
दुनिया भर में कोरोना वायरस का कहर जारी है। इस वैश्विक महामारी से निपटने के लिए दुनिया भर के वैज्ञानिक वैक्सीन विकसित करने में लगे हैं। कई देशों में कोरोना वायरस की वैक्सीन का परीक्षण अंतिम दौर में है। इस बीच, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने शुक्रवार को कोरोना वायरस के इलाज के लिए इस्तेमाल की जारी रही एंटी वायरल दवा रेमडेसिवीर को लेकर आगाह किया। डब्ल्यूएचओ ने कहा कि कोरोना मरीजों के उपचार के लिए रेमडेसिवीर का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। इससे कोरोना संक्रमित मरीजों के ठीक होने का कोई सबूत नहीं मिल रहा है।
डब्ल्यूएचओ गाइडलाइन डेवलपमेंट ग्रुप (GDG) के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने कहा कि वर्तमान में मौजूद डेटा से इस बात कोई सबूत नहीं मिलता है कि रेमडेसिवीर मरीज़ के अहम परिणामों में सुधार करता है.
हालांकि, अमेरिका, यूरोपीय संघ और अन्य देशों ने रेमडेसिवीर के अस्थायी उपयोग को मंजूरी दी हुई है. शुरुआती रिसर्च में कुछ मरीजों में रिकवरी टाइम को कम करने में मददगार होने की बात सामने आने के बाद रेमडेसिवीर को लेकर यह कदम उठाया गया था.
अक्टूबर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कोरोना संक्रमित होने के बाद उन्हें रेमडेसिवीर समेत अन्य दवाएं दी गई थीं.
डब्ल्यूएचओ की यह सिफारिश चार अंतरराष्ट्रीय रेंडम ट्रायल पर आधारित है, जो कि अस्पताल में भर्ती 7000 से अधिक कोरोना मरीज़ों पर की गई. बीएमजे मेडिकल जर्नल में प्रकाशित अपडेटेड ट्रीटमेंट गाइडेंस में पैनल ने कहा कि उनकी सिफारिश का मतलब यह नहीं है कि रेमडेसिवीर का मरीज़ों के लिए कोई लाभ नहीं है.
हालांकि, ताजा आंकड़ों, लागत और डिलिवरी के तरीकों के आधार पर “अस्पताल में भर्ती कोरोना संक्रमित मरीज़ के लिए रेमडेसिवीर के इस्तेमाल की सलाह नहीं दी जाती है, चाहे रोगी कितना भी गंभीर क्यों न हो.”