
ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन का भारत में ट्रायल एस्ट्रेजेनिका और पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) की तरफ से किया जा रहा है. तीसरे चरण के ट्रायल के दौरान चेन्नई में एक वालेंटियर ने वैक्सीन लेने के बाद खुद को बीमार बीमार होने का आरोप लगाया और कंपनी से 5 करोड़ का मुआवजा मांगने के साथ इसके चल रहे ट्रायल पर रोक की मांग की थी. इसके बाद सीरम इंस्टीट्यूट ने उस वालेंटियर पर 100 करोड़ का जुर्माना ठोक दिया गया है.वॉलंटियर की पत्नी ने NDTV से फोन पर बातचीत करते हुए बताया कि ऑक्सफोर्ड वैक्सीन के ट्रायल के तहत उनके पति के स्वास्थ्य पर गंभीर दुप्रभाव पड़े हैं, वो 100 करोड़ का मुकदमा झेल रहे हैं और अपने प्रोफेशन के तहत मिले एक अमेरिकी प्रोजेक्ट से भी हाथ धो बैठे हैं. यहां तक कि उन्हें एक आसान सा ऑनलाइन पेमेंट करने में दिक्कत आ रही है.
हालांकि, अदार पूनावाला की कंपनी ने मंगलवार को एक बयान जारी कर कहा कि वॉलंटियर की तबियत वैक्सीन के चलते खराब नहीं हुई है. कंपनी ने बयान में कहा कि ‘चेन्नई के वॉलंटियर के साथ हुई घटना दुर्भाग्यपूर्ण है लेकिन यह वैक्सीन की वजह से नहीं हुई है.’ उसकी ओर से वॉलंटियर के आरोपों को ‘दुर्भावनापूर्ण और गलत’ बताया गया है,
वॉलंटियर की पत्नी ने उन आरोपों को खारिज किया है, जिसमें कहा जा रहा था कि उन्होंने आर्थिक या फिर किसी अन्य लाभ कमाने के इरादे के साथ नवंबर में कंपनी को लीगल नोटिस भेजा था. इस वॉलंटियर ने कोविड वैक्सीन के तीसरे चरण में हिस्सा लिया था और उसे 1 अक्टूबर को एक डोज़ दी गई थी. उसने ‘वैक्सीन दिए जाने के बाद गंभीर प्रतिकूल लक्षण दिखाई देने’ की शिकायत की थी. 21 नवंबर के अपने लीगल नोटिस में उसने बताया है कि वैक्सीन लेने के 10 दिन बाद उसे ‘तेज सिरदर्द’, ‘व्यवहार में पूरी तरह बदलाव’ और ‘रोशनी और आवाज से परेशानी’ जैसी शिकायतें होने लगीं. नोटिस में यह भी दावा किया गया है कि वो किसी को पहचान या फिर बोल नहीं पा रहा था.
वॉलंटियर की पत्नी ने फोन पर हुई बातचीत के दौरान कहा, ‘हमारी पहली मांग यह थी कि इस घटना को लोगों की नजर में लाया जाए. इस वैक्सीन को ही भारत के लोगों के लिए विकल्प बताया जा रहा है. हम चुप नहीं रह सकते. हम अपनी चुप्पी बेच सकते थे. हमने बस एक नोटिस भेज दिया होता और हमें कुछ फायदा हो जाता, लेकिन हमारा दिल हमें ऐसा करने की इजाजत नहीं देता.’
महिला ने अपने मार्केटिंग प्रोफेशनल पति को जागरूक और रचनात्मक व्यक्ति बताते हुए कहा कि ‘उनकी लिखने की क्षमता, चीजों को क्रिएटिव तरीके से सामने रखने का तरीका ही उनका प्लस पॉइंट था. अब वो अच्छे से अपना काम भी नहीं कर पा रहे हैं.’ उन्होंने कहा कि वो पहले से बेहतर हैं लेकिन छोटी-छोटी चीजें करने में उन्हें दिक्कत आ रही है.
उन्होंने बताया कि ‘दो हफ्तों के बाद भी वो ऑनलाइन पेमेंट जैसी छोटी चीजें नहीं कर पा रहे…मुझसे करने को बोलते हैं. वो ऐसा कभी नहीं करते हैं. महामारी के बीच में उन्हें अच्छा प्रोजेक्ट मिला था; कोई अमेरिकन प्रोजेक्ट था जो 1 अक्टूबर से शुरू हुआ था, अब वो भी हाथ से चला गया है क्योंकि उनकी हालत की वजह से क्लाइंट्स पीछे हट गए हैं. उनको जल्दी-जल्दी काम चाहिए था.’
इस कपल की चिंता है कि वॉलंटियर की ओर से शिकायत किए जाने के बाद भी ट्रायल्स को जारी रखने की अनुमति कैसे दी जा रही है. उन्होंने कहा, ‘हमारा सवाल था कि जब ऐसे प्रतिकूल प्रभाव देखे गए तो उन्होंने ट्रायल रोका क्यों नहीं? कम से कम तब तक के लिए जब तक कि वो 100 फीसदी पक्के नहीं हो जाते? वो वॉलंटियर्स को इसकी जानकारी दिए बगैर कैसे ट्रायल्स करा रहे थे?’
सीरम इंस्टीट्यूट ने कहा है कि कंपनी ने कहा कि ‘हम सबको इसका भरोसा दिलाना चाहते हैं कि यह वैक्सीन तब तक रिलीज नहीं की जाएगी, जब तक कि यह पूरी तरह सुरक्षित और इम्यूनोजेनिक न साबित हो जाती. वैक्सीनेशन और इम्यूनाइजेशन को लेकर पहले से मौजूद भ्रम और जटिलता को ध्यान में रखते हुए अनैतिक रूप से हमलों की शिकार कंपनी की प्रतिष्ठा को बचाने के लिए हमने लीगल नोटिस भेजा है.’
कंपनी ने कहा है कि उसने सभी नियमों और नैतिक मानकों और गाइडलाइंस का सख्ती से पालन किया था. इसने दावा किया है कि Data and Safety Monitoring Board and the Ethics Committee ने ‘इसे स्वतंत्रत तरीके से हरी झंडी दी थी और इसे वैक्सीन ट्रायल से जुड़ा मुद्दा नहीं बताया था.’