सोमवार रात रानीपुरा की कोष्ठी कॉलोनी में भरभरा कर गिरे तीन मंजिला मकान में हुई 2 मौतों ने शहर में नालों की जमीनों को दबा कर बनाए गए 5 हजार से ज्यादा मकानों पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। नालों पर बने मकानों के नक्शे निगम ने ही पास किए हैं। आईडीए और निगम ने खुद भी नालों पर भवन बना रखे हैं।

कान्ह व सरस्वती नदी से शहर के छोटे-बड़े 16 से ज्यादा नाले मिलते हैं। प्रशासन के रिकॉर्ड में ही नदी पर 2500 से ज्यादा अतिक्रमण हैं। नौलखा से आजाद नगर, छावनी, चंपाबाग, जूनी इंदौर, हाथीपाला से कृष्णपुरा तक भी नदी दोनों ओर अतिक्रमण से पटी है। ऐसे ही पोलोग्राउंड की फैक्ट्रियों के अलावा कुलकर्णी नगर, भागीरथपुरा में भी कई मकान नदी में बने हैं।
निगम – आईडीए के भी निर्माण हरसिद्धि इलाके में निगम ने नदी के घाट दबाते हुए दुकानें बना दी है। शिवाजी मार्केट व कृष्णपुरा में भी निगम ने मार्केट बनाए हैं। आईडीए ने जवाहर मार्ग, पटेल ब्रिज के समीप मल्टी बना रखी है। एक को खाली कराने के लिए कहा है।
इंडस्ट्री हाउस के समीप पलासिया नाला – यह नाला पीपल्याहाना से आ रहा है। इसके दोनों किनारों पर भवन बने हुए हैं। छप्पन दुकान के पीछे बहुमंजिला भवनों को अनुमति दे दी गई है। देवनगर ओल्ड पलासिया में भी नाले में ही मकानों का पिछला हिस्सा बनाया गया है।
जंजीरवाला से पंचम की फैल- इस हिस्से में नदी के दोनों ओर से मकान बन गए हैं। निगम ने कचरा ट्रांसफर स्टेशन बना दिया है। शेष हिस्से पर बस्ती के मकानों का पीछे वाला हिस्सा बना है।
चंदन नगर, पीलियाखाल नाला- यह नाला सिरपुर से मध्य शहर की ओर बहता है। चंदन नगर में नाले पर ही मकान बने हैं। जूना रिसाला, सदर बाजार, बाणगंगा, गोविंद नगर क्षेत्रों में भी अतिक्रमण है।
चंद्रभागा रिवर साइड रोड – नदी के दोनों ओर अतिक्रमण है। जवाहर मार्ग से चंद्रभागा की ओर सड़क के लिए तोड़े गए मकान भी खतरनाक स्थिति में हैं। कुछ दिन पहले ही वहा एक मकान भी गिरा था। वहां पर खुदाई के किनारे तक मकान आ गए हैं।