सॉरी मम्मी, आपका इतनी बार दिल तोड़ा। अब आखिरी बार तोड़ूंगा। स्कूल के टीचर्स अब हैं ही ऐसे, क्या बोलूं। युक्ति मैम, पाल मैम, मनु कालरा, मेरी आखिरी इच्छा है कि इनके ऊपर एक्शन हो। मैं नहीं चाहता कि कोई और बच्चा मेरी तरह कुछ करे।’
ये शौर्य पाटिल के डेढ़ पेज के सुसाइड नोट का एक हिस्सा है। दिल्ली के मशहूर सेंट कोलंबस स्कूल में 10वीं में पढ़ने वाला शौर्य 18 नवंबर की दोपहर स्कूल से निकलकर राजेंद्र प्लेस मेट्रो स्टेशन पहुंचा। वहां करीब ढाई बजे स्टेशन से नीचे कूद गया।
आसपास के लोग शौर्य को हॉस्पिटल ले गए, लेकिन वो नहीं बच पाया। सुसाइड नोट में उसने अपने टीचर्स पर परेशान करने का आरोप लगाया है। बॉलीवुड स्टार शाहरुख खान भी सेंट कोलंबस स्कूल में पढ़े थे, शौर्य भी उनकी तरह बनना चाहता था।

नवंबर में 4 बच्चों ने सुसाइड किया शौर्य ने जिन टीचर्स पर आरोप लगाए, उन्हें सस्पेंड कर दिया गया है। उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई है। सरकार ने मामले की जांच के लिए कमेटी बना दी है। पेरेंट्स स्कूल के बाहर प्रोटेस्ट कर रहे हैं। शौर्य की तरह ही एक नवंबर को जयपुर की चौथी क्लास की अमायरा और 16 नवंबर को रीवा में 11वीं की एक स्टूडेंट ने खुदकुशी कर ली थी।
महाराष्ट्र के जालना में 21 नवंबर को 13 साल की स्टूडेंट ने अपने ही स्कूल की बिल्डिंग की छत से कूदकर जान दे दी। इन मामलों में भी टीचर्स पर परेशान करने या मदद न करने के आरोप लगे।
हमने से समझा कि स्कूल के बच्चे क्यों सुसाइड कर रहे हैं और इसे कैसे रोका जा सकता है। शौर्य क्यों परेशान था, इस पर हमने उनके पिता और साथ पढ़ने वाले दोस्तों से बात की। पढ़िए शौर्य के पिता की आपबीती…

‘टीचर बच्चे को टीसी देने की धमकी देते थे’ शौर्य के पिता प्रदीप पाटिल दिल्ली के करोलबाग में गोल्ड का कारोबार करते हैं। महाराष्ट्र के सांगली जिले के रहने वाले हैं, लेकिन 20 साल से दिल्ली के राजिंदर नगर में रह रहे हैं। 18 नवंबर की दोपहर करीब पौने तीन बजे प्रदीप के पास फोन आया।
फोन करने वाले ने बताया कि उनका बेटा गिर गया है। बेहोश हो गया है, इसलिए उसे एक प्राइवेट अस्पताल ले गए हैं। प्रदीप हॉस्पिटल पहुंचे तो पता चला कि शौर्य अब दुनिया में नहीं है।
इसके बाद प्रदीप को सुसाइड नोट और शौर्य के परेशान होने का पता चला। वे कहते हैं, ‘टीचर उससे कहते थे कि उसे टीसी (ट्रांसफर सर्टिफिकेट) दे देंगे। एक बच्चा, जिसका 10 दिन बाद प्री-बोर्ड का एग्जाम था, उसे बार-बार ऐसे टॉर्चर किया जा रहा था। मैं चाहता हूं बेटे की आखिरी इच्छा पूरी हो और दोषी टीचर्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।’
प्रदीप आगे कहते हैं, ‘4-5 महीने पहले टीचर्स ने मुझे बुलाकर कहा था कि आपका बच्चा शरारती है। चुटकुले सुनाता है, मिमिक्री करता है। मैंने कहा कि बच्चा है, मिमिक्री नहीं करेगा, शरारत नहीं करेगा तो क्या करेगा। तब टीचर ने कहा कि उसके मार्क्स कम हैं। मैंने उस पर मार्क्स का प्रेशर कभी दिया ही नहीं।’

‘17 नवंबर को वो पूरे दिन मेरे साथ था। मेरी छुट्टी थी। उसने मेरे लिए मिल्क शेक आइसक्रीम मंगवाई थी। हम हंसी-मजाक करते रहे। मैंने उससे कहा था कि तेरी हाइट इतनी हो गई कि पहले तेरी शादी करनी पड़ेगी। अगले दिन वो स्कूल जा रहा था, तो मम्मी से बोलकर गया कि खाना मत बनाना, आज बाहर से मंगवाएंगे।’
‘शौर्य ने कहा था वो सुसाइड कर लेगा’ उस दिन स्कूल में क्या हुआ था? प्रदीप बताते हैं, ‘शौर्य स्कूल में गिर गया था। टीचर ने कहा कि वो नाटक कर रहा है। शौर्य बोला कि नहीं, वो नाटक नहीं कर रहा है। फिर वो रोने लगा। इस पर टीचर ने कहा कि उन्हें इससे फर्क नहीं पड़ता। ये सब हेड मिस्ट्रेस के सामने हुआ। शौर्य के दोस्तों ने मुझे बताया कि उसने टीचर को बोला भी कि उसे सुसाइड जैसी फीलिंग आ रही है, आप इतना टार्चर कर रहे हैं।’
प्रदीप कुछ देर के लिए चुप हो जाते हैं, फिर कहते हैं, ‘टीचर को मुझे बुलाना चाहिए था। या ड्राइवर को बुला लेते। हमें बताना चाहिए था कि बच्चा ऐसा बोल रहा है। उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया। किसी टीचर ने कॉल नहीं किया।’
‘घटना के बाद भी स्कूल की तरफ से कॉल नहीं आया। 19 तारीख को शाम 4 बजे प्रिंसिपल का फोन आया। मुझसे पूछा कि आप क्या चाहते हैं, हम आपकी पूरी मदद करेंगे। मैंने उनसे पूछा कि क्या आप मेरे बेटे को लौटा सकते हो।

क्लासमेट बोले- टीचर ने डांटा, शौर्य रोते हुए चला गया शौर्य के साथ पढ़ने वाले स्टूडेंट सामने नहीं आना चाहते। उसके एक दोस्त बताते हैं, ‘टीचर उसे छोटी-छोटी बातों पर परेशान करते थे। पिछले 5-10 दिन से वो इतना ज्यादा परेशान था कि उसने सबसे बात करना बंद कर दिया था। आखिरी दिन ड्रामा प्रैक्टिस के दौरान वो गिर गया था। उसे बुलाकर डांटा गया। बहुत ज्यादा परेशान किया गया।’
‘टीचर उसे ऐसे डांट रही थीं कि जैसे वो किसी का मर्डर करके आया हो। फिर उसने किसी से बात नहीं की। रोते हुए स्कूल से निकल गया।’
शौर्य कहता था कि मुझे स्कूल का अगला शाहरुख खान बनना है। उसका बिहेवियर काफी अच्छा था, जोक्स करता था, सबके साथ रहने वाला था।
शिकायत के बाद भी परेशान करते रहे टीचर 19 नवंबर को दिल्ली के राजा गार्डन मेट्रो थाने में आरोपी टीचर्स के खिलाफ केस दर्ज किया गया। FIR के मुताबिक पिता ने बताया है कि शिकायत के बाद भी टीचर्स शौर्य को परेशान कर रहे थे। शौर्य के क्लासमेट ने बताया कि चार दिन से उसे धमकाया जा रहा था कि पेरेंट्स को बुलाकर टीसी दे देंगे।
इसके बाद स्कूल ने चार टीचर युक्ति अग्रवाल महाजन, मनु कालरा, जूली वर्गीज और अपराजिता पाल को सस्पेंड कर दिया है। 20 नवंबर को स्कूल ने कहा कि मामले की जांच होने तक उनका निलंबन जारी रहेगा। इस दौरान ये टीचर स्कूल परिसर में नहीं जाएंगे। प्रशासन की अनुमति के बिना किसी छात्र, स्टाफ या पेरेंट्स से बात नहीं करेंगे।
शौर्य के चाचा प्रवीण पाटिल स्कूल के खिलाफ एक्शन की मांग कर रहे हैं। वे स्कूल के बाहर खड़े होकर प्रोटेस्ट कर रहे हैं। प्रवीण कहते हैं, ‘शौर्य ने घर में कई बार टीचर्स के बारे में बताया था। हमने यही समझा कि स्कूल के 8-10 दिन और बचे हैं। फिर स्कूल ही बदल देंगे।
शौर्य की मौत सुसाइड नहीं है, ये स्कूल की तरफ से हत्या है। आरोपी टीचर्स को गिरफ्तार करना चाहिए। प्रिंसिपल को नौकरी से हटाना चाहिए। हम सजा दिलवाए बिना नहीं मानेंगे।
पूर्व स्टूडेंट बोले-टीचर बच्चों को टारगेट करते हैं सीरत पाल सिंह इसी साल सेंट कोलंबस स्कूल से 12वीं पास हुए हैं। वे शौर्य के सुसाइड के बाद प्रदर्शन कर रहे हैं। सीरत कहते हैं, ‘स्कूल में पढ़ाई को लेकर प्रेशर तो है, लेकिन कुछ टीचर्स कई बच्चों के लिए ज्यादा सख्त हो जाते हैं। उन्हें टारगेट करते हैं। कई स्टूडेंट इसे झेल नहीं पाते। हम स्कूल के सिस्टम के खिलाफ यहां खड़े हैं।’

प्रोटेस्ट में शामिल विशाल का बेटा सातवीं में पढ़ता है। एक हफ्ते पहले उनके बेटे को भी सस्पेंड कर दिया गया था। विशाल कहते हैं, ‘छोटी-छोटी गलतियों पर टीचर्स बच्चों को परेशान करती हैं। पेरेंट्स को छोटी-छोटी बातों पर बुलाया जाता है। कभी-कभी एक घंटे के नोटिस पर बुला लेते हैं।’
‘मेरे बच्चे को एक हफ्ते से सस्पेंड किया हुआ है। वो बोलता है कि पापा मैं स्कूल नहीं जाऊंगा। अगर आप ऐसे बच्चों पर दबाव बनाएंगे तो जिम्मेदारी किसकी होगी।
प्रोटेस्ट में शामिल भावना कहती हैं, ‘स्कूल में बच्चों को परेशान किया जाता है। ये रोका जाना चाहिए। डर की वजह से बच्चे हमें नहीं बताते। बताते हैं, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। टीचर बच्चों के साथ ऐसा व्यवहार न करें कि वे इतना बड़ा फैसला ले लें। उसके दिमाग में कितनी चीजें चल रही होंगी, तब उसने ऐसा किया। ये आसान नहीं होता है।’
पुलिस बोली- टीचर्स से पूछताछ चल रही, कुछ कहना जल्दबाजी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस मामले को मानवाधिकार का उल्लंघन बताया है। आयोग ने दिल्ली पुलिस और सेंट्रल दिल्ली के जिलाधिकारी से 10 दिन में जांच रिपोर्ट मांगी है। केस के जांच अधिकारी बिक्रमजीत सिंह के मुताबिक अभी सारे पक्षों से पूछताछ की जा रही है। बच्चों और टीचर्स से भी पूछताछ की जाएगी। अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।
ने सेंट कोलंबस स्कूल के प्रिंसिपल रॉबर्ट फर्नांडिस से संपर्क किया। उन्हें ई-मेल के जरिए कुछ सवाल भेजे हैं। उनका जवाब नहीं मिला है। जवाब आने पर स्टोरी में अपडेट करेंगे।
एक साल में 13 हजार से ज्यादा सुसाइड नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो यानी NCRB के डेटा के मुताबिक 2023 में देश भर में 13,892 छात्रों ने आत्महत्या की। ये सुसाइड के कुल केस (1.71 लाख केस) का 8.1% है। 2013 में स्टूडेंट सुसाइड के 8,423 मामले थे। यानी 10 साल में ये करीब 65% बढ़े हैं। इन 10 साल में 1,17,849 छात्रों ने आत्महत्या की है।

बच्चों की सुसाइड के तीन और केस
1. राजस्थान: 9 साल की अमायरा ने स्कूल की बालकनी से कूदकर जान दी 1 नवंबर को जयपुर में चौथी क्लास में पढ़ने वाली अमायरा ने खुदकुशी कर ली थी। वो नीरजा मोदी स्कूल में पढ़ती थी। जांच में पता चला कि उसे स्कूल में बच्चे परेशान करते थे। अमायरा की उम्र सिर्फ 9 साल थी। परिवार का आरोप है कि घटना वाले दिन अमायरा ने क्लास टीचर से कई बार मदद मांगी, लेकिन उसकी मदद नहीं की गई।

अमायरा की मां शिवानी के मुताबिक घटना वाले दिन उसे बहुत ज्यादा परेशान किया गया। उसकी हालत ऐसी हो गई कि वो सीट पर बैठ नहीं पा रही थी। CCTV में अमायरा बार-बार टीचर के पास जाती दिख रही है, लेकिन उन्होंने उसे भगा दिया।
इस मामले में CBSE ने जांच कमेटी बनाई थी। 20 नवंबर को बोर्ड ने जांच रिपोर्ट देने के बाद स्कूल को नोटिस जारी किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमायरा 18 महीने से बुलिंग का शिकार हो रही थी, लेकिन टीचर्स और स्कूल मैनेजमेंट ने ध्यान नहीं दिया। अगर समय रहते दखल दिया जाता तो ये घटना रोकी जा सकती थी।
2. मध्यप्रदेश: 11वीं की स्टूडेंट ने सुसाइड किया, टीचर पर आरोप 16 नवंबर को मध्य प्रदेश के रीवा में 11वीं क्लास की एक स्टूडेंट ने सुसाइड कर लिया। उसकी डेडबॉडी घर के बाथरूम में मिली। परिवार का आरोप है कि स्कूल में उसे परेशान किया जा रहा था।
छात्रा का सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें टीचर पर आरोप लगाए गए हैं। इसमें लिखा है कि टीचर पनिशमेंट के लिए उसका हाथ पकड़ लेता था और उंगलियों के बीच पेन दबाता था। हालांकि रीवा पुलिस ने मीडिया को बताया है कि सुसाइड के पीछे की सभी वजहों की पड़ताल की जा रही है।

3. महाराष्ट्र: 13 साल की आरोही स्कूल की छत से कूदी महाराष्ट्र के जालना में 13 साल की आरोही ने अपने ही स्कूल की बिल्डिंग की छत से कूदकर जान दे दी। वह 7वीं में पढ़ती थी। आरोही सुबह स्कूल पहुंची थी। कुछ देर में स्कूल की तरफ से उसके पिता दीपक बिडलान को फोन पहुंचा कि उनकी बेटी ने तीसरी मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली है। आरोही के पिता का आरोप है कि उनकी बेटी टीचर्स की तरफ से किए जा रहे मानसिक उत्पीड़न से परेशान थी।
डॉक्टर बोले- बच्चों ने वॉर्निंग साइन दिए थे, टीचर समझ नहीं पाए सर गंगाराम अस्पताल के कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट डॉ. सुयश शेंडये कहते हैं कि सुसाइड के इन मामलों में टीचर्स की असंवेदनशीलता नजर आ रही है। वे कहते हैं, ‘इन सभी मामलों में बच्चों ने पहले ही वॉर्निंग साइन दिए थे, जहां उन्हें आइडेंटिफाई किया जा सकता था। उनकी मदद की जा सकती थी, लेकिन टीचर्स ने मदद नहीं की। इसलिए ये समस्या बढ़ती गई।’

डॉ. सुयश आगे कहते हैं कि टीचर्स और पेरेंट्स को ऐसे मामलों में मिलकर काम करना चाहिए। हर बच्चा अलग होता है। 10-12वीं के दौरान बच्चे बहुत संवेदनशील होते हैं। उन्हें सही तरीके से गाइड करने की जरूरत होती है।
रन विथ मेयर — रन इंदौर–वन इंदौर
20 हज़ार से अधिक इंदौरवासियों ने लगाया स्वास्थ्य के लिए दौड़ का दम
मुख्यमंत्री ने दी बधाई -“इंदौर हर क्षेत्र में अद्भुत उदाहरण”
3, 5 और 7 किमी श्रेणी में हजारों धावकों ने लिया हिस्सा, दिव्यांग प्रतिभागियों ने बढ़ाया उत्साह
स्वच्छता एवं स्वास्थ्य कि ली शपथ
इंदौर। फिटनेस और स्वास्थ्य जागरूकता के संदेश के साथ रविवार सुबह शहर के हजारों नागरिकों ने ‘ रन इंदौर–वन इंदौर’ मैराथन में रन विथ मेयर में उत्साहपूर्वक भाग लिया। 20 हजार से अधिक लोगों ने 3, 5 और 7 किलोमीटर की अलग-अलग श्रेणियों में दौड़ लगाकर फिट इंदौर का परिचय दिया। दिव्यांग धावकों की विशेष सहभागिता कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रही, जिन्होंने अपने हौसले से सभी को प्रेरित किया।
कार्यक्रम की शुरुआत वंदे मातरम से हुई, इस दौरान स्वच्छता एवं स्वास्थ्य की शपथ ली। इसके बाद अतिथियों द्वारा मैराथन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।
मुख्यमंत्री ने दी बधाई -“इंदौर हर क्षेत्र में अद्भुत उदाहरण”
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम को ऑनलाइन संबोधित करते हुए कहा कि इंदौर ने स्वच्छता की तरह अब फिटनेस में भी नई पहचान बनाई है।
उन्होंने कहा—
“महापौर के नेतृत्व में आज इंदौर के नागरिक स्वास्थ्य के लिए दौड़ रहे हैं। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में देश का गौरव बढ़ रहा है और यह सामूहिक चेतना का अद्भुत उदाहरण है। फिटनेस का मूल आधार दौड़ है और इंदौर एक बार फिर देश के सामने नज़ीर पेश कर रहा है।”
इंदौर हर क्षेत्र में नंबर वन- कैलाश विजयवर्गीय
नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौरवासियों के उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि इंदौर न सिर्फ स्वच्छता, बल्कि हर क्षेत्र में देश-दुनिया में अग्रणी बन रहा है। उन्होंने दौड़ में शामिल नागरिकों के जज्बे को सलाम किया। देश और शहर सरकार से नहीं जनता के सहयोग से चलता है हम आपके प्रतिनिधि हैं, यह स्वच्छ शहर इंदौर की जनता के सहयोग से ही नंबर वन शहर है।
माननीय जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट ने कहा कि इंदौर स्वच्छता में सिरमौर शहर अपने अलग-अलग नवाचारों से हमेशा आकर्षित करता है और मैराथन दौड़ रन विथ मेयर में आज प्रतिभागियों के जोश को देखकर लगता है कि इंदौर अद्भुत है।
महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि शहर के जागरूक नागरिकों के सहयोग से इंदौर स्वच्छता में सिरमौर है, आज इंदौर के पश्चिमी क्षेत्र में मैराथन का आयोजन किया गया जिसमें 20 हजार से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीयन किया और बड़ी संख्या में प्रतिभागी ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
दिव्यांग प्रतिभागियों के लिए विशेष दौड़
महापौर पुष्यमित्र भार्गव के मार्गदर्शन में दिव्यांग धावकों के लिए विशेष आयोजन किया गया जिसने कार्यक्रम को और भी प्रेरणादायक बनाया। महापौर ने कहा कि इंदौर स्वास्थ्य और सहभागिता दोनों में अग्रसर है।
जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की सक्रिय उपस्थिति
कार्यक्रम में कैलाश विजयवर्गीय, कैबिनेट मंत्री तुलसीराम सिलावट, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा, विधायक रमेश मेंदोला, विधायक मधु वर्मा, पद्मश्री सतेंद्र लोहिया, टीनू जैन, आयोजक मोहित यादव, एमआईसी सदस्य अश्विनी शुक्ला, अभिषेक शर्मा बबलू, कमल वाघेला, योगेश गेंदर, ट्रैफिक एसीपी आर. के. सिंह, पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह, कलेक्टर शिवम वर्मा, निगम आयुक्त दिलीप यादव सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं नागरिक मौजूद रहे।
इंदौर ने दोहराया संदेश — “फिटनेस भी, स्वच्छता भी”
भव्य आयोजन ने सिद्ध किया कि इंदौर सिर्फ स्वच्छ ही नहीं, फिटनेस में भी नंबर वन बनने की ओर तेजी से अग्रसर है।“रन इंदौर–वन इंदौर : रन विथ मेयर” ने हजारों कदमों के साथ इंदौर के स्वास्थ्य को नई गति दी।