मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन सरकार प्रशासनिक कसावट के लिए नए साल में 5 बड़े बदलाव करने जा रही है। कोरोना काल में शुरू किया गया 5-डे वीक समाप्त किया जा रहा है। अब सरकारी छुटि्टयों में कटौती के साथ क्षेत्रवार अवकाश प्रणाली को लागू किया जाएगा।
इसके साथ ही उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान सरकार की तरह सरकारी कर्मचारियों को इलाज के लिए आयुष्मान जैसी योजना लाने की तैयारी है। पेंशन भी केंद्रीय कर्मचारियों के समान मिलेगी। इतना ही नहीं, तीसरी संतान होने पर नौकरी पर रोक को हटाने पर विचार चल रहा है। इसके साथ ही विभागों में खाली पड़े पदों को भरने के लिए परीक्षा सिस्टम में बड़ा बदलाव किया गया है।

अब सिलसिलेवार जानिए इन बदलावों के बारे में…
1. मुख्यमंत्री आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना में कैश लेस इलाज क्या है मौजूदा सिस्टम: वर्तमान में राज्य के कर्मचारियों और पेंशनर्स को इलाज का खर्च पहले खुद उठाना पड़ता है, जिसका भुगतान सरकार बाद में केंद्रीय स्वास्थ्य योजना (CGHS) की दरों के अनुसार करती है। इस प्रणाली में अक्सर इलाज का पूरा खर्च कवर नहीं होता। उदाहरण के लिए, लिवर ट्रांसप्लांट पर लगभग 20 लाख रुपए का खर्च आता है। सरकार केवल 4 लाख रुपए की प्रतिपूर्ति करती है, वह भी कर्मचारी द्वारा बिल जमा करने के बाद।
प्रस्तावित योजना: ‘मुख्यमंत्री आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना’ के तहत प्रदेश के 15 लाख कर्मचारियों, पेंशनर्स और उनके परिवारों को कैश लेस इलाज की सुविधा मिलेगी। इस मॉडल में कर्मचारियों के वेतन से 3,000 से 12,000 रुपए तक का वार्षिक अंशदान लिया जाएगा, जबकि शेष राशि सरकार वहन करेगी।
अंशदान की अंतिम राशि अभी तय होनी है। इस योजना में सामान्य बीमारियों के लिए 5 लाख और गंभीर बीमारियों के लिए 10 लाख रुपए तक के कैश लेस इलाज का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त, कर्मचारी इलाज के बाद अपने विभाग से चिकित्सा रिफंड के लिए भी आवेदन कर सकेगा।

2. छुट्टियों में कटौती और क्षेत्रवार अवकाश प्रणाली सरकार नए साल से 5-डे वीक व्यवस्था खत्म करने और छुट्टियों के नियमों में बदलाव पर विचार कर रही है। इसके लिए गठित एक समिति ‘क्षेत्रवार अवकाश प्रणाली’ लागू करने की सिफारिश कर सकती है। इस प्रणाली के तहत, पूरे प्रदेश में एक समान अवकाश न होकर, जिलों को स्थानीय त्योहारों और परंपराओं के अनुसार छुट्टियां घोषित करने का अधिकार मिलेगा। समिति ऐच्छिक अवकाशों का भी पुन: निर्धारण करेगी।
वर्तमान में कर्मचारियों को 53 चिह्नित अवकाशों में से तीन ऐच्छिक छुट्टियां मिलती हैं। समिति इस बात का भी मूल्यांकन कर रही है कि कोरोना काल में शुरू हुई 5-डे वीक व्यवस्था को जारी रखा जाए या नहीं। एक रिपोर्ट के अनुसार, साल के 365 दिनों में से 197 दिन छुट्टियों में बीतते हैं, जिससे कर्मचारी औसतन केवल 168 दिन ही काम करते हैं। इस वजह से यह बदलाव प्रस्तावित है।

3. केंद्र के समान पेंशन नियम, बेटियों को मिलेगा फायदा मध्य प्रदेश सरकार पेंशन नियमों को केंद्र सरकार के नियमों के मुताबिक बना रही है। नए नियम के तहत, 25 साल से ज्यादा उम्र की अविवाहित, विधवा या परित्यक्ता बेटी भी परिवार पेंशन की पात्र होगी। वर्तमान में यह फायदा केवल 25 वर्ष तक की अविवाहित बेटी को ही मिलता है। यह प्रस्ताव केंद्र सरकार द्वारा 2011 में लागू की गई व्यवस्था पर आधारित है।
इसे परीक्षण के लिए सामान्य प्रशासन विभाग को भेजा गया है। कर्मचारी आयोग भी पहले इसकी अनुशंसा कर चुका है। सेवानिवृत्त आईएएस जीपी सिंघल की अध्यक्षता वाले आयोग की रिपोर्ट पर वित्त विभाग सैद्धांतिक सहमति दे चुका है और अब यह प्रस्ताव अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया में है

4. सरकारी नौकरी में दो बच्चों की शर्त खत्म होगी सरकार लगभग 24 साल पुराने उस नियम को खत्म करने की तैयारी में है, जिसके तहत दो से अधिक संतान वाले व्यक्ति सरकारी नौकरी के लिए अपात्र माने जाते हैं। इस संशोधन के बाद तीन संतान वाले उम्मीदवार भी नियुक्ति के पात्र होंगे। 26 जनवरी 2001 से लागू इस नियम में संशोधन का प्रस्ताव कैबिनेट में पेश किया जाएगा। मध्य प्रदेश से पहले छत्तीसगढ़ और राजस्थान भी यह शर्त हटा चुके हैं।
शर्त समाप्त होने के बाद तीसरी संतान से जुड़े जितने भी केस न्यायालयों या विभागीय जांचों में लंबित हैं, उन्हें स्वतः समाप्त मान लिया जाएगा। इन पर अब कोई कार्रवाई नहीं होगी। हालांकि, वर्ष 2001 के बाद जिन शासकीय सेवकों पर तीसरी संतान के आधार पर कार्रवाई हो चुकी है या वे नौकरी से बाहर किए जा चुके हैं, उन मामलों पर कोई सुनवाई नहीं होगी।
इस फैसले से मेडिकल एजुकेशन, हेल्थ, स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े कर्मचारियों को राहत मिलेगी।

5. भर्ती प्रक्रिया में बड़ा सुधार, अब होगी संयुक्त परीक्षा भर्ती प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए सरकार MPPSC और ESB के लिए ‘संयुक्त भर्ती परीक्षा नियम-2025’ लाई है। इसके तहत समान योग्यता वाले विभिन्न पदों के लिए एक ही संयुक्त परीक्षा आयोजित की जाएगी। इससे उम्मीदवारों को अलग-अलग परीक्षाओं के लिए बार-बार आवेदन नहीं करना पड़ेगा, जिससे उनके समय और धन दोनों की बचत होगी।
एक कैलेंडर ईयर में एमपीपीएससी सिर्फ 5 और कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) सिर्फ एक बड़ी परीक्षा कराएगा। शासन स्तर पर ड्राफ्ट लगभग तैयार हो गया है। दिवाली के बाद 23-24 अक्टूबर को मुख्य सचिव स्तर की वरिष्ठ सचिव समिति के सामने इसका प्रेजेंटेशन हो सकता है। फिर ड्राफ्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा।
