सागर में पूर्व मंत्री भूपेन्द्र सिंह के भतीजे लखन सिंह के क्रेशर खदान में हाईटेंशन लाइन की चपेट में एक 12 साल का बच्चा मानस आ गया था। उसका हाथ तक काटना पड़ा। घटना जनवरी 2025 की है।
पीड़ित मानस शुक्ला के पिता की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किए हैं।
8 महीने बाद भी पुलिस ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। जिसके बाद बच्चे के पिता राकेश शुक्ला और कांग्रेस नेता अंशुल सिंह परिहार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई।
शुक्रवार को इस मामले में सुनवाई के बाद कोर्ट ने मप्र सरकार, सागर के एसपी, कलेक्टर, पूर्व मंत्री भूपेन्द्र सिंह और उनके भतीजे लखन सिंह को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने इस मामले में चार सप्ताह में जवाब मांगा है।
पिता बोले- पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही एक जनवरी 2025 को सागर जिले के बीना तहसील क्षेत्र के बारदा गांव में पूर्व मंत्री भूपेन्द्र सिंह के भतीजे लखन सिंह के क्रेशर के पास गिट्टी के ढेर के ऊपर से गुजरी हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से 12 साल के मानस शुक्ला गंभीर घायल हो गया था।
इलाज के दौरान डॉक्टरों को मानस के हाथ काटने पड़े थे। मानस के पिता ने पुलिस में एफआईआर के लिए आवेदन दिए। एसपी को भी उन्होंने आवेदन दिया लेकिन, एफआईआर दर्ज नहीं हुई।
मानस के पिता का आरोप है कि पूर्व मंत्री और खुरई विधायक भूपेन्द्र सिंह के प्रभाव के कारण पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही है। उन्होंने राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) में शिकायत की थी। NHRC ने इस मामले पर कलेक्टर, एसपी के व्यवहार पर नाराजगी जाहिर की थी।

अब पढ़िए पीड़ित मानस की आपबीती मानस शुक्ला ने कहा- मैं ग्राम बारदा का निवासी हूं। एक जनवरी की बात है। मेरे गांव से दो किलोमीटर दूर एक भागवत कथा चल रही थी। उस कथा की एक जनवरी को जल यात्रा में शामिल होने हम 5-6 दोस्त गए थे। हम वापस घर जा रहे थे। रास्ते में भूपेन्द्र सिंह, लखन सिंह की क्रेशर अवैध रूप से चल रही थी। उन्होंने अवैध रूप से गिट्टी का ढेर लगा रखा था।
हम गांव वालों को उस ढेर के ऊपर से जाना पड़ता था। इस वजह से हम जब उस गांव से आ रहे थे तो मुझे रोड पार करने के लिए गिट्टी के ढेर पर चढ़ना पड़ा और उस ढेर के ऊपर से निकली हाईटेंशन लाइन से मेरा हाथ टच हो गया।
मैं वहीं बेहोश हो गया। मेरे साथ जो दोस्त थे वो पापा को बुलाकर लाए। मुझे बीना अस्पताल से सागर रेफर कर दिया गया। वहां डॉक्टरों ने कह दिया कि बच्चे का हाथ काटना पडे़गा। मेरे सिर, पैर से लेकर छाती तक करंट निकल गया।
एम्स भोपाल में मेरा हाथ काटा गया। डॉक्टरों ने कहा यदि हाथ नहीं काटेंगे तो आगे जान का खतरा होगा। मानस ने कहा-पांच महीने हो चुके हैं। इस मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। पूरा पुलिस विभाग उनसे मिला हुआ है।
बीना थाने में दो महीने तक मेरी रिपोर्ट नहीं लिखी गई। मेरे पापा भूखे-प्यासे इधर-उधर घूमते रहे। घर के जेवर और जमीन गिरवी रखकर मेरा इलाज कराया गया। भूपेन्द्र सिंह और लखन सिंह पर अब तक कार्रवाई नहीं की गई। वे अभी बीना के पास की खुरई से विधायक हैं।
इसलिए उन्होंने दबाव डालकर हमारे खुरई के एक भैया अंशुल परिहार पर एफआईआर करा दी। उनपर दबाव डालने के लिए उनके पिता जी पर भी एफआईआर करा दी। मेरी भारत सरकार से यह मांग है कि हमें इंसाफ मिले और उनपर जल्द से कार्रवाई हो।
हमारे परिवार से नहीं मिले भूपेन्द्र सिंह मानस ने कहा- मेरे पापा हर महीने उनके घर गए। पापा को तीन-चार घंटे बिठाकर रखा और कह दिया कि भूपेन्द्र भैया कहीं गए हैं। हमें पूरी तरह गुमराह किया। 5-6 महीने में हमसे और हमारे परिवार से नहीं मिले। उन्होंने हमें एक बार फोन करके हाल तक नहीं पूछा। शायद वो सोचते हैं कि ये एक गरीब परिवार हमारा क्या कर लेगा। उन्होंने दबाव डाला, हमारे पापा की बीना में रिपोर्ट नहीं लिखी गई। वो पावर में होकर हमारे ऊपर राजीनामा करने का दबाव डाल रहे हैं

पब्लिक नोटिस जारी कर साफ कर चुके भूपेन्द्र सिंह परिवारजनों के कृत्यों के कारण बार-बार मीडिया में नाम आने के बाद पूर्व मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने 5 दिन पहले 24 अगस्त को अपने वकील केवीएस ठाकुर के जरिए पब्लिक नोटिस जारी किया। इसमें उन्होंने कहा कि उनके परिवार में केवल पत्नी सरोज सिंह, पुत्र अविराज सिंह, अविवाहित पुत्रियां उपमा, काजल और अनुप्रिया सिंह और विवाहित पुत्री अमृता सिंह शामिल हैं। इन सदस्यों के अलावा कोई भी उनके परिवार का हिस्सा नहीं है।
भूपेन्द्र सिंह ने स्पष्ट किया कि भाइयों के बीच पैतृक संपत्ति का बंटवारा पहले ही रजिस्टर्ड दस्तावेजों के आधार पर हो चुका है। सभी भाई और भतीजे अपने-अपने हिस्से में मालिकाना हक के साथ काबिज हैं और अपने व्यवसाय चला रहे हैं।
नाम के दुरुपयोग पर कानूनी चेतावनी भूपेन्द्र सिंह ने चेतावनी दी कि यदि कोई उनके नाम का उपयोग किसी व्यवसाय या अवैध गतिविधि में करता है और उसे सोशल मीडिया या मीडिया में प्रचारित करता है, तो इसे उनकी सहमति के खिलाफ माना जाएगा। ऐसी स्थिति में वे अपने राजनीतिक और सामाजिक हितों की रक्षा के लिए कानूनी कार्रवाई करेंगे