इंदौर में एमवाय अस्पताल के NICU वार्ड में चूहे एक नवजात की चार उंगलियां खा गए थे। शनिवार को अस्पताल में नवजात के परिजन और जयस ने अस्पताल में प्रदर्शन किया। इसके बाद रात में प्रबंधन ने शव माता-पिता को सौंप दिया। शव का को पारदर्शी प्लास्टिक में पैक कर बॉक्स में रखा गया था।
परिजन को बॉक्स में नवजात का शव रखकर दिया था। घर पर जब बॉक्स खोला तो उसकी चार उंगलियां नहीं थी।
रात में परिजन जब धार जिले के रूपवाड़ा गांव पहुंचे। यहां अंतिम संस्कार से पहले बॉक्स खोलकर देखा तो हकीकत सामने आई। शव को देखकर मां मंजू बेसुध हो गई। देर रात गांववालों की मौजूदगी में बच्ची का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
बता दें कि एमवाय अस्पताल में दो नवजातों की चूहों के काटने के बाद मौत हो जाने का मामले में राजनीति गरमा चुकी है। भास्कर की पड़ताल में अस्पताल प्रबंधन के पांच दावे झूठे नजर आ रहे हैं।




माता-पिता का आरोप: 5 दिन हमें बताया ही नहीं इस मामले में सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट तब आया जब कांग्रेस और जयस की एंट्री हुई। दोनों ही दल इस गंभीर घटना को लेकर आक्रामक हो गए। शनिवार को सरदारपुर विधायक प्रताप ग्रेवाल और जयस के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट लोकेश मुजाल्दा परिजन को अस्पताल ले जाने पर अड़े रहे।
बाद में आपसी सहमति से विधायक ग्रेवाल पिता देवराम को और जयस के नेता मां मंजू को लेकर एमवाय अस्पताल पहुंचे। वहां करीब छह घंटे चले प्रदर्शन के दौरान परिजन ने आरोप लगाया कि उन्हें अस्पताल से तुरंत जाने के लिए कह दिया गया था और यह भी कहा गया था कि फोन करने पर जानकारी दी जाएगी, लेकिन उन्हें बच्ची की मौत की खबर तक नहीं दी गई।
शनिवार के हंगामे में नवजातों के परिजन के लिए 1-1 करोड़ रुपए मुआवजे की मांग उठी। अंततः रेडक्रॉस सोसाइटी की ओर से धार निवासी बच्ची के परिवार को 5 लाख रुपए की सहायता राशि दी गई, जबकि देवास निवासी दंपती, जिनके नवजात की भी मौत हुई थी, उन्हें कोई आर्थिक मदद नहीं मिली।

परिजन और जयस ने एमवाय अस्पताल में शनिवार को 6 घंटे तक प्रदर्शन किया था।