
कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे पंजाब के किसान दिल्ली तक पहुंच गए हैं. पुलिस ने किसानों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए पानी की बौछारें छोड़ीं और आंसू गैस के गोले दागे. लेकिन वे टस से मस नहीं हुए. जिसके बाद आखिरकार पुलिस ने शुक्रवार को किसानों को उत्तरी दिल्ली के निरंकारी ग्राउंड में प्रोटेस्ट करने की परमिशन दी. न्यूज चैनलों से लेकर सोशल मीडिया पर भी हर तरफ किसानों के इस प्रोटेस्ट की ही चर्चा है. लेकिन इन सबसे इतर हरियाणा के मुरथल का फेमस अमरीक सुखदेख ढाबा इन हजारों किसानों की मदद के लिए आगे आया है.मुरथल ढाबे के नाम से जाना जाने वाला यह ढाबा किसानों को तीन दिनों तक लंगर खिला रहा है.
मुरथल के अमरीक सुखदेव ढाबे में किसानों द्वारा खाए जा रहे लंगर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. इसे फेसबुक पर इंडियन यूथ कांग्रेस की ओर से अपलोड किया गया है. इसमें किसान ढाबे के अंदर बैठकर खाना खाते नजर आ रहे हैं. इस वीडियो के साथ कैप्शन लिखा गया है, ‘इंडिया विद फार्मर्स. यह हमारा भारत है. सलाम. दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर स्थित मुरथल में अमरीक सुखदेव ढाबा किसानों को निशुल्क भोजन उपलब्ध करा रहा है.’
बता दें कि दिल्ली की सीमाओं पर हजारों की संख्या में किसान जमे हुए हैं. बड़ी संख्या में किसान यहां पहुंचे हैं. सैकड़ों किसान दिल्ली के बुराड़ी मैदान में इकट्ठे हुए और नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन किया. ‘दिल्ली चलो’ मार्च के तहत शुक्रवार को किसानों और पुलिस के बीच जोरदार संघर्ष हुआ था. इसमें पुलिस ने किसानों पर पानी की बौछारें और आंसू गैस के गोले दागे थे. वहीं किसानों ने अवरोधकों को तोड़ डाला था और पथराव किया था. हालांकि शनिवार का दिन शांति भरा रहा.
वहीं सिंंधु और टिकरी बॉर्डर पर हजारों की संख्या में किसान ट्रकों, ट्रैक्टरों और अन्य वाहनों में पहुंचे हैं और पानी की बौछारों तथा आंसू गैस के गोले का सामना करते हुए तीन दिनों से वहां एकत्र हैं. काफी संख्या में पुलिसकर्मियों के पहुंचने के बावजूद कई किसानों का कहना है कि वे बुराड़ी के संत निरंकारी मैदान में नहीं जाएंगे जहां उन्हें शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की अनुमति दी गई है. रविवार को इस संबंध में अहम बैठक भी होनी है.
वहीं सरकार ने शनिवार को कहा कि वह किसानों के साथ कभी भी बातचीत के लिए तैयार है और साथ ही उनसे आंदोलन बंद करने का आग्रह भी किया. केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि किसानों की चिंताओं को दूर करने के लिए तीन दिसंबर को 32 प्रदर्शनकारी किसान संगठनों के साथ एक बैठक पहले ही निर्धारित की जा चुकी है और अगर ये संगठन चाहें तो सरकार उनके नेताओं से पहले भी बातचीत करने के लिए तैयार है. तोमर ने किसानों से विरोध खत्म करने की अपील करते हुए कहा कि किसान यूनियनों के नेताओं को बातचीत के लिए आना चाहिए क्योंकि चर्चा के बाद ही समाधान मिल सकता है.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी शनिवार को किसानों से अपील की कि वे अपना विरोध प्रदर्शन करने के लिए राष्ट्रीय राजधानी के बुराड़ी मैदान में चले जाएं. साथ ही उन्होंने कहा कि किसानों के निर्धारित स्थल पर जाते ही केंद्र सरकार उनके साथ वार्ता करने के लिए तैयार है.