कुसुम-ए योजना में खुद को ठगा महसूस कर रहे एआईएफ वंचित किसान… ध्यान दो मोहन और शिवराज…कौशल किशोर चतुर्वेदी

कुसुम-ए योजना में खुद को ठगा महसूस कर रहे एआईएफ वंचित किसान… ध्यान दो मोहन और शिवराज...

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिये प्रदेश में अभूतपूर्व कार्य किया जा रहा है। यह दावा है नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला का। और इस दिशा में कुसुम “सी” योजना से अधिक से अधिक जोड़ने और उन्हें लाभान्वित करने के लिये “सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना समिट” 10 जून को कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेन्टर में आयोजित होने जा रही है।

पर इस तथ्य से शायद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अवगत नहीं हैं कि जिस कुसुम-ए योजना को नया रूप देकर “सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना” डिजाइन की गई है, उस कुसुम-ए योजना के तहत प्रदेश में शुरुआती दौर में सौर ऊर्जा प्लांट लगाने वाले किसान खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम)-ए योजना में अगस्त 2024 के पहले सौर ऊर्जा प्लांट लगाने वाले किसानों को एआईएफ का लाभ नहीं मिल रहा है। जबकि वास्तव में कुसुम-ए योजना की नींव के पत्थर बनकर शुरुआती योजनाधारकों ने ही मध्यप्रदेश सरकार को सौर ऊर्जा के क्षेत्र में गौरवान्वित होने का अवसर दिया है। और इन किसानों के साथ सरकार ने 3.07 रुपए प्रति यूनिट बिजली क्रय करने का अनुबंध किया है। इन्हीं किसानों ने एआईएफ का लाभ लेने की लंबी लड़ाई लड़ी है। विसंगति देखिए कि जिन नए कुसुम-ए हितग्राहियों को एआईएफ का लाभ मिल रहा है, उन किसानों के साथ सरकार ने 3.25 रुपए प्रति यूनिट बिजली क्रय करने का अनुबंध किया है। उन्हें ही सरकार द्वारा एआईएफ के तहत 7 वर्षों तक 3 प्रतिशत ब्याज में छूट मिलेगी। ऐसे में यही संदेश जा रहा है कि कुसुम -ए योजना से सरकार द्वारा तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के समय जुड़ने वाले किसानों को कम बिजली दर के साथ ही एआईएफ के लाभ से वंचित किया जा रहा है। ऐसे में वह किसान कम बिजली दर के साथ एआईएफ से भी वंचित होकर दोहरा घाटा उठाने को मजबूर हैं। और इन किसानों का भला करने का अधिकार भी वर्तमान में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के हाथ में है। किसान हितैषी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान कुसुम-ए योजना से जुड़े मध्यप्रदेश के करीब 60-65 मेगावाट सौर ऊर्जा प्लांट धारक किसानों को एआईएफ योजना का लाभ दिलाकर वास्तव में न्याय कर सकते हैं। नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला को कुसुम-ए की जगह लाई जा रही सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना के साथ ही अंधेरे में डूब रहे सभी लाभों से वंचित कुसुम-ए हितग्राहियों को एआईएफ का लाभ दिलाने की तरफ ध्यान देना चाहिए। एआईएफ का लाभ देने वाले बैंक के जिम्मेदार अफसरों का कहना है कि केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अनुमोदन का पत्र मिलने पर ही वह अगस्त 2024 से पहले के हितग्राहियों को एआईएफ से लाभान्वित करने का काम कर सकेंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अगर संज्ञान लेते हैं तो केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान कुसुम-ए योजना के एआईएफ वंचित किसानों का भला कर सच्चे किसान हितैषी साबित हो सकते हैं। तब अगस्त 2024 से पहले पीएम कुसुम-ए योजना में सोलर प्लांट लगाने वाले प्रदेश के किसान खुद को ठगा हुआ महसूस नहीं करेंगे… अपेक्षा है कि मोहन और शिवराज का ध्यान कुसुम-ए योजना के एआईएफ से वंचित इन किसानों की समस्याओं पर जरूर जाएगा…। तभी यह दावा किया जा सकेगा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिये प्रदेश में अभूतपूर्व कार्य किया जा रहा है।

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।

वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।

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