दीपावली के शुभ मुहूर्त

Five ( 5 ) Days For Dipawali *दीपावली के शुभ मुहूर्तो बारे में निम्न जानकारी जो की गणित के हिसाब से दी गई है और पंचांग में जो वर्णित है उसके हिसाब से आपको प्रतिदिन का पूजन धन पूजन कुबेर पूजन काली पूजन भैरव या हनुमान पूजन महालक्ष्मी पूजन और वही खाता पूजन दुकान खोलने का शुभ मुहूर्त एवं गोवर्धन पूजन भाई दूज का पर्व तथा लाभ पंचमी के पर्व आज के बारे में निम्न जानकारी दी जा रही है हमारे सभी पाठक मित्र इसे समझे और इसी समय में पूजन करें
प्रथम दिन गोवत्स द्वादशी
12 11 2020 गुरुवार को रात 21:00 बज कर 30 मिनट तक रहेगी अतः तेरस का पूजन दूसरे दिन करना होगा
दूसरे दिन का पूजन 1311 2020 को 18:00 बजे तक तेरस तिथि है अतः धनतेरस का पूजन शुक्रवार को ही करना है समय नीचे अनुसार है
सुबह 6:55 से 11 बजे तक साला लाभ अमृत चौघड़िया है
दोपहर 12:24 से 1:47 तक शुभ है
शाम को 4:32 से 5:57 मिनट तक चल और रात्रि में 9:10 से 10:00 बज का 45 मिनट तक लाभ प्रद पूजन रहेगा
इस दिन आप अपने घर के धन को धोना उनकी पूजा करना माता लक्ष्मी का पूजन करना कोई दिव्य मूर्ति या कोई कीमती चीज वर्तन वगैरे खरीद सकते हैं और उनका भी पूजन करना चाहिए माता का पूजन श्री सूक्त के मंत्रों से या पौराणिक मंत्रों के द्वारा कर सकते हैं धूप दीप नैवेद्य वगैरा अर्पण करना होता है दक्षिणा वगैरा भी अगर ब्राम्हण से कराते हैं तो उसे भी देना चाहिए
शुक्रवार को 9 से तारीख 1311 2020 को शाम 6:00 बजे के बाद चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ होता है इस समय रूप चतुर्दशी का भी प्रारंभ माना जाएगा जो लोग शमशान साधना तंत्र साधना यंत्र मंत्र वगैरह का अनुष्ठान या साबरी मंत्रों को जगाने का काम करते हैं उन लोगों के लिए शुक्रवार को ही नरक चतुर्दशी का पूजन करना होगा व्यापारी लोग यंत्रों का पूजन साथ में अपने कारखानों में मशीन एरियों का पूजन करते हैं जिन का समय रात 9:00 बजे से 10:46 तक और रात 11:30 से 2:00 बजे तक रहेगा भैरव पूजन भी आप रात्रि में कर सकते हैं ककड़ 8 वगैरह फेंकने का भी काम आज ही होगा दूसरे दिन सुबह से ही हनुमान जयंती कहां पर हो दोपहर में मनाया जाएगा क्योंकि चतुर्दशी तिथि दिनांक 14 112020 को दोपहर 2:18 तक है इसके बाद अमावस्या तिथि का प्रारंभ हो जाएगा और दीपावली का भी प्रारंभ होगा ही माना जाएगा
तारीख 14 11 2020 शनिवार को 2:00 बज के 18 मिनट के बाद अमावस्या तिथि का प्रारंभ होने के कारण दीपावली का रात्रि पूजन बही खातों का पूजन हमें शनिवार को ही करना है शारदा पूजन वगैरह कार्य भी उसी समय संपन्न करना है मुहूर्त के रूप में समय निम्न है
2:14 से 5:00 बज कर 57 मिनट तक तक शुभ लाभ चौघड़िया है शाम को 5:57 से है 7:33 तक का मुहूर्त ठीक है इसके बाद 8:54 से 1:41 तक उत्तम मुहूर्त है जिसमें फिर लग्न सिंह लग्न भी आ जाता है यहां आप अपने बही खातों का महालक्ष्मी का शारदा का पूजन कर सकते हैं उसमें भी विधान गणेश पूजन नवग्रह पूजन के साथ लक्ष्मी महालक्ष्मी का पूजन कुबेर का पूजन अपनी तिजोरी अपने जो वजन काटा तथा दाबाद यानी पैन का पूजन किया जाता है कंप्यूटर के युग में आप कंप्यूटर के पीसी का पूजन और कीबोर्ड का पूजन कर सकते हैं
दिनांक 15 11 2020 रविवार के दिन सुबह 10:37 तक अमावस्या तिथि है अतः इसके पहले भी आप पूजन कर सकते हैं अगर बाकी रह गया हो तो यहां प्रतिपदा शुरू हो जाएगी अतः गोवर्धन पूजन यानी भगवान कृष्ण का पूजन और गोवर्धन भगवान का पूजन दोपहर होने की वजह से आज ही किया जाएगा जिसका समय दोपहर 1223 से 1:45 तक रहेगा जिसमें अन्नकूट पूजन और भगवान कृष्ण का पूजन किया जाएगा
विक्रम संवत 2077 कार्तिक सुदी शुक्ला पक्ष की प्रतिपदा सोमवार को 16 11 2000 को मनाई जाएगी सुबह के सुबह 5:38 से 7:07 तक उत्तम समय है बाद में दुकान वगैरह खोलने का मुहूर्त नहीं है क्योंकि क्योंकि तिथि अधूरी रहती है इसी दिन भाई दूज का पर्व मनाया जाएगा दोपहर भाई अपने बहन के घर भेंट उपहार लेकर भोजन करने जाता है जैसा यमराज ने यमुना के यहां जाकर इस परंपरा को शुरू किया है उसी तरह आप भी इस सनातन परंपरा को अविरत रखिए
तारीख 19 से 11 2020 को लाभ पंचमी अथवा ज्ञान पंचमी का पर्व मनाया जाएगा जिसमें आप अपने व्यापार स्थान को खोल सकते हैं समय सुबह 658 से 8:20 तक और 11:04 से 13:48 तक उत्तम रहेगा अगर आप अपना व्यापार पंचमी को नहीं खोल सके तो कार्तिक सप्तमी को जानिए कईसे 11 2020 को खोल सकते हैं समय सुबह 8:13 से 9:36 और 1223 से 4:38 तक उत्तम रहेगा दिन शनिवार है उपरोक्त समय के अनुसार आप अपने व्यापार को बढ़ा सकते हैं दोस्तों शुभ मुहूर्त में किया हुआ कार्य अनेक गुना ज्यादा फल देता है अतः हमें निश्चित रूप से मुहूर्त में ही अपने किसी भी कार्य का प्रारंभ करना चाहिए संवत 2077 आपके लिए शुभ प्रदान करने वाली रहे आप को प्रगति दे घर में सुख शांति और समृद्धि दे तथा आने वाले सभी आपत्तियों से बचाएं यही हमारे भगवान विष्णु से संवत्सर के देवता से विनम्र निवेदन है। ( कृपया आगे दी जा रही जानकरी को ठीक से समझने का प्रयास करे ।दिपावली का पर्व 5 दिनों का मनाया जाता है इस वर्ष सभी पर्व में दो दो पर्व जुड़ गए हैं जैसे 12 स्थिति को हे धनतेरस का प्रारंभ हो जाता है वैसे ही तेरस तिथि में चौदस तिथि का प्रारंभ हो जाता है और 14 स्थिति में ही अमावस्या तिथि का प्रारंभ होता है अमावस्या में ही प्रतिपदा का और प्रतिपदा में ही दतिया का प्रारंभ होता है मित्रों सबसे बड़ी चीज है यह हमारी ज्योतिषीय गणना नक्षत्र और तिथि की चाल पर आधारित होती हैं सूर्य और पृथ्वी का जो परिभ्रमण कक्षा है उसी में 23 पॉइंट 5 डिग्री का जो झुकाव है उसी की वजह से तिथियां कम अधिक होती रहती हैं उनका रेगुलर टाइम बदलता रहता है शायद अंग्रेजी महीनों में इस चीज को ध्यान में नहीं दिया जाता इसीलिए कुछ लोग यह कहते हैं कि हमारे धर्म में और ज्योतिष में तिथियों का कोई ठिकाना नहीं है मगर यह सदन तक गलत बात है वास्तविक ठिकाना हमारी ज्योतिष में है वही परफेक्ट गणित है वही प्रभु परफेक्ट समय है अब सवाल है तो तिथियों में अगर इस तरह से मिलन होता है तो हमें पर्व कैसे मनाना तब मित्रों पर्व मनाने के लिए धनतेरस का पर्व जो है वह सामान्य रूप से संध्या टाइम के बाद धन की पूजा का विधान है जो हम स्थिर लग्न में धन का पूजन करें ताकि हमें धन की प्राप्ति हो और वह फिर रहे इसी तरह काली चौदस या रूप चतुर्दशी का पूजन भी मंत्र जाप और तंत्र विधान के लिए रात्रि का ही समय प्रशस्त माना गया है जिसकी वजह से रात्रि के समय ही पूजन कर्म करना चाहिए जिस दिन रात रे में चतुर्दशी है अतः धनतेरस के रात्रि में 18:00 बजे के बाद चौदस का प्रारंभ होता है अतः उसे दिन यह पर्व मनाया जाएगा दीपावली का पर्व चौदस के दिन 2:28 के बाद दोपहर प्रारंभ होता है अतः फिर लगना युक्त समय में माता लक्ष्मी का पूजन हमें उसी दिन करना होगा यानी 14 तारीख शनिवार के दिन उचित मुहूर्त होगा और रात्रि में प्राप्त होने से शनिवार के दिन ही मां लक्ष्मी का पूजन बहीखाताओं का पूजन अपने कंप्यूटर का पूजन आप कर सकते हैं मित्रों बहीखाता जो नहीं रखते आप अपनी सामान्य डायरी नित्य प्रति के व्यवहार की डायरी साथ में कंप्यूटर के पीसी का पूजन भी आप कर सकते हैं नियम के हिसाब से श्री सूक्त और पुरुष सूक्त के मंत्रों के द्वारा लक्ष्मी गणेश का पूजन करना महाकाली महालक्ष्मी महासरस्वती का पूजन विधान शास्त्र में बताया गया है षोडशोपचार पूजन वगैरह करके दीपावली का पर्व आप मना सकते हैं सामान्य रूप से पटाखे वगैरह फोड़े जाते हैं मिठाइयां बांटी जाती हैं अपने कर्मचारियों को भेंट सौगात दी जाती है यह सभी क्रिया आप कर सकते हें

माँ शारदा ज्योतिषधाम अनुसन्धान संस्थान इंदौर
पंडित दिनेश गुरुजी ज्योतिष वास्तु,पितृदोष विशेषज्ञ
9977794111

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