कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक बार फिर अपने चुटीले अंदाज़ में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधा है. जब उनसे पूछा गया कि भारत को ट्रंप से कैसे निपटना चाहिए, तो थरूर ने मुस्कराते हुए कहा कि हमें मेलानिया से पूछना चाहिए कि वो ट्रंप को कैसे डील करती हैं.

ट्रंप को लेकर शशि थरुर ने कहा कि भारत की आत्म-सम्मान सौदेबाज़ी के लिए नहीं है
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक बार फिर अपने चुटीले अंदाज़ में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधा है. शशि थरूर ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से निपटने के तरीके पर चुटकी लेते हुए कहा कि यह तरीका तो केवल मेलानिया ट्रंप ही बता सकती हैं.
इंडिया टुडे के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई के साथ एक खास इंटरव्यू में जब थरूर से पूछा गया कि ट्रंप जैसे नेता से कैसे निपटा जाए, तो उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा, “मुझे नहीं लगता कि किसी ने ऐसा राजनीतिक नेता देखा है. आपको तो मेलानिया ट्रंप से पूछना होगा कि वह डोनाल्ड से कैसे निपटती हैं.”
थरूर ने ट्रंप की तुलना “स्कूल के दबंग” से करते हुए कहा कि अमेरिका ने भारत को गलत निशाना बनाया है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत का आत्मसम्मान “सौदेबाजी के लिए नहीं है.”
भारत का आत्मसम्मान सौदेबाजी के लिए नहीं- थरूर
25 अगस्त को दिल्ली में अमेरिकी वार्ता टीम के साथ होने वाली बातचीत को लेकर थरूर ने संयम और तर्कसंगत बातचीत पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि भारत को अपनी “रेड लाइन्स” (सीमाएं) तय करनी होंगी, खासकर कृषि क्षेत्र को लेकर.
उन्होंने कहा, “मिस्टर ट्रंप का भारत से इस तरह बात करना सही नहीं है. भारत सरकार में कोई भी हो, हमारा आत्मसम्मान सौदेबाजी के लिए नहीं है.” उन्होंने आगे कहा कि हमें अमेरिका को यह समझाना होगा कि हमारी कुछ सीमाएं क्यों हैं. हमारे देश में 70 करोड़ लोग कृषि पर निर्भर हैं. हम रियायती अमेरिकी अनाजों से अपने बाज़ार को भरकर उन्हें बर्बाद नहीं कर सकते.
अमेरिकी अपना रहा दोहरे मापदंड
थरूर ने यह भी कहा कि अगर बातचीत के बाद भी भारत उन चंद देशों में बना रहता है जिन पर 50% टैरिफ लगाया जाता है, तो “हमें यह साफ कर देना चाहिए कि हम भी ऐसा ही करेंगे.” उन्होंने राष्ट्रीय हितों के लिए रूस से खरीद करने के लिए अमेरिका के “दोहरे मापदंड” की भी आलोचना की और कहा कि अमेरिका उर्वरक और यूरेनियम जैसी चीजें रूस से खरीद रहा है.
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत को तीन हफ्ते की बातचीत के दौरान दृढ़ रहना चाहिए. अगर अनुचित नीतियां जारी रहती हैं, तो उन्होंने सुझाव दिया कि “हमें दूसरे बाजार खोजने होंगे.”