
शनि की साढ़ेसाती शुभ या अशुभ
ज्योतिष: निलेश गोधा
शनि देव इस ग्रह का नाम सुनते ही जनमानस नतमस्तक हो जाता है भय से सिहर जाता है परंतु भयभीत नहीं होना चाहिए यह तो अपने कर्मों का फल देते हैं अगर आपने पिछले जन्मों में अच्छा कर्म किया है तो शनि के फल अच्छे मिलते हैं और अगर आप पिछले जन्मों में बुरे कर्म कर कर आए हो तो वैसा फल प्राप्त होता है शनि कर्मों का फल देकर व्यक्ति के व्यक्तित्व को और उसकी आत्मा को स्वच्छ बना देते हैं पाप रहित कर देते हैं आइए हम शनि की साढ़ेसाती के बारे में जानकारी से अवगत होते हैं क्यों कैसे अच्छा फल देती और कैसे खराब फल देती है शनि की साढ़ेसाती आए तो घबराइए मत यह दोनों प्रकार के फल देती है अच्छा और बुरा और किसी किसी को इसका मध्यम फल भी मिलता है आइए सबसे पहले हम शनि की साढ़ेसाती में अच्छे फलों के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं
सबसे पहले हम देखेंगे कि चंद्रदेव कौन से अच्छे घरों में बैठे हुए हैं दूसरे घर में बैठे हुए हैं वृषभ राशि में बैठे हुए हैं चौथे घर में बैठे हुए हो या फिर नवे घर में बैठे हैं केतु देव पहले के 6 घरों में बैठे हो और राहु देव बात के साथ घरों में बैठे हो शनि देव अपनी उच्च राशि में बैठे हूं अर्थात तुला में बैठे हुए हो पराक्रम भाव अर्थात तीसरे घर में बैठे हो नौवें या दसवें घर में बैठे हो ऐसी अवस्था में शनि देव को शुभ माना जाता है जब शनी शुभ हो तो ऐसी अवस्था में उनके दान सोच समझ कर करना चाहिए ऐसी अवस्था में शनि के दान करी हुई वस्तुएं शनि ग्रह को हमारी पत्रिका में कमजोर करती है शनी की अच्छी अवस्था में पराई स्त्री से दूर रहना चाहिए शराब और मांस का सेवन कदापि नहीं करना चाहिए शनिदेव द की अच्छी अवस्था होने पर इनकी साढ़ेसाती सुख भी प्रदान करती है नौकर चाकर की दिक्कत नहीं रहती व्यापार-व्यवसाय अच्छा चलता है घर में शुभ कार्य होते हैं धन में बढ़ोतरी होती है व्यापार-व्यवसाय अच्छा चलता है घर में सभी प्रकार की सुख संपत्ति होती है शरीर में जोड़ों का दर्द नहीं रहता घर की नालियां जाम नहीं होती सभी प्रकार के सुख संपत्ति व्यवसाय की प्राप्ति होती है बस शर्त है शराब और मांस से दूर रहना पड़ता है पराई स्त्रियों से संपर्क नहीं बनावे अपने शुक्र अर्थात् पत्नी का सम्मान करें तो सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है अच्छे ज्ञान की प्राप्ति होगी नौकरों चाकर का सुख प्राप्त होगा धन की प्राप्ति होगी
ऐसा इंसान दूसरों का भला करने वाला दूसरों के लिए सोचने वाला सबका भला करने वाला होगा
अब हम बात करते हैं शनि की साढ़ेसाती में बुरा फल देने वाले विषय पर अब जब चंद्रदेव शत्रु राशि में बैठे में हो नीच अवस्था में हूं पापी ग्रहों के साथ उनकी युति हो राहु देव कुंडली के पहले के छह घरों में हो और 6 घर से बारहवें घर में केतु हो शनि देव शत्रु राशि में बैठे हो खराब भाव में हो सूर्य के साथ हो ऐसी अवस्था में शनि की साढ़ेसाती व्यक्ति के लिए कष्टदायक होती है
सबसे पहले व्यक्तियों के कामकाज पर इसका असर आएगा घर में अनायास हि खर्चे बढ़ जाएंगे आदमी के अंदर अहंकार की भावना आने लगेगी उसकी सोच में यह परिवर्तन आने लग जाएगा कि सब कुछ मैं ही करता हूं सब मेरा बसाया हुआ है नुकसान पर नुकसान होते चले जाएंगे चाहे कितना ही बड़ा काम चल रहा हो कितने ही नौकर चाकर हो कई फैक्ट्रियां हूं कहीं मकान हो परंतु ऐसी अवस्था में अगर अरेंकार की भावना आ जाए तो व्यक्ति को काम का धीरे-धीरे कम होने लगता है ऐसी अवस्था में अगर पिताजी जीवित हो तो शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव उन पर भी पड़ता है और वह मृत्यु तुल्य कष्ट और बीमारियां पाते हैं जो नौकर चाकर काम करते हैं वह फैक्ट्रियां और कार्यालय छोड़कर जाने लगेंगे जो उसके फायदे में सोचता था वह उसके नुकसान के बारे में सोचेगा धीरे-धीरे व्यापार में घाटा होने लगेगा धीरे-धीरे कस्टमर टूटने लगेंगे जो पहले बहुत अच्छा आर्डर देते थे वह सब गायब होने लगेंगे जो उसके हित के बारे में सोचते थे वही अहित करेंगे धीरे-धीरे व्यवसाय खत्म होने लगेगा व्यापार-व्यवसाय के साथ-साथ घर में भी कलह बढ़ने लगेगी नए कामों में हाथ डाल लेंगे तो नुकसान होगा हर तरफ घोर निराशा वातावरण रहेगा व्यक्ति छोटे-छोटे कामों को करने के लिए मजबूर हो जाता है अपने पद से नीचे गिर जाता है ऐसे साढ़ेसाती व्यक्ति का अहंकार चकनाचूर कर देती है और उसे सामान्य व्यक्ति में तब्दील कर देती हैं जो व्यक्ति पहले दूसरों को ऑर्डर देता था दूसरों से काम करवाता था अब आप खुद ही छोटे-छोटे काम करने के लिए मजबूर हो जाता है
यह शनिदेव का सजा देने का सबसे भयंकर प्रारूप होता है इस साढ़ेसाती से राजा विक्रमादित्य भी बच नहीं पाए थे अहंकार की बदौलत उन्हें भी सजा प्राप्त हुई थी शनि की साढ़ेसाती लगी हुई हो तो व्यक्ति को अहंकारी नहीं होना चाहिए विनम्रता से काम करना चाहिए शनि की साढ़ेसाती में व्यक्तियों के जोड़ों में दर्द रहता है घर में नौकर चाकर नहीं रहते अगर रहते भी हैं तो उनको तनख्वा देने के पैसे नहीं होते घर की नालियां बार-बार जाम होती है नौकर चाकर सर चढ़कर बोलते हैं मकान में सिलन बढ़ने लग जाती है घर में लड़ाई झगड़े बड़े ही जाते हैं घर परिवार में एक दूसरे से बनती नहीं है प्रॉपर्टी ओं में पैसा फस जाता है प्रॉपर्टी ओं में फायदा नहीं होता कई बार तो प्रॉपर्टी या घाटे में बेचना पड़ जाती है कर्ज चुकाते नहीं बनता प्रॉपर्टी ओ पर लिया गया लोन चुकता नहीं ब्याज पर ब्याज बढ़ता चला जाता है असल में खराब शनि देव संपत्ति प्रॉपर्टी सभी में सभी प्रकार का नुकसान पहुंचाते हैं व्यक्ति के अहंकार को खत्म कर उसे नम्र बनाते हैं कभी-कभी शनिदेव मिश्रित फल भी देते हैं साढ़ेसाती में मिश्रित फल भी प्राप्त होता है कभी सभी प्रकार का फायदा नजर होते आता है कभी-कभी बहुत नुकसान नजर होते आता है आश्चर्यजनक परिणाम भी सामने आते हैं इस प्रकार से शनिदेव अपना फल देते हैं
साढ़ेसाती में करें यह उपाय साढ़ेसाती के समय काला सुरमा जमीन में गाड़ देंगे
43 दिन लगातार एक मट्ठी साबुत बदाम एक मुट्ठी काली उड़द सरसों का तेल लगाकर किसी मजदूर को दान कर दें
काले नीले कपड़ों से परहेज रखें
घर में रखा हुआ सारा कबाड़ निकाल देवें
अहंकार का भाव ना रखें
इन उपाय से शनि की साढ़ेसाती के कष्टों को कम किया जा सकता है
ॐ तत्सत