तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में प्रस्तावित ममलेश्वर लोक को लेकर चल रहे व्यापक विरोध के बाद आखिरकार ममलेश्वर लोक प्रोजेक्ट को निरस्त कर दिया गया है। खबर सामने आने के बाद लोग आतिशबाजी कर जश्न मना रहे हैं।
शहर में हालात ऐसे हैं कि श्रद्वालुओं को ऑटो-रिक्शा तक नहीं मिल रहा है। पैदल दूरी तय कर रहे हैं।
बता दें कि दैनिक भास्कर ने प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे साधु-संतों और स्थानीय लोगों से बात कर उनकी परेशानी को समझा और उनकी बात आगे पहुंचाई। इसी के बाद प्रोजेक्ट निरस्त करने का फैसला हुआ।
अपर कलेक्टर काशीराम बडौले ने बताया कि ममलेश्वर लोक का सर्वे चल रहा था। इसमें बड़े स्तर पर लोगों के साथ ही कुछ आश्रमों का भी विस्थापन होने वाला था। बहुत से लोगों की रोजी-रोटी भी प्रभावित हो रही थी।
संत समाज ने भी इसे लेकर नाराजगी जाहिर की थी। लोग भी लोक नहीं बनने के फेवर में थे। संत समाज और जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए शासन-प्रशासन ने यह फैसला लियाकि अभी ममलेश्वर लोक के निर्माण को निरस्त किया जाता है। अपर कलेक्टर के मुताबिक-
भविष्य में यदि कोई निर्माण होता है तो संत समाज के साथ ही सभी से विमर्श किया जाएगा। संतों ने भी कुछ सुझाव दिए हैं। अच्छे सुझाव हैं। अन्य के भी सुझाव लेकर भविष्य में ममलेश्वर लोक निर्माण पर विचार होगा।

दो दिन से ओंकारेश्वर बंद, लोगों ने विरोध जताया ममलेश्वर लोक की लागत 120 करोड़ रुपए थी, सिंहस्थ के पहले इसे बनकर तैयार होना था। इसके विरोध ओंकारेश्वर दो दिन से बंद है। लोग अपनी दुकानें, टैक्सी-ऑटो बंद कर प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे थे।
हालत ये है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को पानी, चाय-नाश्ता तक नहीं मिल रहा है। यहां पहुंचे श्रद्धालुओं का कहना है कि नर्मदा नदी का जल पीकर प्यास बुझा रहे हैं। 7 किलोमीटर दूर जाकर दोगुना किराया देकर नाइट स्टे करना पड़ रहा है।
प्रशासन का दावा है कि श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था की जा रही है। लेकिन श्रद्धालुओं के मुताबिक, दो दिन से प्रशासन की तरफ से कोई मदद नहीं पहुंचाई गई।
दरअसल, ओंकारेश्वर के रहवासी यहां प्रस्तावित ममलेश्वर लोक का विरोध कर रहे हैं। नगर की आधी आबादी पर विस्थापन का खतरा मंडरा रहा है। इसी के विरोध में ओंकारेश्वर के लोगों ने तीन दिन का बंद रखा है। प्रोजेक्ट निरस्त होने के फैसले के बाद उम्मीद है कि बुधवार से दुकानें खुलेंगी।
देखिए ओंकारेश्वर की तीन तस्वीरें…

सोमवार रात को शहर में लॉकडाउन जैसे हालात दिखे, लोग होटल तलाशते नजर आए।

मंगलवार सुबह भी लोग पैदल परेशान होते नजर आए। यहां कोई साधन नहीं मिल रहा है।

अब जानिए प्रोजेक्ट निरस्त होने से पहले के ओंकारेश्वर के हालात
7 किमी दूर दोगुना किराया देकर रुके श्रद्धालु तीर्थनगरी आने वाले बाहरी पर्यटक जब सोमवार शाम को ओंकारेश्वर पहुंचे तो उन्हें यहां बंद का असर दिखाई दिया। वे लोग मंगलवार सुबह नर्मदा स्नान करके ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करना चाहते थे। ऐसे में बाहरी श्रद्धालु तीर्थनगरी छोड़कर करीब 7 किलोमीटर रिटर्न हुए और कोठी गांव के होटलों में उन्होंने नाइट स्टे किया। जहां उन्हें दोगुना किराया तक चुकाना पड़ गया।
होटल मालिक बोले- पहली बार सारे कमरे फुल कोठी गांव में होटल संचालित करने वाले विजय जैन ने बताया, ओंकारेश्वर में बंद के चलते श्रद्धालुओं की तादाद कोठी गांव के होटलों में देखी गई है। यहां गणेश नगर से लेकर कोठी तक 60 से ज्यादा होटल हैं।
पहली बार ऐसा हुआ कि सभी होटलों में सारे कमरे फुल हैं। सामान्य दिनों में 30% कमरे ही बुक रहते हैं। होटल वालों ने एक हजार रुपए की बजाय दो हजार से लेकर 2500 रुपए तक वसूले हैं।

बच्चे भूखे रहे, नर्मदा जी के जल से प्यास बुझाई’ इंदौर से आए श्रद्धालु जय अहिरवार ने बताया- सोमवार को दोपहर के समय परिवार के साथ ओंकारेश्वर पहुंचे थे। बस स्टैंड पर उतरने के बाद कोई ऑटो या रिक्शा नहीं मिला। वहां से पैदल चलकर ब्रह्मपुरी घाट पहुंचे।
एक बोतल पानी लेकर साथ चल रहे थे, वो रास्ते में ही खत्म हो गया। ओंकारेश्वर में कोई भी दुकान खुली नहीं मिली। बच्चे को भूख लगी, लेकिन कुछ खाने-पीने को नहीं मिला। बहुत परेशानी का सामना करना पड़ा। हमने तो नर्मदा जी का पानी पीकर प्यास बुझाई है।
‘बस्ती उजाड़कर धार्मिकता खत्म कर रही सरकार’ स्थानीय निवासी देविशा वर्मा ने कहा- ओंकारेश्वर को पर्यटन स्थल बनाएंगे तो यहां की धार्मिकता तो खत्म हो जाएगी। सेल्फी पॉइंट बनाकर सरकार श्रद्धालुओं को मनोरंजन के साधन उपलब्ध करा रही है। तीर्थनगरी का महत्व ही क्या रह जाएगा। यहां पर बहुत सारी खाली जगह है। सरकार इस बस्ती को क्यों उजाड़ना चाहती है।
हमारे दादा-दादी, हमारे पूर्वजों ने झोपड़ी में जीवनयापन किया है। हमने माता-पिता को भी मेहनत करते देखा है। पहले तो यहां झुग्गी झोपड़ियां थीं। अब थोड़े दिनों बाद हमारे अच्छे दिन आए और 8-10 साल पहले ही पक्के मकान बने हैं।
अब परिवार के लोग बच्चों की बेहतर शिक्षा पर देने लगे थे कि सरकार की नजर हमारे पर पड़ गई। ये कौन सी बात हुई कि अब हमारे घर तोड़कर कॉरिडोर बनाया जाएगा। ये तो बहुत ही गलत बात है।

महंत मंगलदास बोले- हर हाल में आश्रमों को टूटने नहीं देंगे ओंकारेश्वर के जोड़ गणपति मंदिर के महंत मंगल दास महाराज ने कहा- अगर सरकार अपने प्रोजेक्ट को दूसरी जगह स्थानांतरित नहीं करती है तो यहां की पब्लिक तो ठीक ही है, बाहर के महात्मा भी आकर यहां के आश्रमों को नहीं टूटने देंगे। ऐसा न हो कि संत-महात्मा इकट्ठे हो जाएं और ओंकारेश्वर में बवंडर मच जाए।
मंगलदास महाराज ने बताया कि उन्होंने विधायक के साथ मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी। हमने मोहन यादव से कहा कि एक ही जगह सारी पब्लिक को क्यों इकट्ठा कर रहे हो।
उन्होंने निजी सचिव को फोन कर कहा कि यह मामला मेरे संज्ञान में लेकर आओ। फिर उन्होंने हमें सुझाव दिया कि जैसे उज्जैन में बूढ़े महाकाल और नए महाकाल मंदिर बनाए हैं, उसी तर्ज पर ममलेश्वर मंदिर और दूसरी जगह ममलेश्वर लोक बनाने की बात कही थी।

भाजपा विधायक बोले- लोगों की मांग जायज है मांधाता से बीजेपी विधायक नारायण पटेल ने कहा- ब्रह्मपुरी क्षेत्र में 100 साल से लोग बसे हुए हैं। उनकी मांग जायज है। मांगों को संज्ञान में लेकर सरकार निर्णय करेगी। मैं 10 नवंबर को इस मामले में मुख्यमंत्री से मिला था। उन्हें बताया कि 100 साल से बसे लोग हैं। छोटे तबके के हैं और सभी लोग फूल-पत्ती बेचने वाले हैं। सीएम ने पर्यटन विभाग के प्रमुख सचिव से बात की थी।
‘अभी तक सरकार की गाइडलाइन स्पष्ट नहीं’ विधायक ने कहा- हालांकि सीएम उस समय बिहार चुनाव में व्यस्त थे। उनकी तरफ से कहा गया था कि विस्थापन को लेकर विचार किया जाएगा। लेकिन सरकार की तरफ से अभी खुलासा नहीं हुआ कि वे किस गाइडलाइन के हिसाब से चलेंगे।

कांग्रेस जिलाध्यक्ष बोले- सरकार लोक के पक्ष में खड़ी कांग्रेस जिलाध्यक्ष उत्तम पाल सिंह पुरनी ने कहा- पूरा ओंकारेश्वर बंद है। यहां लाखों लोग आते हैं। जनता ने 3 दिन के लिए कारोबार बंद रखा है। इससे समझा जा सकता है कि जनता कितनी प्रताड़ित है। ऐसे समय में सरकार साथ नहीं है। वो सिर्फ ममलेश्वर लोक के पक्ष में है। कांग्रेस ओंकारेश्वर के लोगों के साथ है। हम उनके निर्णय के साथ मजबूती से रहेंगे।

एमपी के 20 लोक, 2 पूरे, 7 पर काम शुरू नहीं मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले महाकाल लोक की तर्ज पर अलग-अलग धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों पर 20 लोक बनाने का ऐलान किया गया था। इनमें 14 लोक धार्मिक तो चार सांस्कृतिक आधार के हैं। सभी लोक के निर्माण का जिम्मा मप्र पर्यटन विभाग को सौंपा गया है।
7 लोक का निर्माण अब तक शुरू नहीं हुआ है। 13 लोक के निर्माण का काम चल रहा है। इनमें 3 लोक का काम 10 से 30 फीसदी तक हुआ है। वहीं, 6 लोक ऐसे हैं जहां 40 से 60 फीसदी तक काम हुआ है
