एक एप, कुछ मोटे रिटर्न के वादे और भरोसा बेचता एक मुर्गा विक्रेता- ठगी की ये कहानी किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं। शुरुआत हुई खंडवा की एक गली से, जहां गुमठी में मुर्गे की दुकान चलाने वाला शादाब रातों रात एरिया मैनेजर बन गया। उसके मोबाइल में एक एप था- ‘रॉयल मोसे मिल्क टी’। स्कीम ऐसी कि 2800 इन्वेस्ट करो और हर दिन 72 रुपए पाओ। शुरुआत में पैसे लौटे भी, फिर जैसे ही लोगों ने मोटा निवेश किया, एप बंद, आईडी ब्लॉक और पैसा गायब।
इस मामले की पड़ताल की और समझा कि कैसे इस एप्लिकेशन के जरिए न सिर्फ खंडवा बल्कि गुजरात, कर्नाटक, ओडिशा और कोलकाता तक हजारों लोगों से करोड़ों की ठगी हुई। महिलाओं ने समूह से लोन तक लेकर पैसा लगाया और जब सच्चाई सामने आई तो सबके होश उड़ गए।
इस नेटवर्क के बारे में तब पता चला जब पीड़ितों में से एक युवक ने परेशान होकर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने कंपनी के दो स्थानीय मैनेजर और एक एजेंट को गिरफ्तार किया है, जबकि मास्टरमाइंड फरार है। पुलिस की तीन टीमें इस नेटवर्क की जांच करने में जुटी हैं। पढ़िए रिपोर्ट…

ऐसे शुरू हुआ लालच का खेल
नागचून रोड स्थित टॉवर गली में फुटपाथ पर गुमठी लगाकर चिकन बेचने वाले शादाब कुरैशी पिता तौकिर कुरैशी को एक दिन किसी ने ‘रॉयल मोसे मिल्क टी’ एप के जरिए पैसे कमाने का तरीका बताया। शुरुआत में उसने खुद निवेश किया और उसे रोजाना कमीशन मिलना शुरू हुआ। जल्द ही उसने समझ लिया कि असली कमाई नए लोगों को जोड़ने में है। पहले पांच नए ग्राहक बनाने के लिए उसने जान-पहचान वालों से संपर्क किया, लेकिन कई लोगों ने इनकार कर दिया।
इसके बाद उसने टायर और फल व्यवसायियों को टारगेट करना शुरू किया। धीरे-धीरे शादाब ने डेढ़ से दो साल के भीतर करीब 2 हजार लोगों को इस एप से जोड़ दिया। इसके एवज में कंपनी ने उसे एरिया मैनेजर बना दिया। इसके बाद शादाब ने फिरोज सिहाड़ावाले और आसिफ उर्फ मोनू मंसूरी पिता बशीर मंसूरी को भी साथ लिया और युवाओं को घर बैठे लखपति बनने का सपना दिखाकर एप में निवेश करवाया। ऐसे ही करते-करते फर्जीवाड़े का जाल दूसरे राज्यों में तक भी पहुंचा।
पहले छोटे-छोटे रिटर्न देकर भरोसे में लिया शुरुआत में एप्लिकेशन के जरिए निवेशकों को छोटे-छोटे रिटर्न देकर भरोसे में लिया गया और फिर धीरे-धीरे उन्हें मोटी रकम के लालच में उलझा दिया गया। एप में सबसे छोटा प्लान 2800 रुपए का था, जिसे कंपनी के बारकोड स्कैन कर ऑनलाइन जमा करना होता। इसके बदले हर दिन 72 रुपए देने का वादा किया गया और शुरुआत में भुगतान भी हुआ।
इसी तरह 5000 रुपए वाले प्लान में तीन दिन तक रोजाना 7500 रुपए सीधे अकाउंट में भेजे गए। कम निवेश में बड़े रिटर्न की चाहत रखने वाले लोगों ने 44,000 रुपए तक का निवेश करना शुरू किया। इस प्लान के तहत दो दिनों तक लगातार 1 लाख 44 हजार रुपए उनके खातों में ट्रांसफर किए गए। यहीं से लालच का असली खेल शुरू हुआ।
लोगों को यकीन हो गया कि पैसा तेजी से दोगुना-तिगुना हो सकता है। इसके बाद किसी ने 2 लाख, किसी ने 5 लाख, तो कुछ ने 8 लाख रुपए तक का सबसे बड़ा प्लान ले लिया। शुरुआती दो-तीन दिन तक इन प्लान्स पर भी पैसे आते रहे, लेकिन फिर अचानक आईडी ब्लॉक हो गई।

शादाब कहता- ‘नुकसान हुआ तो मैं जिम्मेदार’ शादाब लोगों को भरोसे में लेने के लिए कहता था “अगर आपको नुकसान होता है, तो मैं जिम्मेदार हूं… आप मेरा ब्लैंक चेक रख लो।” उसकी बातों में आकर लोग जुड़ते गए और जल्द ही उसके साथ 2000 से अधिक लोग जुड़ गए।
जितने भी नए ग्राहक बनते, उनका कमीशन सीधे शादाब के खाते में जाता। शादाब के करीबी लोगों का कहना है कि इस खेल के जरिए वह करोड़ों रुपए कमा चुका है। पहले बाइक से चलने वाला शादाब अब कार में घूमने लगा।
शादाब की लाइफस्टाइल देखकर लोग फंसे शादाब की बदलती लाइफस्टाइल और तेजी से आ रहे पैसों को देखकर भी लोग प्रभावित हुए और उन्होंने भी एप से जुड़ना शुरू कर दिया। नियम था- एक खिलाड़ी पांच लोगों को जोड़े। इस तरह चेन बनती गई। युवाओं के साथ-साथ बुजुर्ग और महिलाएं भी इसमें शामिल हो गईं।
कई महिलाओं ने बीसी और समूह लोन लेकर इस गेम में पैसा लगाया। शादाब का साथी आसिफ उर्फ मोनू मंसूरी, निवासी खानशाहवली ने भी इस स्कीम को फैलाने में अहम भूमिका निभाई और सैकड़ों नए ग्राहकों को जोड़ा।
कमीशन इतना मिला कि खुद एरिया मैनेजर बना
पुलिस के मुताबिक, विदेशी कंपनी के जरिए आरोपियों के खातों में रोजाना ढाई से तीन लाख रुपए जमा होते थे। दोनों की 7 स्टार रेंक थी। इसके अलावा करीब 10 हजार रुपए कमीशन भी जमा होता था। इसीलिए आरोपी शादाब ने खुद को एरिया मैनेजर घोषित कर लिया था। उसने 10 हजार रुपए महीने पर आफिस खोला और लोगों को लालच देकर जोड़ता गया।

एक आईडी से जुड़ते थे 25-30 लोग रॉयल मोसे मिल्क टी’ एप्लिकेशन के जरिए ठगी का जाल कुछ इस तरह बुना गया कि एक आईडी से 25 से 30 लोगों को जोड़ा गया। इनसे होने वाली कमाई पर आईडी धारक को 5 से 10 प्रतिशत तक का कमीशन मिलता था। इस मॉडल ने कुछ युवकों को देखते ही देखते लखपति बना दिया।
पुलिस जांच में सामने आया है कि शादाब कुरैशी, फिरोज सिहाड़ावाले, आसिफ उर्फ मोनू मंसूरी, मौलाना तनवीर हशमती और गोलू मालाकार जैसे कई युवकों ने अलग-अलग नामों से कई फर्जी आईडी बनाईं। इसी वजह से इनकी कमाई बाकी लोगों की तुलना में कई गुना ज्यादा रही।
जिन युवकों ने ये आईडी चलाईं, उनका एक साल पहले तक का आर्थिक रिकॉर्ड देखा जाए तो वे बेहद सामान्य या कमजोर स्थिति में थे। लेकिन इस एप्लिकेशन से जुड़ने के बाद उनके खातों में लाखों रुपए का ट्रांजेक्शन हुआ है। फिलहाल पुलिस इन बैंक खातों और ट्रांजेक्शन की गहराई से जांच कर रही है।
शादाब कुरैशी के खिलाफ 12 लोगों ने की शिकायत साइबर ठगी में जेल भेजे गए आरोपी शादाब कुरैशी के खिलाफ 12 लोगों ने कोतवाली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। भंडारिया रोड क्षेत्र के इन लोगों ने लिखित आवेदन देकर आरोप लगाया कि शादाब ने उन्हें एप्लिकेशन में पैसा लगाने के लिए प्रेरित किया था।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि हम पिछले एक सप्ताह से शादाब को ढूंढ रहे थे। सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। शिकायत करने वालों में विनोद पिता सुरेश जाधव, विजय पिता दगड़ू सहित अन्य लोग शामिल थे, जो कोतवाली थाने पहुंचे और मामले की शिकायत दर्ज कराई।

शादाब और फिरोज गोलू मालाकार के बहकावे में आए गिरफ्तार होने वाले आरोपियों शादाब कुरैशी और फिरोज सिहाड़ावाले ने जिला न्यायालय परिसर स्थित सीजेएम कोर्ट के बाहर उनके वकील प्रणय गुप्ता, मोहन गंगराड़े और विनम्र गंगराड़े ने आवेदन तैयार करने से पहले मामले की प्रारंभिक जानकारी ली। इस दौरान शादाब और फिरोज ने बताया, हमने पुलिस को पहले ही सब कुछ बता दिया है। खंडवा और आसपास के इलाकों में इस पूरे फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड गोलू मालाकार है, जो सिवना का रहने वाला है।
आरोपियों ने दावा किया कि गोलू के कहने पर ही उन्होंने अपने मोबाइल में ‘रॉयल मोसे मिल्क टी’ एप डाउनलोड किया और लोगों को जोड़ना शुरू किया। लोग खुद ही लालच में आकर जुड़ते गए, हमने किसी को कोई झूठा वादा नहीं किया। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने पुलिस को गोलू के साथ ही तनवीर हशमती का नाम भी दिया है और अब इस पूरे मामले की आगे की जांच इन्हीं दोनों से की जानी चाहिए।
पीड़ित बोला- ब्रेनवॉश किया इसीलिए पांच लाख डूब गए खरगोन जिले के महेश्वर मंडलेश्वर निवासी सलमान खान ने बताया कि उसका ससुराल खंडवा के खरकली गांव में है। वहीं एक युवक के माध्यम से उसकी मुलाकात शादाब से हुई। शादाब ने मेरे साथ एक मीटिंग की और स्कीम्स के बारे में ऐसे ब्रेनवॉश किया कि मैं उसकी बातों में आ गया।
सलमान ने बताया, मैंने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर लगभग पांच लाख रुपए इस एप में निवेश कर दिए। मंडलेश्वर में ही करीब 100 लोग शादाब से जुड़े थे और सभी ने छोटी-बड़ी रकम निवेश की थी। महेश्वर और मंडलेश्वर के अन्य युवकों ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर बताया कि उनके भी लाखों रुपए फंसे हैं। वे भी जल्द ही एफआईआर दर्ज कराने खंडवा आएंगे।

समूह से कर्ज लेने वाली महिलाओं से लाखों ठगे ठगी के गिरोह ने सिर्फ युवाओं को ही नहीं, बल्कि गली-मोहल्लों में चल रहे महिला समूह लोन को भी निशाना बनाया। शादाब और उसके साथियों ने गरीब महिलाओं की मजबूरी और भरोसे को भुनाते हुए उन्हें भी ठगी का शिकार बना डाला।
दरअसल, शहर और आसपास के इलाकों में महिलाएं स्वयं सहायता समूह बनाकर लोन लेती हैं। इन समूहों की एक महिला लीडर होती है, जो सभी सदस्यों से समय पर किस्त जमा करवाती है। शादाब ने इन्हीं लीडर्स से संपर्क किया और उन्हें अच्छे रिटर्न का झांसा देकर स्कीम में शामिल किया।
महिला लीडर्स को भरोसे में लेने के बाद उन्होंने अन्य सदस्यों को भी निवेश के लिए उकसाया। लीडर्स ने समूह की महिलाओं को बताया कि यदि उनके पास पैसे नहीं हैं, तो वे लोन लेकर इस स्कीम में पैसा लगाएं। 4800 रुपए ऑनलाइन जमा करने पर हर रोज 120 रुपए मिलते हैं। वहीं, 5000 रुपए जमा करने पर तीन दिन में 7500 रुपए तक मिलने का लालच दिया।
महिलाओं को खंडवा स्थित ऑफिस भी बुलाया, जहां खुद शादाब और उसके साथी मौजूद थे। उन्होंने महिलाओं के मोबाइल में एप इंस्टॉल कर उनकी आईडी बनाई और निवेश की प्रक्रिया पूरी करवाई। शुरुआत में कुछ रकम लौटाई भी, ताकि भरोसा बने। महिलाएं भी ज्यादा मुनाफा होने का सोचकर इनकी बातों में आ गईं और अपनी जमा पूंजी एप में निवेश कर दी। इस तरह महिलाएं धीरे-धीरे अपनी पूंजी गंवाती रहीं और जब तक सच्चाई सामने आती, वे ठगी का शिकार बन चुकी थीं।

सीएसपी अभिनव बारंगे बोले- जांच कर रहे सीएसपी अभिनव बारंगे के अनुसार, लोगों की जमा पूंजी को आरोपियों ने कहां खर्च किया, किन कामों में लगाया, इन बिंदुओं पर जांच हो रही है। पुलिस की तीन टीमें जांच कर रही है। एक साइबर व दो कोतवाली पुलिस की टीम जांच के दौरान आरोपियों के बैंक खातों की डिटेल सहित अन्य जानकारी एकत्र करने में लगी है। जांच के दौरान बड़ा खुलासा हो सकता है।
कई राज्यों से जुड़े आरोपी, तीन टीमें जांच कर रहीं खंडवा एसपी मनोज कुमार राय ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन जांच टीमों का गठन किया गया है। इनमें एक साइबर सेल और दो टीमें कोतवाली पुलिस की हैं। टीमें आरोपियों के बैंक खातों, लेन-देन और संपर्कों की बारीकी से जांच कर रही हैं।
अब तक की जांच में यह सामने आया है कि आरोपियों का नेटवर्क निमाड़-मालवा के साथ-साथ महाराष्ट्र, कर्नाटक, ओडिशा और कोलकाता तक फैला है। यह ठगी का बड़ा नेटवर्क हो सकता है, तह तक जाने के लिए इंटरस्टेट कनेक्शन को भी खंगाला जा रहा है।