती थी। जब यह विवाद सोशल मीडिया पर चल रहा था तभी पुलिस को एक्शन लेना चाहिए था।

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