शहडोल में दीपावली का खूनी तांडव: तलवार-रॉड और बंदूक लेकर 22 हमलावरों ने 45 मिनट तक तीन भाइयों पर बरपाया कहर, बोले—‘तीन लाशें गिराना है’; दो की मौत, एक गंभीर, मुख्य आरोपी समेत सात गिरफ्तार

शहडोल में दीपावली के दूसरे दिन 21 अक्टूबर को 22 से ज्यादा हमलावरों ने तीन भाइयों को बेरहमी से मारा। तीनों के हाथ, पैर और पीठ में मल्टीपल फ्रैक्चर हुए। हमलावर हाथ में बंदूक, पिस्टल, तलवार, लोहे की रॉड लेकर करीब 45 मिनट तक तांडव मचाते रहे। कोई बचाने नहीं आए और न वे भाग सके, इसके लिए सड़क के दोनों ओर गाड़ियां लगा दीं। घायलों को अस्पताल ले जाते समय भी रास्ता रोक लिया था

सोनू उर्फ राकेश तिवारी (40) और राहुल तिवारी (42) अपनी ऑटो पार्ट्स की दुकान में दीया जलाने पहुंचे थे, तभी हमलावर पहुंचे। सभी ने दुकान में दीया जला रहे भाइयों पर हमला कर दिया। जानकारी लगते ही राकेश का बड़ा भाई सतीश (45) भी मौके पर पहुंचा। आरोपियों ने उसे भी मारा। गांव वाले बचाने आए, तो कहा कि तीन लाशें गिराना है, दो और गिरा देंगे, तो फर्क नहीं पड़ेगा। यह सुनकर किसी की हिम्मत नहीं हुई।

स्थानीय लोग खून से लथपथ घायलों को अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टर ने राकेश को मृत घोषित कर दिया। छोटे भाई राहुल की इलाज के दौरान मौत हो गई। तीसरा सतीश तिवारी शहडोल मेडिकल अस्पताल में भर्ती है। पुलिस ने मुख्य आरोपी अनुराग शर्मा समेत नयन पाठक, नीलेश कुशवाहा, धनेश शर्मा, सचिन शर्मा, अखिलेश यादव, अंकित राय को गिरफ्तार कर लिया है।

 जिला मुख्यालय से करीब 43 किलोमीटर दूर बलबहरा गांव पहुंची। वारदात के बाद गांव में दहशत है। कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं।

आरोपी लाठी-डंडे लेकर दोनों भाइयों पर टूट पड़े थे। इसका वीडियो शुक्रवार को सामने आया था।

बाइक गिरी पड़ी थीं, खून से सनी थी सड़क जिला मुख्यालय से केशवाही रोड पर बलबहरा गांव के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की रोड जाती है। करीब तीन किलोमीटर अंदर सड़क से लगा गांव है। गांव में अंदर घुसते ही सन्नाटा था। यहां एक शख्स से घटनास्थल के बारे में पूछा। पहले तो वह सकपकाया। जब परिचय दिया, तो पता बता दिया। आगे बढ़ने पर गांव के बीचोंबीच सड़क किनारे करीब 100 से ज्यादा लोग खड़े थे। यहां मौजूद एक शख्स से पूछा, तो उसने बता दिया कि यही वह जगह है, जहां हमला किया गया।

पुलिस ने चारों तरफ से एरिया को सील कर दिया था। तीन बाइक जमीन पर गिरी पड़ी थीं। राकेश ऑटोपार्ट्स की दुकान चलाता था। इसी दुकान की आधी शीट कटी हुई थी। सड़क पर मिट्‌टी खून से सनी थी। चाराें तरफ खून बिखरा था। सामान भी बिखरा पड़ा था। खून के छींटे टीन शेड पर और बर्तनों पर थे। इसी दुकान से लगा नया मकान है। इसे कुछ दिन पहले ही नया बनवाया है। फिलहाल यहां कोई नहीं रहता। दुकानों को किराए से देने की तैयारी थी। मुख्य घर गांव के अंदर बस्ती में है।

इस घर में चारों भाई, इनमें सबसे बड़ा सतीश, दूसरा राकेश, तीसरा मुकेश और सबसे छोटा राहुल परिवार के साथ रहते हैं। राहुल की शादी नहीं हुई है। पिता किसान हैं।

आरोपियों ने इसी जगह पर हमला किया था। बाइक में तोड़फोड़ भी की थी।

आरोपी कह रहे थे- इतना मारो कि अपंग हो जाएं मेडिकल अस्पताल के आईसीयू में भर्ती बड़े भाई सतीश तिवारी की हालत गंभीर है। उनके दोनों हाथ-पैर में मल्टीपल फ्रैक्चर हैं। शरीर में अन्य जगह भी चोटें हैं। चचेरे भाई श्रेयस तिवारी ने भास्कर को बताया कि हमले के वक्त मैं करीब 20 किलोमीटर दूर बुढ़ार में था। सूचना मिलते ही गांव की ओर भागा, तब तक सब खत्म हो चुका था।

वहां मौजूद गांव वालों ने मुझे बताया कि करीब 22 से ज्यादा हमलावर एक स्कॉर्पियो और 10 से ज्यादा बाइक से आए थे। इनमें आधे लोगों ने चेहरे पर नकाब पहने हुआ था। सभी के हाथ में लोहे की रॉड, डंडा, तलवार, फरसा और पिस्टल थी। अचानक हमला हुआ, तो भाई जान बचाने में जुट गए।

एक गेट के अंदर घर की तरफ भागा, तो दूसरे ने ऑटो दुकान में छिपने की कोशिश की। हमलावरों के सिर पर खून सवार था। वे इतने उग्र थे कि टीन शेड को फरसे और तलवार से काट दिया। भाइयों को दुकान के अंदर से घसीटकर लेकर आए। बाहर अधमरा होने तक मारा।

घायल अवस्था में भी बचने के लिए भागने की कोशिश की, लेकिन हमलावरों ने दुकान और रास्ते को घेर लिया था। तीनों भाई चीखते रहे, छोड़ने के लिए गुहार लगाते रहे, लेकिन आरोपी लगातार वार करते रहे। सबसे ज्यादा वार हाथ और पैर में किए। इसके अलावा, छाती और पीठ पर भी वार किए।

पीटते हुए अनुराग शर्मा कह रहा था कि इन्हें इतना मारो कि अपंग हो जाएं। कभी बिस्तर से नहीं उठ सकें। इसके बाद भी दोबारा दिखें, तो जान से मार देंगे। दुकान के बाहर खड़ी बाइक में भी तोड़फोड़ की

मारने के बाद अस्पताल भी नहीं ले जाने दे रहे थे श्रेयस तिवारी ने बताया कि हमले के बाद आरोपी गांव से भागे नहीं। वे गांव में ही रहकर नजर बनाए थे। जब हम लोग खून से लथपथ भाइयों को अस्पताल ले जाने बलबहरा से बुढ़ार की ओर जाने का लगे, तो अनुराग शर्मा ने रास्ता रोक लिया। हम लोगों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस भी नहीं पहुंची, जिस कारण रास्ते से लौटना पड़ा।

बाद में जब केशवाही पुलिस आई, तो वह भी गिरवा होकर बुढ़ार ले गई, जबकि यह रास्ता लंबा था। हम भाई को लेकर बुढ़ार थाने पहुंचे। यहां से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर गए। डॉक्टरों ने मेडिकल अस्पताल रेफर किया गया। अस्पताल ले जाते समय भाई ने रास्ते में दम तोड़ दिया। उस वक्त इतना खून ज्यादा बहा कि दुकान के सामने की मिट्टी आज भी लाल है।

‘तीन लाशें गिराना है, दो और गिर जाएंगी’ तीसरे नंबर के भाई मुकेश तिवारी बिलासपुर में रेलवे में नौकरी करते हैं। रुंधे गले से वह बताते हैं कि फिलहाल कोई विवाद नहीं हुआ था। हमलावरों ने करीब 45 मिनट तक बेरहमी से मारा कि एक किलोमीटर तक चीख पुकार की आवाज जा रही थी। हमलावरों ने दुकान के दोनों ओर मुख्य मार्ग को जाम कर दिया था। कुछ गांव वालों ने बचाने के लिए हिम्मत जुटाई, लेकिन आरोपियों ने कहा कि हमको तीन लाश गिराना है, पांच भी गिर जाएं, तो फर्क नहीं पड़ेगा। इतना सुनते ही ग्रामीण भी पीछे हट गए।

तीसरा भाई सतीश तिवारी गंभीर अवस्था में शहडोल मेडिकल अस्पताल के आईसीयू में भर्ती है।

मौत से पहले वीडियो- हमारे हाथ पैर तोड़ दिए हमले के बाद आरोपी वापस अपने फार्म हाउस की तरफ गए, तो गांव के लोग दुकान की तरफ भागे। देखा कि तीनों खून से लथपथ पड़े थे। राहुल की मौके पर ही मौत हो गई, तो दूसरा बेसुध पड़ा था। खून से लथपथ अवस्था में राकेश ने आखिरी वीडियो बनवाया। उसने कहा- ‘मैं और मेरा भाई दुकान में बैठे थे। इतने में अनुराग शर्मा, नीलेश कुशवाहा, नयन पाठक, सचिन शर्मा जो कि अमलाई का है। अनुराग शर्मा हाथ में तलवार और बंदूक लेकर आया। नीलेश कुशवाहा के हाथ में तलवार थी। सचिन ने फरसे से मेरे और भाई को मार दिया। बचने के लिए हम दुकान में घुस गए।

उन्होंने फरसा और तलवार से वार करते हुए दुकान का गेट तोड़ दिया। उसमें रखे 10 हजार रुपए लूट लिए। हमारे हाथ-पैर तोड़ दिए। टंगिया, लाठी और तलवार से वार किए। बोले कि अगली बार तुमको जान से मार देंगे। नयन पाठक बंदूक रखा था। यह मेरा बयान है, इसे स्वीकार किया जाए। अनुराग शर्मा जो कि आदतन अपराधी है।’

इतना कहकर राकेश बेसुध हो गया। मेडिकल अस्पताल जाने से पहले उसकी मौत हो गई।

हमले के बाद घायल अवस्था में राकेश तिवारी ने वीडियो मैसेज रिकॉर्ड करवाया था।

एक सप्ताह पहले प्लानिंग, सुबह पिता से मिला था आरोपी एसपी रामजी श्रीवास्तव ने बताया कि मुख्य आरोपी अनुराग शर्मा ने हमले की तैयारी एक सप्ताह पहले से की थी। दीपावली के दूसरे दिन पड़वा को इसलिए चुना, क्योंकि इस दिन गांव में सन्नाटा रहता है। ज्यादातर लोग घर में रहते हैं या फिर पार्टी मनाने चले जाते हैं। अनुराग इसी दिन सुबह सुबह राकेश के पिता पुरुषोत्तम दास तिवारी से भी मिला था। उसने 50 हजार रुपए मांगे। पिता ने पैसे नहीं दिए, जिससे वह नाराज हो गया।

उसी दिन गांव के साथियों के अलावा ओपीएम, गिरवा और अमलाई से करीब 22 से ज्यादा लोगों को बुलाया। नयन पाठक को दुकान की रेकी के लिए लगाया। अनुराग शर्मा और अन्य साथी घटनास्थल से करीब एक किलोमीटर दूर एक फार्म हाउस पर बैठकर इंतजार कर रहे थे। जैसे ही, नयन पाठक ने बताया कि तीनों भाई दुकान आ गए हैं। हमलावर पहिया वाहन और 10 से ज्यादा बाइक से पहुंच गए।

प्लानिंग इतनी सटीक कि कोई बचा भी नहीं सका एसपी ने बताया कि हमले की तैयारी इतनी सटीक थी कि गांव और परिवार का कोई भी शख्स बचाने तक नहीं पहुंच सका। आरोपियों ने दुकान के दोनों ओर मुख्य मार्ग पर बाइक और चार पहिया वाहन लगाकर रास्ता बंद कर दिया था। इसके बाद तीनों भाइयों पर हवाई फायरिंग करते हुए हमला किया।

चीख पुकार सुनकर आसपास रहने वाले लोग और दुकान के पास मौजूद लोग बचाने दौड़े। डर के मारे और रास्ता बंद होने के कारण वे कुछ कर नहीं सके। आरोपियों ने भी उन्हें धमकाया। मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। अन्य की तलाश कर रहे हैं। केशवाही चौकी प्रभारी आशीष झारिया को लाइन हाजिर कर दिया गया है।

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