“इंदौर का खतरनाक भेरूघाट बदलेगा रूप: 35 मीटर ऊंचा–400 मीटर लंबा वायडक्ट और 3 टनल तैयार, मई–जून 2026 से बिना ढलान वाला सुरक्षित रूट; 20% काम शेष”

इंदौर-खंडवा रोड पर सिमरोल के आगे भेरूघाट को पूरी तरह से खत्म किया जा रहा है। इसे खत्म करने के लिए नर्मदा नदी से भी ऊंचा वायडक्ट और टनल बनाई जा रही है। हादसों की संभावना को जीरो करने के लिए वायडक्ट को विशेष डिजाइन किया गया है। इसके साथ ही तीन टनल भी बनाई जा रही हैं, ताकि हादसे की संभावना न के बराबर हो।

इस प्रोजेक्ट को पूरा करने वाली कंपनी मेघा इंजीनियरिंग के डीपीएम चंदन पटेल ने बताया कि भेरूघाट के घुमावदार घाट की ढलान को खत्म करने के लिए 35 मीटर ऊंचा और 400 मीटर लंबा वायडक्ट बन रहा है, वहीं इतने लंबे वायडक्ट पर गाड़ी बेकाबू न हो, इसके लिए गणपति घाट के हादसों से सबक लेते हुए इसकी ढलान को भी खत्म किया गया है।

भेरूघाट पर बन रही टनल।

भेरूघाट सेक्शन पर बन चल रहा निर्माण कार्य लगभग 80 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है। यहां पर अब 15 से 20 प्रतिशत फिनिशिंग वर्क ही बचा है, जो मार्च-अप्रैल तक पूरा कर लिया जाएगा, जिसके बाद यहां पर मई-जून 2026 से ट्रैफिक शुरू कर दिया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, वायडक्ट पर 160 गर्डर की लॉन्चिंग पूरी हो चुकी है।

कुल 450 मीटर के वायडक्ट में 30 मीटर का एक-एक स्पान है। 80 से 100 टन के प्रत्येक गर्डर को 2 क्रेन की मदद से खाई में 30 मीटर ऊपर तक उठ रहे दो पियर के बीच रखा गया। यह पूरी प्रक्रिया मार्च में शुरू हुई और अक्टूबर के आखिरी सप्ताह तक पूरी कर ली गई थी।

टनल और डक्ट के बीच में 3.5 ग्रेडियन का इस्तेमाल

भेरूघाट पर बनाया जा रहा वायडक्ट।

इंदौर-खंडवा रोड पर सबसे खतरनाक भेरूघाट ही है। यहां पर वायडक्ट तलाई नाके से शुरू होगी और पहली टनल के पास खत्म होगी। कॉन्ट्रैक्ट कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि यहां पर दुर्घटना न हो इसके लिए टनल और डक्ट के बीच में 3.5 ग्रेडियन (कम ढलान) का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसे ऐसे समझ सकते हैं कि गणपति घाट पर 5.5 (अधिक ढलान) से ज्यादा ग्रेडियन है। उस कारण वाहन तेजी से उतरते हैं और ब्रेक नहीं लगने के कारण हादसे का शिकार हो जाते हैं। यहां पर ग्रेडियन कम रखा जा रहा है, इससे यहां पर गणपति घाट जैसे हादसे नहीं होंगे।

इस साल पांच से ज्यादा हादसे, 20 से ज्यादा मौत इंदौर-खंडवा रोड पर भेरूघाट सेक्शन पर रोजाना छोटे-बड़े हादसे होते रहे हैं। इंदौर डीएसपी उमाकांत चौधरी ने बताया कि जब तक नया रूट तैयार होकर शुरू नहीं हो जाता है, तब तक भेरूघाट पर होने वाले हादसों को रोकने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। घाट सेक्शन पर महीने में लगभग 3 से 4 हादसे होते रहते हैं। पहले इनकी संख्या ज्यादा थी, लेकिन पुलिस के प्रयासों से इन्हें कम किया जा रहा है। वहीं पुलिस सूत्रों के अनुसार भेरूघाट पर इस साल पांच से ज्यादा हादसों में 20 से ज्यादा लोग जान गंवा चुके हैं, जबकि 60 से अधिक घायल हुए हैं।

उलटी दिशा में चलना होता है, इसलिए होते हैं हादसे मप्र में इंदौर का भेरूघाट इकलौता ऐसा घाट है, जहां पर गाड़ियों को उलटी दिशा में चलना होता है, अगर आप घाट उतरना चाहते हैं तो आपको अपनी लेन बदलकर सीधे हाथ की तरफ वाली लेन पर जाना होता है, वहीं घाट चढ़ने के दौरान भी ऐसा ही करना होता है। यहां घाट पर ढलान ज्यादा है, जिससे वाहन तेज गति से नीचे उतरते हैं और ब्रेक नहीं लगने के कारण या तो सामने वाले वाहन से टकरा जाते हैं या खाई में गिर जाते हैं।

भेरूघाट सेक्शन में बन रही तीन टनल

इस सेक्शन में तीन टनल बनाई गई है। पहली टनल सिमरोल के बाद और भेरूघाट के पहले शुरू होगी जो कि 300 मीटर लंबी है। इस टनल के बाद ही वायडक्ट बनाया गया है, जिससे घाट पूरी तरह से खत्म हो जाएगा।

वहीं दूसरी टनल बाइग्राम में शनि मंदिर के पीछे से बन रही है। जो 480 मीटर लंबी है। इस टनल के बाद ही तीसरी टनल बनाई जा रही है, जो 550 मीटर लंबी है। इस सेक्शन में तीसरी टनल सबसे ज्यादा लंबाई की है। कुल मिलाकर वाहनों को 1350 मीटर, यानी सवा किमी से अधिक की दूरी टनल से गुजर कर करना होगी।

भेरूघाट पर बनाई जा रही टनल।

प्रोजेक्ट भारत माला परियोजना का फेज-1 इस प्रोजेक्ट का नाम भारत माला परियोजना फेज-1 प्रोजेक्ट है। यह केंद्र सरकार का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। भारत माला परियोजना के फेज-1 में 35 हजार किलोमीटर का नेशनल हाईवे बनाने का लक्ष्‍य सरकार ने रखा है।

परियोजना के 34,800 किलोमीटर के प्रोजेक्‍ट में से सबसे ज्‍यादा हिस्‍सा मध्‍य प्रदेश का है। यहां अभी तक 3,176 किलोमीटर सड़क बन रही है। इसमें इंदौर-एदलाबाद नेशनल हाईवे भी शामिल है। 9 साल से इसके निर्माण की कोशिश चल रही थी।

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