उज्जैन की खाचरौद तहसील के लेकोडिया गांव की नंदराज गौधाम गोशाला से पिछले 3 महीने में 544 गायें लापता हो गई हैं। इसकी जानकारी खाचरौद के मां बगलामुखी मंदिर के पीठाधीश स्वामी कृष्णानंद जी महाराज को लगी तो उन्होंने महाराष्ट्र और हरियाणा के संतों के साथ खाचरौद में ही मुंडन कर विरोध दर्ज कराया।
इसके बाद भी जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने एक वीडियो जारी कर गायों के गायब होने का आरोप खाचरौद विधायक तेज बहादुर सिंह चौहान पर लगाया। स्वामी कृष्णानंद महाराज ने कहा- मैं उन्हें विधायक नहीं मानता। अगर वे दूसरी बार जीत गए तो मैं सरेआम अपनी मूंछें मुंडवा लूंगा। जो अंधा-बहरा और गूंगा है, ऐसे विधायक पर शर्म आती है। धिक्कार है ऐसे विधायक पर। जितने भी विधायक बने हैं, उनमें से सबसे गंदा कार्यकाल वर्तमान विधायक का रहा है।
संत के आरोपों का जवाब देते हुए विधायक चौहान ने कहा- मुझे गोशालाओं से कोई लेना-देना नहीं है। आरोप साबित हुए तो गंगा में समाधि ले लूंगा।
सच्चाई जानने पहुंची तो पता चला कि गोशाला से वाकई करीब 500 से ज्यादा गायें गायब हैं। गोशाला समिति के सदस्य इस मामले में कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। वहीं, संत समाज प्रयागराज पहुंचे तमाम अखाड़ों के संतों के साथ मिलकर विशाल प्रदर्शन करने की तैयारी में है।
गोशाला की गायें कैसे गायब हुईं? संतों का गुस्सा क्यों बढ़ता जा रहा है और विधायक का नाम इस मामले से क्यों जुड़ा, पढ़िए रिपोर्ट…
क्या है नंदराज गौधाम गोशाला का विवाद

जानिए, कैसे हुआ लापता गायों का खुलासा
लेकोडिया गांव पहुंची और पता किया कि गोशाला में गायों की संख्या कम है, इसका पता कैसे चला तो ग्रामीणों ने राहुल सिंह पंवार से मिलने के लिए कहा। गांव के युवक राहुल ने ही इस पूरे मामले का खुलासा किया है।
राहुल ने बताया- सितंबर के महीने में मंत्री गौतम टेटवाल ने गोशाला में पौधरोपण का कार्यक्रम किया था। तब मैं वहां गया था। मैंने देखा कि वहां बड़ी संख्या में गायें थीं। इसके बाद जनवरी में गोशाला परिसर में ही भागवत कथा का आयोजन किया गया। तब भी मैं वहां गया था।
उस वक्त मैंने देखा तो गोशाला में गायों की संख्या बहुत कम दिखी। ये देखकर संदेह पैदा हुआ। इसके बाद मैंने समिति के पूर्व अध्यक्ष से गायें कम होने की वजह जाननी चाही। ये बात जानकर वो भी चौंक गए। इसके बाद उन्होंने अपने लेटरपैड पर वेटरिनरी हॉस्पिटल के डॉ. भूपेंद्र पाटीदार को घपले की जानकारी दी और जांच करने को कहा।
वेटरिनरी डॉक्टर ने एक समिति का गठन किया। जब समिति ने गोशाला जाकर काउंटिंग की तो वहां 530 गायें ही पाई गईं, जबकि अक्टूबर के महीने में यहां गायों की संख्या 1074 थी। हमने इसके पूरे सरकारी आंकड़े निकलवा रखे हैं।
गोशाला में ऐसे कम होती गई गायें

जान से मारने की धमकी देने का आरोप राहुल ने कहा- पिछले 3 महीने से ये गायें कहां हैं, इसका जवाब गोशाला समिति के पास नहीं है। वो लगातार गोलमोल जवाब दे रहे हैं। मेरे हिसाब से इन गायों को कहीं बेच दिया गया है। जब मैंने आवाज उठाने की कोशिश की तो मुझे समिति से जुड़े लोगों की तरफ से पैसा लेकर मुंह बंद रखने और जान से मारने की धमकियां मिलने लगीं।
मैं बगुलामुखी पीठाधीश्वर कृष्णानंद महाराज के पास पहुंचा। उन्हें सरकारी आंकड़ों के साथ पूरा मामला बताया। वे गोसेवा को लेकर संजीदा व्यक्ति हैं। 16 राज्यों में गो संरक्षक के पद पर हैं। स्वयं के स्तर पर पूरे मामले की छानबीन करने के बाद उन्होंने 13 जनवरी को शासन प्रशासन से जुड़े लोगों को ज्ञापन सौंपा।
जब 10 दिन तक मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई तो फिर उन्होंने प्रयागराज जा रहे महाराष्ट्र और हरियाणा के कुछ संतों और नागा साधुओं के साथ गायों को श्रद्धांजलि देते हुए मुंडन का कार्यक्रम रखा और विरोध दर्ज कराया।

जनपद सदस्य पर ने मां के पैर पर चढ़ाई कार राहुल ने कहा- मैं सोशल मीडिया पर भी मुद्दे को उठा रहा था। जैसे ही मेरे वीडियो वायरल होने शुरू हुए, समिति से जुड़े बाहुबलियों ने मुझे धमकाना शुरू कर दिया। 15 जनवरी को मेरे पास कॉल आया कि राहुल तुम कुछ ले-देकर मामला खत्म करो। मैंने कहा- 544 गायों की बात है, ऐसे कैसे मामला खत्म कर दो?
जब मैंने उनकी बात नहीं मानी तो जनपद सदस्य विजय सिंह ने 19 जनवरी की रात 10 लोगों के साथ मेरे घर पर हमला बोल दिया। तब मैं घर पर मौजूद नहीं था। रात 9.30 की ट्रेन से मैं खाटू श्याम दर्शन के लिए निकल गया था। विजय सिंह ने मेरे माता-पिता को धमकी दी, ‘उसे समझा लो कि गोशाला वाले मामले में बोलना बंद कर दे, नहीं तो उसे जान से निपटा देंगे।’
पिता जी ने कहा कि वो गायों के लिए लड़ रहा है। कुछ गलत नहीं कर रहा है। वो सब नशे में थे। उन्होंने जाते-जाते मेरी मां के पैर में टॉमी मार दी। वो नीचे सड़क पर ही गिर पड़ीं।
इसके बाद विजय सिंह ने अपनी कार चालू की और आगे की तरफ चला गया। फिर बैक कर फुल स्पीड में वापस आया। सभी घरवाले तो भागकर रोड किनारे आ गए लेकिन मेरी मां नहीं भाग पाई। विजय सिंह उनके पैर पर गाड़ी चढ़ाते हुए निकल गया। तब से लेकर 30 जनवरी तक मेरी मां रतलाम हॉस्पिटल में भर्ती रहीं। उनके पैर में रॉड डाली है। वो अभी भी बिस्तर पर ही हैं।

सीएम हेल्पलाइन में 6 शिकायतें, तब दर्ज हुई FIR राहुल ने बताया- पुलिस ने भी कई दिन तक मेरी एफआईआर दर्ज नहीं की। राजीनामा करने का दबाव बनाया। मैंने सीएम हेल्पलाइन में 6 शिकायत दर्ज कराईं, तब जाकर एफआईआर दर्ज हुई। एफआईआर भी उन्होंने गालीगलौज की धारा में दर्ज की है। हम पर हमला करने वाला विजय सिंह जनपद सदस्य है और गोशाला समिति के लोगों से उसे राजनीतिक फायदा मिलता है। मां का पैर टूटने के बाद से ही मैं डर के चलते घर से नहीं निकल पा रहा हूं।
राहुल के मुताबिक, गोशाला समिति के लोगों ने मीडिया समेत प्रशासनिक अधिकारियों को गोलमोल जवाब दिए हैं। एक बयान में उन्होंने स्थानीय मीडिया को बताया कि गायों को लुनेरा, रूनखेड़ा और चापाखेड़ा गोशाला में ट्रांसफर किया है।
जब स्थानीय मीडिया के लोग इन गोशालाओं में पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि लोकोडिया से एक भी गाय नहीं आई है। इसके बाद समिति के सदस्यों ने कहा कि हमें पिछली समिति ने ही कम गायें दी थीं जबकि पूर्व समिति 2023 में ही अपना कार्यभार नई समिति को सौंप चुकी थी।
समिति के लोग प्रशासन को गुमराह कर रहे हैं। कभी कह रहे हैं कि गायों की मौत हो चुकी है तो कभी कहते हैं कि ग्रामीणों को पालने के लिए ती है। ये सच्चाई छिपाने की कोशिश कर रहे हैं।
-राहुल सिंह पंवार, मामले का खुलासा करने वाले
गोशाला समिति के सचिव ने कहा- एसडीएम को जवाब दे दिया
टीम ने नंदराज गौधाम गोशाला के सचिव मदन सिंह तंवर से फोन पर बात की। उन्होंने कहा- आप गोशाला पहुंचिए। मैं भी गोशाला ही पहुंच रहा हूं। टीम जब गोशाला पहुंची तो मदन सिंह वहां मौजूद नहीं थे। उन्हें लगातार कई फोन किए, लेकिन उन्होंने किसी भी कॉल का जवाब नहीं दिया।
एक ग्रामीण के फोन से सचिव को कॉल किया तो उन्होंने तत्काल फोन उठा लिया। इसके बाद उन्होंने बात की। उन्होंने कहा- गायें कहां और कैसे गायब हुई हैं, इसका जवाब एसडीएम और वेटरिनरी डिपार्टमेंट को दे चुके हैं। इससे ज्यादा कोई बात नहीं कर सकते।
सचिव की गैर मौजूदगी में ही टीम गोशाला में दाखिल हुई। वहां कुछ महिलाएं और पुरुष अपने-अपने काम में व्यस्त थे। जब उनसे मामले को लेकर बात करनी चाही तो किसी ने बात नहीं की। गोशाला में कुछ गायें मौजूद थीं। उनकी संख्या भी कम ही दिखाई दे रही थीं।

ग्रामीणों से कहा था- अपनी गायों को गोशाला की बता देना
गोशाला से वापस लेकोडिया गांव आकर हमने कुछ ग्रामीणों से बात की। केसरिया गांव में रहने वाले रेमन सिंह ने बताया- कुछ दिन पहले मेरे गांव के 2 लोगों के पास गोशाला समिति के कुछ लोगों का कॉल आया था। वो लोग समिति से जुड़े लोगों के परिचित थे।
समिति के लोगों ने उन किसानों से कहा कि प्रशासन पूछताछ करने आए तो बता देना कि जो गायें तुम्हारे पास हैं, वो गोशाला से ही लाए हो। उस वक्त तो वो ऐसा करने को मान गए, लेकिन जब उन्हें पूरे मामले की जानकारी लगी और पता चला कि उनकी गायों को गोशाला भेज दिया जाएगा तो उन्होंने समिति के लोगों की बात मानने से इनकार कर दिया।
गांव के कई लोगों के पास समिति के लोगों का फोन आया था, लेकिन किसी ने भी समिति के लोगों की बात मानने से इनकार कर दिया है। हम लोग गोशाला की गायें बताते तो प्रशासन उन्हें जब्त कर लेता।
– रेमन सिंह ग्रामीण केसरिया गांव
वेटरिनरी डॉक्टर्स ने कहा- एप से हर दिन होती है गायों की एंट्री खाचरौद के वेटरिनरी डॉ. विपिन खराड़ी ने बताया- गो संवर्धन बोर्ड ने एक एप्लिकेशन बनाया है। उस एप्लिकेशन के जरिए गोशाला प्रबंधक को हर दिन की एंट्री ऑनलाइन करनी होती है। इसके बाद वो एंट्री गोशाला में डॉक्टर के द्वारा सत्यापित की जाती है।
सत्यापन के दौरान हमें नवंबर और दिसंबर माह में गोवंश की संख्या 530 मिली। इसके बाद हमने इसकी सूचना वरिष्ठ कार्यालय को दी थी। वरिष्ठ कार्यालय ने हमें 2-3 डॉक्टर्स के साथ क्षेत्राधिकारी की एक समिति बनाकर निरीक्षण करने का निर्देश दिया।
निरीक्षण में हमें 530 गोवंश मिले थे, जबकि अक्टूबर के महीने में गोवंश की संख्या 1074 थी। इसके बाद हमने गोशाला प्रबंधन से जवाब मांगा कि बाकी गायें कहां हैं? तो उन्होंने कहा कि उनकी गोशाला में एक शेड का निर्माण कार्य चल रहा है, इसलिए उन्होंने गायों को किसानों को पालने के लिए दान में दिया है। हालांकि, गोशाला प्रबंधन इसको लेकर कोई तथ्य नहीं दे पाया है।
हमने इसको लेकर गोशाला प्रबंधन को कोई डेडलाइन नहीं दी है। नवंबर महीने में गोशाला प्रबंधन द्वारा निश्चित समय पर एप पर गायों की एंट्री नहीं की गई थी। इसके बाद एक टाइम पीरियड के बाद उनका एंट्री करना बंद हो गया था। नवंबर महीने की एंट्री उन्होंने दिसंबर माह में की थी।
इसके बाद हम जनवरी में वेरिफिकेशन के लिए गए थे, तब ये पूरा मामला सामने आया। नवंबर माह में गोशाला को 530 के हिसाब से ही राशि जारी हुई है। डॉ. भूपेंद्र पाटीदार ने कहा कि इतनी ज्यादा मात्रा में गो-वंश कैसे गायब हुआ, इस बारे में तो गोशाला समिति ही बता सकती है।
हमने उनसे कहा है कि जिन किसानों को गायें दी हैं उनके नाम बताएं, लेकिन वो अभी तक कोई साक्ष्य पेश नहीं कर पाए हैं। साक्ष्य पेश करने की कोई डेडलाइन तो नहीं दी है, लेकिन उन्हें फिर से रिमाइंड कराएंगे।
– भूपेंद्र पाटीदार, वेटनरी डॉक्टर
कृष्णानंद महाराज ने प्रयागराज में कहा- विरोध में संतों का मेला लगेगा
कृष्णानंद महाराज ने कहा- हमारी दो मांगें थीं। पहली- जब गोशाला में गायों की संख्या 530 है तो 1074 गायों के हिसाब से राशि क्यों दी जा रही है? विरोध के बाद ये मांग तो मान ली गई है, लेकिन हमारी दूसरी मांग सबसे महत्वपूर्ण है।
आखिर 544 गायें गायब कहां हो गईं? हम शासन प्रशासन से लगातार जांच की मांग कर रहे हैं। हमें जानना है कि आखिर वो गायें गईं कहां? आरोपियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई हो।
पिछले 20 दिनों से शासन-प्रशासन मौन बैठा है। अगर ढंग से कार्रवाई नहीं हुई तो कुछ ही दिनों में प्रयागराज में इकट्ठे हुए 13 अखाड़े के संतों का मेला खाचरौद में लगेगा। विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
– कृष्णानंद महाराज
पीठाधीश, बगलामुखी मंदिर
विधायक बोले- गोशाला संचालन से मेरा कोई वास्ता नहीं कृष्णानंद के आरोपों का जवाब देते हुए विधायक तेजबहादुर सिंह चौहान ने कहा- महंत ने मुझे नशेड़ी कहा है। मैं बताना चाहता हूं कि न मैं कोई व्यसन करता हूं, न ही नशेड़ी हूं। अगर आप साबित कर देंगे तो राजनीति और सामाजिक क्षेत्र से खुद को अलग कर लूंगा।
उन्होंने मुझ पर आरोप लगाया कि गोवंश के खिलाफ क्षेत्र में जितने भी अनैतिक कार्य चल रहे हैं, उसका रैकेट चलाने का काम मेरे संरक्षण में चल रहा है। अगर ये साबित कर देंगे तो मैं गंगा में डुबकी लगा कर समाधि लेने को तैयार हूं। जनता को मुंह नहीं दिखाऊंगा।
विधायक 1 से 7 जनवरी को गोशाला परिसर में चल रही भागवत कथा में पहुंचे थे। उन्होंने घोषणा की थी कि वो गोशाला को निजी सहयोग के तौर पर 10 हजार रुपए की राशि अर्पित करेंगे। जनवरी के आखिरी सप्ताह में उन्होंने समिति को इसका चेक भी सौंपा था।
मेरा किसी गोशाला के संचालन से पहले भी कोई वास्ता नहीं था और आज भी कोई वास्ता नहीं है। मैं किसी गोशाला का सदस्य और पदाधिकारी नहीं हूं। मैं अनुरोध करता हूं कि मुझ पर किसी भी तरह के अनर्गल आरोप ना लगाए जाएं।
– तेजबहादुर सिंह चौहान
विधायक
कलेक्टर ने कहा- तीन पक्षों को नोटिस भेजेंगे उज्जैन कलेक्टर नीरज सिंह ने कहा- हमने मामले में क्षेत्रीय एसडीएम से जांच कराई है। इसमें हम तीनों पक्षों को नोटिस भेज रहे हैं। इनमें पूर्व संचालक, वर्तमान संचालक और वेटरिनरी डिपार्टमेंट शामिल है। पूर्व संचालक के रिकॉर्ड्स में भी कुछ अनियमितताएं निकल रही हैं, उसकी जांच भी कराएंगे।
वर्तमान संचालक से भी स्पष्टीकरण और तथ्य मांगे गए हैं। एसडीएम से रिपोर्ट मांगी गई है कि वहां वेटरिनरी डिपार्टमेंट के कौन अधिकारी जिम्मेदार हैं, क्योंकि उन्होंने अगस्त के महीने में गोशाला का आखिरी वेरिफिकेशन किया था। उसके बाद 4 महीने तक उन्होंने क्या किया? मामले की जांच चल रही है।