छिंदवाड़ा के जुन्नारदेव जनपद पंचायत में एक ऐसा घोटाला सामने आया है, जहां चंदे से बन रहे मंदिर को सरकारी कागजों में सामुदायिक भवन दिखा दिया। मंजूर 24 लाख में से 17 लाख रुपए खर्च हो गए, लेकिन जमीन पर सिर्फ 15 खंभों का ढांचा खड़ा हुआ। गबन का आलम ऐसा कि एक बोरी सीमेंट की कीमत 1.92 लाख रुपए और प्लंबिंग का बिल भी लाखों में दिखा दिया गया।
मामले में कलेक्टर हरेंद्र नारायण सिंह ने योजना अधिकारी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। वहीं, जिम्मेदार अधिकारियों से राशि वसूली की भी तैयारी है।
पहले समझ लीजिए पूरा मामला…
27 मार्च 2023 को विधायक निधि से ग्राम पंचायत जुन्नारदेव विशाला में करीब 24 लाख रुपए की लागत से सामुदायिक भवन यानी मंगल भवन के निर्माण को स्वीकृति मिली। जनपद पंचायत जुन्नारदेव को एजेंसी बनाया गया, जिसकी जिम्मेदारी सरपंच और सचिव के पास थी।
इस पूरे मामले में आरोप है कि बिना ले-आउट, बिना ड्रॉइंग, बिना डिजाइन और बिना मजदूरी भुगतान के सिर्फ कागजों पर ही निर्माण सामग्री के नाम पर 17 लाख रुपए निकाल लिए गए। ग्रामीणों को इसकी भनक लगी तो मामला खुला।

15 खंभों के ढांचे को सामुदायिक भवन बताकर पास कर दी रिपोर्ट
ग्रामीणों ने नवंबर 2024 में जनसुनवाई के दौरान तत्कालीन कलेक्टर से शिकायत की। कलेक्टर ने दो अलग-अलग अधिकारियों को जांच की जिम्मेदारी सौंपी और रिपोर्ट मांगीं।
पहली रिपोर्ट… जिला योजना अधिकारी यशवंत वैध द्वारा पहली रिपोर्ट सौंपी गई। रिपोर्ट में एक मंदिर निर्माण के काम को सामुदायिक भवन का काम बता दिया गया। अधिकारी ने रिपोर्ट में बताया कि मंगल भवन का काम प्रगति पर है। हालांकि हकीकत में सिर्फ 15 खंभों वाला स्ट्रक्चर था।
स्ट्रक्चर से करीब 200 मीटर दूर एक मंदिर का निर्माण चल रहा है, जहां 51 फीट की शिव प्रतिमा लगाई गई है। यह निर्माण इलाके के शिवभक्तों के चंदे से चल रहा था। सामुदायिक भवन योजना से इसका कोई संबंध नहीं है, बावजूद जिला योजना अधिकारी ने स्थानीय अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ मिलकर इस धार्मिक स्ट्रक्चर को ही मंगल भवन बताकर जांच रिपोर्ट जिला कार्यालय को भेज दी।

दूसरी रिपोर्ट… जुन्नारदेव एसडीएम कामिनी ठाकुर की तरफ से आई यह रिपोर्ट गड़बड़ी को उजागर कर रही थी। इसमें बताया गया कि मौका-मुआयना करने पर ऐसा कोई सामुदायिक भवन का निर्माण होता हुआ नहीं दिखा। दोनों रिपोर्ट में विरोधाभास था। सितंबर 2025 में कलेक्टर का तबादला हो गया। मामले की फिर से ग्रामीणों ने शिकायत की तो अक्टूबर में मौजूदा कलेक्टर हरेंद्र नारायण ने फिर से फाइल को ओपन किया। उन्होंने इससे जुड़े अधिकारियों को नोटिस भेजा।
एक बोरी सीमेंट की कीमत 1 लाख 92 हजार एसडीएम ने रिपोर्ट में निर्माण से संबंधित जो बिल शामिल किए, उसने सभी को चौंका दिया। रिपोर्ट के मुताबिक निर्माण के लिए सीमेंट खरीदी गई, जिसकी कीमत सोने के मूल्य जैसी है। इसमें एक बोरी सीमेंट की कीमत 1 लाख 92 हजार रुपए दिखाया गया।
1 दिसंबर 2023 को तीन बिल लगाए गए। पहले ₹1,92,000 रुपए में एक सीमेंट की बोरी खरीदी गई। उसी दिन ₹1,92,000 रुपए दूसरी सीमेंट की बोरी और ₹1,12,000 रुपए में तीसरी बोरी का बिल दिखाया गया। प्लंबिंग फिटिंग के नाम पर तीन बार में कुल 7 लाख 23 हजार का खर्च दिखाया गया।
| तारीख | सामान/काम | खर्च (₹) |
| 1 जून 2023 | सीसी रोड का निर्माण | 25 हजार |
| 2 जून 2023 | प्लंबिंग फिटिंग | 4.80 लाख |
| 13 जून 2023 | प्लंबिंग फिटिंग | 12.92 हजार |
| 26 जून 2023 | प्लंबिंग फिटिंग | 2.18 लाख |
| 1 दिसंबर 2023 | सीमेंट (1 बोरी) | 1.92 लाख |
| 1 दिसंबर 2023 | सीमेंट (1 बोरी) | 1.92 लाख |
| 1 दिसंबर 2023 | सीमेंट (1 बोरी) | 1.12 लाख |
1 जून 2023 को सीसी रोड के नाम पर 25 हजार रुपए निकाले गए, जबकि उस जगह पर भी कोई निर्माण नहीं हुआ। मजदूरी का एक भी भुगतान दर्ज नहीं है, लेकिन मटेरियल लाखों का दिखाया गया।
अब तक दो सब-इंजीनियर का तबादला, कलेक्टर भी बदले जब से इस सामुदायिक भवन का निर्माण काम शुरू हुआ है, तब से अब तक दो अधिकारियों का तबादला हो चुका है। निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायत थी, लेकिन अनुमोदन सब-इंजीनियर को करना था। इस पद पर भी लगातार बदलाव होता रहा।
- निर्माण की शुरुआत के समय विशाल परतेती सब-इंजीनियर थे, जिनका भोपाल ट्रांसफर हो गया।
- दूसरे सब-इंजीनियर सतीश पवार का 2024 में निधन हो गया।
- रिजवाना खान वर्तमान एई हैं, रिपोर्ट के अनुसार उनकी अनुशंसा पर राशि का भुगतान हुआ।
जनपद पंचायत CEO बोलीं- एक साथ राशि जारी नहीं हुई जनपद पंचायत CEO रश्मि चौहान ने बताया कि मामले कि जांच दूसरे AE के द्वारा भी करवाई गई थी। रिजवाना खान की अनुशंसा पर राशि जारी की गई है। राशि भी एक साथ जारी नहीं हुई है।
ग्रामीणों ने मामला मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में दर्ज कराया, पर आरोप है कि स्थानीय अधिकारियों ने दबाव बनाकर शिकायत को ‘स्पेशल फोर्स क्लोज’ करवा दिया। फिर शिकायत कलेक्टर और एसडीएम तक पहुंची। एसडीएम की जांच में गड़बड़ी सत्य मिली।
कलेक्टर ने नोटिस जारी किया, राशि वसूली की तैयारी के संबंध में कलेक्टर हरेंद्र नारायण सिंह से बात की। कलेक्टर ने अक्टूबर में टीएल बैठक के दौरान ही दोनों जांच रिपोर्ट मंगाई। रिपोर्ट में गड़बड़ी मिलने पर उन्होंने जिला योजना अधिकारी को नोटिस जारी किया।
कलेक्टर ने बताया कि जांच रिपोर्ट से पता चला है कि जो निर्माण हुआ है, वह सामुदायिक भवन से बिल्कुल भी मिलता-जुलता नहीं है। डिजाइन और स्ट्रक्चर का भी ध्यान नहीं रखा गया। योजना अधिकारी को नोटिस जारी किया गया है। बाकी जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी।

विधायक बोले- 1 करोड़ से बड़ा प्रोजेक्ट है, अभी शुरुआती काम हो रहा विधायक सुनील उइके से बात की गई तो उन्होंने इसे एक करोड़ का प्रोजेक्ट बताया। उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट एक करोड़ से ऊपर का है और अभी शुरुआती दौर पर है। भाजपाइयों के पेट में दर्द हो रहा है, इसलिए वे शिकायतें कर रहे हैं। तीन मंजिला सामुदायिक भवन का निर्माण होना है। अभी अधीन निर्माण स्थल देखकर अंदाजा लगाना गलत है।