देश और प्रदेश की सियासत में इस समय गाली ट्रेंड में है। बिहार से शुरू हुआ ये ट्रेंड मध्यप्रदेश में भी जोर पकड़ रहा है। कांग्रेस नेताओं की गाली का जवाब बीजेपी की तरफ से भी गाली से ही दिया जा रहा है। सीहोर के विधायक सुदेश राय ने प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के नेताओं को मां की गाली दी। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो कांग्रेस नेताओं ने बीजेपी को आड़े हाथों लिया।
सुदेश राय जिस सीहोर जिले से आते हैं, उस जिले के 53 फीसदी लोग मां-बहन से जुड़ी गालियां देते हैं। एमपी के गाली देने वाले टॉप टेन जिलों में सीहोर का छठवां नंबर है। पहले नंबर पर राजधानी भोपाल और दूसरे नंबर पर ग्वालियर के लोग हैं। ये खुलासा सेल्फी विद डॉटर फाउंडेशन के सर्वे में हुआ है।
हरियाणा के रोहतक स्थित महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सुनील जागलान ने 11 साल पहले ये सर्वे शुरू किया था, जिसके नतीजे इसी साल जारी हुए हैं। एमपी के 55 जिलों के 8400 लोगों पर सर्वे किया गया। सर्वे में ये भी निकलकर आया कि एमपी का हर दूसरा व्यक्ति गालीबाज है। गाली देने में लड़कियां भी पीछे नहीं है।

पहले जानिए, कैसे शुरू हुआ ‘गाली बंद घर’ अभियान सेल्फी विद डॉटर फाउंडेशन के सुनील जागलान बताते हैं- मैं हरियाणा के रोहतक स्थित महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हूं। साल 2014 में रोहतक के बीबीपुर गांव का सरपंच भी रह चुका हूं। सरपंच रहने के दौरान एक बार मैं पंचायत की बैठक कर रहा था। इसमें महिला-लड़कियों समेत सभी आयु-वर्ग के लोग शामिल थे।
इसी बातचीत के दौरान एक व्यक्ति ने महिलाओं से जुड़ी गाली दी, इसने मुझे अंदर तक झकझोर दिया। इसी के बाद मैंने ‘गाली बंद घर’ अभियान शुरू किया। इस अभियान के तहत 11 साल तक भारत के 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में सर्वे किया। इसमें कुल 70 हजार लोगों ने हिस्सा लिया।
इस सर्वे का उद्देश्य अपमानजनक भाषा के उपयोग का आकलन करना था। जिसमें मां, बहन, बेटी और अन्य रिश्तों पर किए जाने वाले आपत्तिजनक शब्द शामिल हैं। इस सर्वे में केवल स्थानीय निवासियों को शामिल किया गया ताकि भाषा के पैटर्न पर प्रवासी आबादी का प्रभाव न पड़े और पूरी तरह स्थानीय भाषाई संस्कृति के बारे में पता चले।

मध्यप्रदेश के 8400 लोगों पर सर्वे जागलान बताते हैं कि ‘गाली बंद घर अभियान’ में मध्यप्रदेश के सभी 55 जिलों के 8400 लोगों को शामिल किया गया था। सर्वे में उनसे अलग-अलग सवाल पूछे गए। इन सवालों के जवाब के एनालिसिस के आधार पर सामने आया कि प्रदेश के कुल 48 फीसदी लोग महिलाओं से जुड़ी गाली देते हैं।
एमपी में गाली देने वाले पुरुषों का प्रतिशत 68% है। यहां की महिलाएं भी गाली देने में पीछे नहीं हैं। करीब 28 फीसदी महिलाएं और लड़कियां भी अपशब्दों का इस्तेमाल करती हैं।

अब सिलसिलेवार इन सवालों के बारे में जानिए प्रोफेसर जागलान के मुताबिक, सर्वे में युवक- युवतियों के अलावा माता पिता, परिवारजन, पंचायतें, स्कूल शिक्षक, ब्यूरोक्रेट, प्रोफेसर, डॉक्टर, पुलिसकर्मी, वकील समेत छोटे- बड़े व्यवसाय चलाने वाले लोग, ऑटो चालक, कुली, सफाईकर्मी, स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालयों के छात्रों को शामिल किया गया था। इनसे अलग-अलग सवाल पूछे गए थे। इनमें से पांच सवाल अहम थे, जिनका जवाब हां या न या फिर ऑब्जेक्टिव के रूप में था।
पहला सवाल: क्या आपने पिछले एक महीने में महिलाओं से संबंधित गाली सुनी है? इस सवाल का हां या न में जवाब देना था। करीब 90 फीसदी लोगों ने इसका हां में जवाब दिया।
दूसरा सवाल: ऐसी गालियां किन परिस्थितियों में आपने सुनीं या इस्तेमाल कीं? इस सवाल के चार ऑप्शन पूछे गए। पहला- गुस्से में, दूसरा- मजाक में, तीसरा- रोजमर्रा की बातचीत में। चौथे ऑप्शन के तौर पर जानना था कि इन गालियों को कहां सुना? सोशल मीडिया, ओटीटी या फिल्म में। 85 फीसदी से ज्यादा लोगों ने चारों ऑप्शन चुने।
तीसरा सवाल: आपके क्षेत्र में महिलाओं से संबंधित गालियां कितनी आम हैं? इस सवाल के भी चार ऑप्शन पूछे गए। इसमें बहुत आम, कभी-कभी, शायद ही कभी और बिल्कुल नहीं शामिल थे। करीब 90 फीसदी लोगों ने माना कि ये गालियां समाज में आम हैं।
चौथा सवाल: क्या महिलाओं से संबंधित गालियां देना सामाजिक रूप से स्वीकार्य है? इस सवाल के तीन ऑप्शन- पूरी तरह स्वीकार्य, आंशिक रूप से स्वीकार्य और अस्वीकार्य में से 96 फीसदी लोगों ने तीसरा ऑप्शन यानी पूरी तरह से स्वीकार्य नहीं है को चुना। यानी लोग मानते हैं कि ये स्वीकार्य नहीं है लेकिन बोलचाल में आम है।
सोशल मीडिया गालियों के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रहा है? पांचवां सवाल इसी से जुड़ा था। इस सवाल का हां या नहीं में जवाब देना था। 98 फीसदी लोगों ने इसका जवाब हां दिया है। सर्वे के अनुसार ऑनलाइन वीडियो गेम, सोशल मीडिया, ओटीटी प्लेटफॉर्म से जुड़े रहने वाले 42 प्रतिशत युवाओं ने अनजाने में ही गाली देना सीखा है। आज के समय में कॉमेडी शोज, ओटीटी प्लेटफॉर्म, फिल्मों और वेब सीरीज में गालियों का खूब इस्तेमाल हो रहा है। 54 फीसदी लोगों को बिना गाली वाले जोक्स में हंसी ही नहीं आती है।

गाली देने में भोपाल टॉप पर, इंदौर तीसरे नंबर पर प्रोफेसर जागलान बताते हैं कि सर्वे के दौरान जब हमारी टीम गांव की चौपाल, कॉलेज या यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स से सवाल पूछती थी कि कितने लोग गाली देते हैं, तो इस सवाल पर 98 फीसदी लोगों को हंसी आती थी। यानी ये उनके लिए आम बात है। सर्वे के मुताबिक, एमपी में राजधानी भोपाल के 63 फीसदी लोग आम बोलचाल की भाषा में सबसे ज्यादा गालियों का इस्तेमाल करते हैं।
दूसरे नंबर पर ग्वालियर के 58 फीसदी लोग हैं। आर्थिक राजधानी इंदौर तीसरे नंबर पर है। यहां के 56 फीसदी लोग महिलाओं से जुड़ी गाली देते हैं। सर्वे में ये सामने आया कि मप्र के आदिवासी जिलों के गांवों में शहरों के मुकाबले महिलाओं का ज्यादा सम्मान किया जाता है

सोशियोलॉजिस्ट बोले- चिढ़ाने के लिए देते हैं मां-बहन की गाली आखिर समाज में गाली देने का चलन क्यों बढ़ रहा है? इस सवाल का जवाब देते हुए सोशियोलॉजिस्ट डॉ. दीप्ति श्रीवास्तव कहती हैं- सोशल लर्निंग थ्योरी इसका आधार है। कोई व्यक्ति अपनी शिक्षा और विवेक को किनारे रखकर घर में और आसपास के समाज से सीखता है। उसे अपना लेता है। इसे व्यक्ति नॉर्मल बिहेवियर मानता है।
हम मानते हैं कि बिहेवियर पूरी तरह से सीखा हुआ प्रतिमान होता है। दूसरी वजह है- तनाव या गुस्सा। यदि व्यक्ति बहुत अच्छे मूड में होगा तो गाली नहीं बकेगा। जब बहुत ज्यादा तनाव या गुस्से में होगा तो आक्रामकता या हताशा को निकालने के लिए गाली देता है।
डॉ. श्रीवास्तव के मुताबिक, मां-बहन-बेटी किसी परिवार या व्यक्ति की इज्जत का प्रतीक होती हैं। वो व्यक्ति के दिमाग में कोमल और संवेदनशील जगह पर होती है। उस व्यक्ति को चिढ़ाने के लिए ऐसी गालियों का इस्तेमाल किया जाता है।
वे कहती हैं कि समाज में अब गालियां नॉर्मल हो चुकी हैं। महिलाओं ने भी इसे अपना लिया है। मेट्रो सिटीज में लड़कियां भी गालियां दे रही हैं। हमें इसका विरोध करना जरूरी है।
