देश के तीन बड़े खिलाड़ियों के कोच रहे इन दिग्गजों ने ये खुलासे भास्कर के स्पाई कैम पर किए हैं। डोमेस्टिक क्रिकेट में भास्कर की पड़ताल का सिलसिला दिल्ली के अलग–अलग थानों में दर्ज हुई तीन शिकायतों से हुआ।
अनुराग कुमार, रोहित सैनी और विक्की। तीनों क्रिकेट प्लेयर हैं। मिडिल क्लास फैमिली से आते हैं। रणजी ट्रॉफी खिलाने के नाम पर अनुराग से 20 लाख, रोहित से 15 लाख और विक्की से 18 लाख रुपए लिए गए। दिसंबर-2024 में तीनों ने दिल्ली के अलग–अलग थानों में लिखित शिकायत दर्ज करवाई।
कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद आरोपियों ने विक्की से पैसे लौटाने का एग्रीमेंट किया और बीते 9 महीनों में उसे 13 लाख रुपए वापस किए हैं। हालांकि, अनुराग-रोहित को अभी तक कुछ वापस नहीं मिला। मामला कोर्ट में है। भास्कर ने पड़ताल कर यह जाना कि क्रिकेट टीम में सिलेक्शन के लिए क्या वाकई लेनदेन चल रहा है।

मामले का सच जानने के लिए हमने अरुणाचल प्रदेश, दिल्ली और मुंबई में पड़ताल की। सबसे पहली मुलाकात अरुणाचल प्रदेश के एक ऐसे शख्स से हुई, जो स्टेट बोर्ड से जुड़ा है। इसके बाद हमने दिल्ली और मुंबई में वीरेंद्र सहवाग, शिखर धवन, इशांत शर्मा, युजवेंद्र चहल और रोहित शर्मा के कोच रह चुके दिग्गजों से स्पाई कैम पर बातचीत की।

पहले पढ़िए तीनों युवा खिलाड़ियों के साथ क्या हुआ है…
पहले बिहार बुलाया, मैच खिलवाए, पैसे लिए
तीनों खिलाड़ी तमाम राज्यों में टूर्नामेंट्स खेल चुके हैं। उत्तरप्रदेश के मऊ में हुए एक क्रिकेट टूर्नामेंट के दौरान तीनों के साथ एक जैसी धांधली होती है। तीनों ने बताया कि मैच के दौरान संघर्ष आनंद नाम के व्यक्ति ने फोन कर कहा,“तुम अच्छा खेलते हो। मैं तुम्हें बिहार की रणजी टीम में जगह दिला सकता हूं।’ तीनों तैयार हो गए।
आनंद ने तीनों के बिहार से फेक डॉक्यूमेंट बनवाए और फिर बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के अलग-अलग टूर्नामेंट भी खिलवाए। शुरुआत में तीनों को लगा कि संघर्ष आनंद उनके खेल से प्रभावित हो कर मदद कर रहा है।
लड़कों को बताया गया कि बिहार की रणजी टीम में भी वह उनका सिलेक्शन करवा देगा। इसके लिए अनुराग से 20 लाख, रोहित से 15 लाख और विक्की से 18 लाख रुपए ट्रांसफर करवा लिए। कुछ ऑनलाइन कुछ पैसा कैश लिया।

राइट आर्म मीडियम पेसर विक्की ने पुलिस को दिए लिखित आवेदन में बताया कि ‘संघर्ष आनंद और सारस आनंद नामक दो व्यक्तियों ने हेमंत ट्रॉफ़ी खेलने के लिए उसे बिहार बुलाया और वह इस टूर्नामेंट में खेला भी।’
‘फिर इन लोगों ने बिहार सेलेक्टर बोर्ड के सदस्यों से स्पीकर पर बात करवाई। इस नाम पर विक्की से रणजी टीम में सिलेक्शन कराने के नाम पर 13 लाख 50 हजार रुपए अकाउंट में और 4 लाख 50 हजार रुपए कैश लिया और फिर सिलेक्शन कराने से मना कर दिया।’
पैसा मिलते ही संघर्ष ने फोन उठाना बंद कर दिया। जब लड़कों ने प्रेशर बनाना शुरू किया तो जान से मारने कि धमकियां मिलने लगीं।

डोमेस्टिक क्रिकेट में करप्शन का सच सामने लाने के लिए हमें ऐसे व्यक्ति की तलाश थी, जो सिस्टम का हिस्सा हो। ऐसा कोई जो किसी राज्य के बोर्ड से जुड़ा हो। हमारी टीम की तलाश हमें अरुणाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन से जुड़े एक व्यक्ति नबम गुनिया तक ले गई।
सूत्रों से पता चला कि इन दिनों अरुणाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के कुछ लोग दिल्ली में नए ‘मुर्गे’ की तलाश में घूम रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि नबम गुनिया नामक यह व्यक्ति अरुणाचल प्रदेश क्रिकेट का पूर्व सिलेक्टर रह चुका है और वर्तमान में अरुणाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के एक जिले का सचिव है। जांच में यह भी पता चला कि नबम गुनिया के रिश्तेदार ही एसोसिएशन में बड़े पदों पर काबिज हैं।
हमने नबम गुनिया से मुलाकात के लिए वक्त मांगा। शुरुआत में वह मिलने से हिचक रहा था, लेकिन जब हमने बताया कि हम बिजनेसमैन हैं और अपने भतीजे के लिए किसी राज्य की टीम तलाश रहे हैं तो वह मिलने के लिए तैयार हो गया। नबम गुनिया ने स्टिंग में दो रणजी मैच खिलाने के लिए 25 लाख रुपए मांगे। अंडर-19 अरुणाचल प्रदेश में प्रति मैच खेलने के लिए 6-8 लाख रुपए की डिमांड की।

करप्शन का ये खेल सिर्फ खिलाड़ियों और एजेंट्स तक ही सीमित नहीं है क्रिकेट के नामी कोच भी मानते हैं कि, बिना पैसे और पहुंच के सिलेक्शन संभव नहीं है। हम पांच क्रिकेट कोचों से मिले। सिलसिलेवार तरीके से पढ़िए, किसने क्या कहा।

एएन शर्मा, सहवाग के कोच रहे हैं
अंतिम 11 में खेलने के लिए भी पैसा मांगा जाता है
सहवाग के बचपन के कोच रहे शर्मा के मुताबिक, ‘चयन में पैसे चलते हैं। बोले, दिल्ली एंड डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन यानी DDCA में चयन के नाम पर खुलकर पैसा चलता है, ‘अगर आपको अपने लड़के को अंडर-19 खेलाना है तो जेब में 15-16 लाख रुपए होना चाहिए। अंतिम 11 में खेलने के लिए खिलाड़ियों से पैसे मांगा जाता है।’
81 साल के शर्मा बताते हैं कि पहले अगर कोच कह देते थे कि फलां लड़का अच्छा खेलता है तो हमारी सुनी जाती थी। उसका ट्रायल लिया जाता था, लेकिन अब कोच की कोई नहीं सुनता। आज चयन में सिर्फ पैसा चलता है। रेयरली ही कोई गरीब का लड़का आगे निकलता है।
मदन शर्मा, शिखर धवन के कोच रहे हैं
बेस्ट परफॉर्मर को भी अंडर–16 में जगह नहीं
टीम इंडिया में गब्बर नाम से मशहूर शिखर धवन के कोच मदन शर्मा ने स्पाई कैम पर कहा कि DDCA में चयन में प्रतिभा नहीं अब राजनीति चलती है। उन्होंने एक लड़के का नाम लेकर
बताया कि ये लड़का पिछले सीजन का दिल्ली में बेस्ट परफॉर्मर था, लेकिन अंडर-16 की टीम में इसका नाम नहीं आया। सिर्फ राजनीति के कारण… जबकि उससे कम स्कोर करने वाले और तकनीकी तौर पर कमजोर प्लेयर को टीम में मौका दिया गया।
“दिल्ली में पहले अरुण जेटली के टाइम पर ‘सुनील देव जी’ स्पोर्टस सेक्रेटरी थे। अगर उनको हम लोगों ने कह दिया की लड़का अच्छा है तो कहते थे भेजो। उनके सामने आकर परफ़ॉर्म कर दिया तो, खेलता था लड़का। विराट कोहली किस कारण से खेला। शिखर धवन किस कारण से खेला। ईशांत शर्मा किस कारण से खेला। ये थोड़े ही था कि चलो ठीक है। अच्छे थे। नाम तो बाद में बना। इन सबको खिलाने वाला बंदा सुनील देव था, जो किसी को रोकता नहीं था। आजकल क्या है कि अब वो चीज नहीं चलती दिल्ली में…
रणधीर सिंह, युजवेंद्र चहल और पवन नेगी के कोच रहे हैं
अब क्रिकेट में सिर्फ सिफारिश और भ्रष्टाचार
रणधीर सिंह का नाम देश के बेहतरीन कोचों में शुमार होता है। इनके सिखाए हुए दो खिलाड़ी टीम इंडिया में और करीब 11 फिलहाल रणजी खेल रहे हैं। सिंह DDCA के कोच भी रह चुके हैं। रणधीर सिंह ने बात पवन नेगी से शुरू की। उन्होंने कहा कि एक लड़का वर्ल्ड कप टीम के लिए सिलेक्ट होता है और उसे स्टेट टीम में नहीं लिया जाता। हमने सबसे पूछा, किसी के पास कोई जवाब नहीं था।
पवन नेगी विश्व कप, एशिया कप की टीम में था और वह उसी सीजन में अपने स्टेट की रणजी टीम में सिलेक्ट नहीं हुआ। ऐसा भी नहीं था कि वह इंडिया की ओर से कोई बांग्लादेश या जिम्बाब्वे टूर करके आया था।
इस बारे में हमने तब ‘चेतन चौहान जी’ से पूछा था, “सर ये तो अभी वर्ल्ड कप खेल कर आया है और टीम तो छोड़ो 30 में नहीं है।” रणधीर सिंह बड़े ही कड़े शब्दों में कहते हैं ऐसा हर स्टेट में होता रहता है और आगे भी होगा। ये चेंज भी नहीं होगा… बातचीत के दौरान हमने पूछा कि क्या ईमानदारी से किसी खिलाड़ी का टीम मे चयन हो जाता है? रणधीर सिंह और मदन शर्मा ने एक सुर में बेधड़क जवाब दिया नहीं! अब नहीं होता। पहले हो जाता था। अब क्रिकेट में सिर्फ सिफारिश और भ्रष्टाचार चलता है।
श्रवण कुमार, ईशांत शर्मा के कोच रहे हैं
‘अधिकारी भी जानते हैं चयन में पैसा चलता है’
ईशांत शर्मा के कोच रहे श्रवण कुमार के पास पहुंचे। श्रवण कुमार के पास कोचिंग का साढ़े चार दशक से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने कहा कि अब क्रिकेट में वही आगे बढ़ सकता है, जिसके पास पैसा और पहुंच है। पहले दिल्ली में कॉम्पीटिशन था। जो अच्छा करेगा, उसे कोई नहीं रोक सकता, लेकिन अब नहीं है।
कुमार ने बताया कि अंडर-16, 17, 19 में चयन के लिए 15-25 लाख रुपए का रेट चल रहा है और इसकी जानकारी DDCA के तमाम बड़े अधिकारियों को भी है, लेकिन कोई कुछ नहीं करता है। यही कारण है कि इंडिया अंडर-19 में दिल्ली का एक भी खिलाड़ी नहीं है।
दिनेश लाड, रोहित शर्मा के कोच रहे हैं
रोहित भी हो चुके हैं धांधली के शिकार

दिल्ली के बाद हमारी टीम पहुंची मुंबई। वहां हमारी मुलाकात दिनेश लाड से हुई। द्रोणाचार्य अवॉर्डी इस कोच का नाम बड़े सम्मान से लिया जाता है। ये वही कोच हैं, जिन्होंने रोहित शर्मा जैसे बड़े खिलाड़ी को तैयार किया है। लाड कहते हैं, ‘मुंबई में अंडर-16 के चयन के लिए कल्पेश कोली टूर्नामेंट का होता है। इसके लिए रोहित शर्मा का भी बोरिवली टीम से चयन हुआ था, पर टीम के कोच ने अपने पसंद के खिलाड़ी को खिलाने के लिए रोहित को एक भी मैच नहीं खेलाया।’
‘जिससे रोहित का अंडर-16 में चयन का सपना टूट गया। रोहित का लक उसके साथ था। उसी साल BCCI के इस टूर्नामेंट को अंडर-16 से हटा कर अंडर-17 डाल दिया गया, जिससे रोहित शर्मा को एक साल और मौका मिल गया। जहां रोहित को बेस्ट प्लेयर के अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। मुंबई में भी चयन में पैसा चलता है, लेकिन कोई आवाज नहीं उठा सकता, उठाने पर खिलाड़ी का करियर खत्म समझो। क्लब वालों की सिलेक्टर से सेटिंग होती है।’
क्रिकेट अब गरीबों का खेल नहीं है…
इंडिया के पांच क्रिकेट कोचों से हम मिले और सबने माना कि इंडिया के डोमेस्टिक क्रिकेट चयन प्रणाली में जमकर धांधली होती है और पैसे का खेल चलता है। इस मसले पर सीनियर स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट चंद्रशेखर लूथरा कहते हैं, “देखिए दिल्ली देश की राजधानी है। इसलिए हमने ज्यादा टाइम दिल्ली ही कवर किया है। बाकी स्टेट में तो सुनते हैं,लेकिन दिल्ली में बहुत गंदगी है। हमने ये भी देखा है अंडर 15 में एक लड़के को सिलेक्ट नहीं कर रहे थे। वो अच्छा खेलता था। मैंने लिखा तो उसे सिलेक्ट किया। उसने 100 कर दिया तो उसे बाहर कर दिया। ऐसा उसके साथ बार-बार हुआ। थक कर इस लड़के ने क्रिकेट ही छोड़ दिया। अगर आप अंडर-15 या 19 में परफॉर्म नहीं करते हैं तो आप इंडिया नहीं खेल सकते।
विराट, ईशांत का खेल देखकर अंडर-19 में ही समझ आ गया था ये आगे भी खेलेगा कोई रोक नहीं सकता है। इन्हें भी रोकने की पूरी कोशिश की गई थी। सिलेक्शन में धांधली बहुत ही छोटा शब्द है। क्रिकेट अब गरीबों का खेल नहीं है। जूनियर लेबल पर ही आपको खत्म कर दिया जाता है कि कहीं आपके कारण किसी पैसे वाले का खेल न रुक जाए