सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: ऑफिस आते-जाते समय हादसे में मौत पर मिलेगा मुआवजा, ‘कम्यूटिंग टाइम’ को माना ड्यूटी का हिस्सा, कर्मचारी अधिनियम में दी नई व्याख्या

Commuting Time is Part of Duty : ऑफिस जाते और लौटते समय यदि दुर्घटना हुई, तो कर्मचारी ड्यूटी पर माना जाएगा, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला!

 

New Delhi : सुप्रीम कोर्ट ने दुर्घटना के दौरान कर्मचारियों के मुआवजे को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि यदि कोई कर्मचारी ड्यूटी के लिए घर से निकलता है और बाद में घर लौटता है। ऐसी स्थिति में वह ड्यूटी पर ही माना जाएगा। लेकिन, दुर्घटना का समय, स्थान और उसके कार्यस्थल के बीच संबंध स्थापित होना जरूरी होगा। मुआवजे के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को पलटते हुए यह नया आदेश दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम के एक प्रावधान में इस्तेमाल ‘नौकरी के दौरान और उसके कारण हुई दुर्घटना’ वाक्यांश में निवास स्थान और कार्यस्थल के बीच आने-जाने के दौरान होने वाले हादसे भी शामिल होंगे। अदालत ने कहा कि बात जब काम पर जाते समय या घर लौटते वक्त कर्मचारियों के साथ होने वाली दुर्घटनाओं की आती है, तो अधिनियम की धारा-3 में इस्तेमाल इस वाक्यांश को लेकर ‘काफी संदेह और अस्पष्टता’ है। कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम, 1923 की धारा-3 क्षतिपूर्ति के लिए नियोक्ता के दायित्वों से संबंधित है। न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि तथ्यों के आधार पर विभिन्न फैसलों में इसकी अलग-अलग व्याख्या की गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

अदालत ने कहा कि हम कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम की धारा-3 में प्रयुक्त वाक्यांश नौकरी के दौरान और उसके कारण हुई दुर्घटना की व्याख्या इस प्रकार करते हैं कि इसमें किसी कर्मचारी के साथ उसके निवास स्थान से ड्यूटी के लिए कार्यस्थल तक जाने या ड्यूटी के बाद कार्यस्थल से उसके निवास स्थान तक लौटने के दौरान होने वाली दुर्घटना शामिल होगी। बशर्ते दुर्घटना घटित होने की परिस्थितियों, समय, स्थान तथा रोजगार के बीच संबंध स्थापित हो।

बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने पलटा

सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के दिसंबर 2011 के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान यह फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने श्रमिक क्षतिपूर्ति आयुक्त एवं सिविल न्यायाधीश, उस्मानाबाद के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें एक व्यक्ति के परिवार के सदस्यों को ब्याज सहित 3,26,140 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया गया था। इस व्यक्ति की ड्यूटी पर जाते समय दुर्घटना में मौत हो गई थी।

यह था पूरा मामला

यह आदेश कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम के तहत दायर एक दावे पर पारित किया गया था। शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा कि मृतक एक चीनी फैक्टरी में चौकीदार के रूप में कार्यरत था। 22 अप्रैल 2003 को दुर्घटना के दिन उसकी ड्यूटी का समय तड़के 3 बजे से पूर्वाह्न 11 बजे तक था। पीठ ने कहा कि यह निर्विवाद है, कि वह अपने कार्यस्थल की ओर जा रहा था और कार्यस्थल से लगभग पांच किलोमीटर पहले एक स्थान पर घटी दुर्घटना में उसकी मौत हो गई थी।

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