इंदौर के परदेशीपुरा इलाके की युवती निशिता गौर ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर अपने परिवार के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं।
युवती निशिता गौर ने अपने पेरेंट्स पर गंभीर आरोप लगाए हैं
निशिता ने दावा किया कि उसे मानसिक रूप से परेशान किया गया और उसके साथ जादू-टोना किया गया। युवती ने यह भी कहा कि उसके साथियों को झूठे प्रकरणों में फंसाकर जेल भेजा गया। मामला कुछ माह पहले इंदौर प्रेस क्लब में हुई विवादित घटना से जुड़ा है।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में निशिता गौर ने अपने माता-पिता, चाचा-चाची और मामा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। युवती का कहना है कि मुझे मानसिक रूप से बीमार बताकर कई महीनों तक घर में बंद रखा गया।
निशिता गौर ने अपने वीडियो में यह कहा…
हम शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के लिए काम करते थे। मेरे पेरेंट्स ने मेरे दोस्तों को धमकाया। मैं नहीं मानी तो मुझे गालियां दीं। बाद में जब इन्होंने माफी मांगी तो मैंने भी इन्हें माफ कर दिया। तब घर जाना शुरू किया। एक दिन इन्होंने मुझे बुलाया और मुझे मारकर बंद कर दिया।

मुझे हॉकी से मारने की कोशिश की गई। मुझे मारने के लिए मेरे पापा ने कैंची तक उठा ली थी। लगा कि आज मेरा आखिरी दिन है। अब मेरे पापा मुझे मार डालेंगे। मुझे 7 दिन भूखा-प्यासा रखा गया। जब-जब मैंने भागने की कोशिश की।
मेरे पापा और घर के बाहर बैठे गार्ड ने मुझे उठा-उठाकर वापस घर के अंदर पटक दिया। मेरा फोन तोड़ दिया गया। मुझे गालियां दीं गईं। कहा कि मैं पैदा होते ही मर क्यों नहीं गई।
एक दिन मैंने इनका फोन लेकर अपने फ्रेंड से मदद मांगी तो पुलिस आई। पुलिस ने मेरे मम्मी-पापा को कहा कि मुझे लेकर वन स्टॉप सेंटर जाएं। जब वहां गए तो इंचार्ज अर्चना परिहार ने मुझे ही चिल्लाया। जबरन साइन कराकर मुझे घर ले आए।
मुझे फिर पेरेंट्स ने बंधक बनाकर रखा। इसके बाद मुझे रिहैब सेंटर ले गए। इसके बाद अलग-अलग मनोचिकित्सक के पास ले गए। उन दवाइयों से मैं 12-़15 घंटे सोती रहती थी। मेरी थेरेपी भी चलाई गई।

मैं अपनी जिंदगी अपने काम में लगाना चाहती हूं। लेकिन ये लोग मुझे टॉर्चर कर रहे हैं। मेरे पास कोई रास्ता नहीं था। मैंने पेरेंट्स को समझाया कि मुझे नौकरी करना है। वे नहीं माने। फिर मैंने कमिश्नर, एसडीएम, महिला आयोग सहित सभी जगह आवेदन लिखा। प्रूफ के साथ बताया कि इन लोगों ने मुझ पर काला जादू भी किया है।
मैंने घर छोड़ दिया है। अब जब जनसुनवाई में मुझे बुलाया जा रहा था तब भी मुझे लग रहा था कि ये लोग मुझे फिर से कैद कर देंगे। मैंने वहां अपना पक्ष रखा। इसके बावजूद ये लोग नहीं माने। मैं अपनी आजादी के लिए थाने के चक्कर काट रही हूं। सारा गलत इन्होंने किया और जवाबदेही मेरी बन रही है।
मेरे पेरेंट्स के बहुत स्ट्रॉन्ग पॉलिटिकल कनेक्शन हैं। इन्होंने मेरे और मेरे सोशल ग्रुप के खिलाफ खबरें छपवाई हैं। यहां तक की इन्होंने अपनी बेटी के खिलाफ सेक्स रैकेट चलाने की खबरें छपवाई हैं। इनके खिलाफ जब हम प्रेस कॉन्फ्रेंस करने गए तो वहां हंगामा कर उसे स्थगित करवा दिया।
हमारे सोशल ग्रुप के फाउंडर सौरभ बनर्जी पर झूठे आरोप लगाकर उन्हें ढाई महीने से ज्यूडिशियल कस्टडी में रखा गया है। मैं अपने ही शहर में सुरक्षित नहीं हूं। ये किसी भी हद तक जा सकते हैं। हर जगह मुझे ढूंढा जा रहा है। मैं चाहती हूं कि पुलिस हमारी मदद करे। हमें इस तरह नहीं जीना है।

जंगल में रह रहे थे 8 युवक और 2 युवतियां दरअसल, देवास जिले के बरोठा थाना क्षेत्र के शुक्रवासा गांव के हिंदूवादी संगठनों ने 23 जुलाई 2025 को कलेक्टर कार्यालय और पुलिस को शिकायत की थी। उनका कहना था कि गांव से लगे जंगल में टपरी बनाकर 8 युवक और 2 युवतियां रह रही हैं।
उनकी गतिविधियां संदिग्ध हैं। यह लोग जरूरतमंद लोगों को पहचान कर उन्हें लालच देकर अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। लोगों ने धर्मांतरण की आशंका जाहिर की थी।
शिकायत पर पुलिस गांव पहुंची थी और युवकों से पूछताछ की। पता चला कि इन लोगों ने शुक्रवासा के देवराज भील की साढ़े 6 बीघा जमीन सिर्फ दो हजार रुपए के किराए पर ली थी। इसका उपयोग यह लोग कर रहे थी। यहीं पर एक टपरी भी बना रखी थी। पुलिस ने मोबाइल, लैपटॉप और अन्य संसाधन जब्त कर मामले को जांच में लिया गया था।

प्रेस कॉन्फ्रेंस करने गए थे, पोत दी कालिख इस मामले को लेकर युवती निशिता गौर ने अपने साथी सौरभ बनर्जी के साथ गुरुवार 24 जुलाई को प्रेस कॉन्फ्रेंस करने इंदौर आए थे। प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू होने से पहले ही बजरंग दल के लोगों ने सौरभ और युवती के साथ मारपीट कर दी।
बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने मीडिया के सामने ही सौरभ और युवती को जान से मारने की धमकी भी दी। उन्होंने मीडिया से बात नहीं करने की चेतावनी दी। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान प्रेस क्लब के बाहर काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा था।
इस दौरान मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने उन्हें बचाया था। इसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस उन्हें सेंट्रल कोतवाली ले गई। तब सामने आया था कि सौरभ बनर्जी पत्रकार हैं। 2018 में फ्री प्रेस अखबार से निकलने के बाद ग्लोबल हेराल्ड में काम रहे थे।