कोरोना के साए में दीपावली: पटाखों के धुएं से ऐसे मरीजों के लिए हो सकता है खतरा

चीन से दुनियाभर में फैली कोरोना महामारी से 210 से ज्यादा देश प्रभावित हैं। इस महामारी को आए 10 महीने से ज्यादा समय हो गए। देश में एक लंबे समय तक इसके कारण लॉकडाउन लगा रहा और अब धीरे-धीरे तमाम गतिविधियां शुरू हो रही हैं। कोरोना काल में कई सारे त्यौहार बीत गए। दशहरे के बाद अब दीपावली भी कोरोना के साये में बीतेगा। इस बार कोरोना वायरस के चलते विशेषज्ञों की अपील है कि लोगों को इस बार पटाखों से खासतौर पर बचना चाहिए। उनका कहना है कि सर्दी और प्रदूषण की दोहरी मार बीमारी बढ़ाने का कारण बन सकती है। खासकर कोविड के संक्रमित मरीज और इससे उबरे मरीजों पर भी इसका बुरा असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञ इस बारे में सावधान करते आ रहे हैं कि इस बार सर्दी और प्रदूषण के प्रकोप से कोरोना और खतरनाक रूप ले सकता है, इसलिए दीपावली में पटाखों से दूरी बनाने की सलाह दी जा रही है। डॉ. पीबी मिश्रा के मुताबिक, पटाखे फोड़ने पर इसके स्मॉल पार्टिकल्स हवा में घुलते हैं, जिन्हें हम एयरोसॉल (Aerosol) कहते हैं, इसके जरिए कोविड का वायरस फैल सकता है।

डॉ. मिश्रा के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर और अन्य मेट्रो शहरों में अभी से ही हवा खराब होने लगी है। सर्दियों में वायु प्रदूषण बढ़ता है और ऐसी स्थिति में वायरल संक्रमण बढ़ने लगते हैं। दीपावली में पटाखे जलने से प्रदूषण और ज्यादा बढ़ेगा और इस वजह से अस्थमा, दमे के मरीजों और कोविड के मरीजों को सांस लेने में ज्यादा तकलीफ हो सकती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, वायु प्रदूषण बढ़ने पर धूलकण कम ऊंचाई पर ही जमा हो जाते हैं, जिससे वायरस के हवा में ज्यादा देर तक ठहरने का खतरा है। ऐसी स्थिति में ज्यादा लोग संक्रमण की चपेट में आ सकते हैं। पहले से कोविड-19 की चपेट में आ चुके लोगों के लिए यह स्थिति दोहरी मार वाली होगी। खासकर उन लोगों के लिए जिनके फेफड़ों पर वायरस ने गंभीर प्रभाव डाला है।

डॉ. मिश्रा कहते हैं कि जो मरीज कोविड से संक्रमित हैं, उनमें से ज्यादातर के फेफड़ों पर प्रभाव पड़ा है। बहुत सारे मरीजों के कोरोना से ठीक हो जाने के बाद भी फेफड़ों पर ये असर रहता है, जिसे पल्मनेरी फायब्रोसिस कहा जाता है। इसे ठीक होने में समय लगता है। उनका कहना है कि कोविड संक्रमित मरीज या फिर कोविड से उबरे मरीज, दोनों पर वायु प्रदूषण का बुरा प्रभाव पड़ेगा। उनकी सलाह है कि इस साल पटाखों से दूरी बनाए रखना ही श्रेयस्कर रहेगा।

 

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