शहर में स्वास्थ्य सेवाओं केनाम पर बड़ा खेल सामने आया है। इंदौर के 34 निजी अस्पतालों को फर्जी या अधूरे डॉक्यूमेंटस के आधार पर रजिस्ट्रेशन और मान्यता दी गई है। जांच में पता चला कि कई अस्पताल बिना फायर सेफ्टी और भवन अनुमति के चल रहे हैं। ये अस्पताल फर्जी लेटर पैड और सील-साइन के सहारे सालों से काम कर रहे हैं।

वहीं इसकी पूरी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को है। हैरानी की बात यह है कि इनमें कई अस्पतालों ने जरुरी दस्तावेज फर्जी बनवाए या फिर बनवाए ही नहीं है। इनमें भवन अनुमति प्रमाणपत्र, फायर सेफ्टी NOC, रजिस्ट्रेशन और नवीनीकरण जैसे अनिवार्य दस्तावेज शामिल है। बावजूद इसके मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) दफ्तर ने इन्हें मान्यता दे दी। जबकि भारी अनियमितताएं डॉक्यूमेंटस में साफ-साफ दिखाई दे रही हैं। इस पूरे मामले में सीएमएचओ कार्यालय की भारी लापरवाही सामने आ रही है।

पहली परत – फर्जी Building Permission का खेल
कई अस्पतालों के रजिस्ट्रेशन में नगर निगम इंदौर के जरिए जारी भवन अनुमति प्रमाणपत्र संलग्न थे। वहीं, याचिकाकर्ता ने जब उन्हीं कॉलोनियों की प्रमाणिकता जांचने के लिए नगर निगम में RTI लगाई, तो सामने आया बड़ा खुलासा हुआ।
नगर निगम से मिले जवाब में सामने आया कि जिन कॉलोनियों में अस्पताल चल रहे हैं, वे अवैध कॉलोनी हैं। वहीं अवैध कॉलोनियों में नगर निगम कभी भवन अनुमति जारी नहीं करता है। इसका मतलब अस्पतालों ने नगर निगम के फर्जी लेटर पैड और कूटरचित साइन से नकली ission बनाई
पहली परत – फर्जी Building Permission का खेल
कई अस्पतालों के रजिस्ट्रेशन में नगर निगम इंदौर के जरिए जारी भवन अनुमति प्रमाणपत्र संलग्न थे। वहीं, याचिकाकर्ता ने जब उन्हीं कॉलोनियों की प्रमाणिकता जांचने के लिए नगर निगम में RTI लगाई, तो सामने आया बड़ा खुलासा हुआ।
नगर निगम से मिले जवाब में सामने आया कि जिन कॉलोनियों में अस्पताल चल रहे हैं, वे अवैध कॉलोनी हैं। वहीं अवैध कॉलोनियों में नगर निगम कभी भवन अनुमति जारी नहीं करता है।

इसका मतलब अस्पतालों के फर्जी लेटर साल-साइन से नकली Bullaing Permission बनाई थी।
याचिकाकर्ता ने फायर NOC की सत्यता जांचने के लिए फर्मों से संपर्क किया। इस दौरान पता चला कि कई फायर NOC फर्जी थीं। कुछ अस्पतालों ने पुरानी, सालों पुरानी NOC लगाई थी। आधे से ज्यादा अस्पतालों ने NOC का नवीनीकरण भी नहीं करवाया था। इसका मतलब है कि ये अस्पताल बिना आग सुरक्षा के चल रहे थे। किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता था।
फर्जी दस्तावेजों पर मान्यता कैसे मिली?
दोनों RTI के जवाब मिलाकर तस्वीर साफ हो गई। कुछ अस्पतालों ने फर्जी बिल्डिंग परमिशन लगाई। कुछ अस्पतालों ने फर्जी फायर NOC लगाई, जबकि कुछ ने दस्तावेज ही नहीं बनाए। कुछ अस्पतालों ने पुराने कागज जोड़कर रजिस्ट्रेशन कराया था। CMHO दफ्तर ने बिना जांच के इन सभी को रजिस्ट्रेशन दे दिया। यह पूरा काम भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 338, 336(3), 340 (2) के तहत अपराध है।

दस्तावेजों का खुलासा होने के बाद CMHO, इंदौर और नगर निगम में शिकायत की गई थी। शिकायतें मुख्य चिकित्सा अधिकारी, आयुक्त, भवन अधिकारी, पुलिस आयुक्त, और जिला कलेक्टर तक पहुंचाई गई थी। आठ महीने तक किसी भी जगह कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बजाय, शिकायतों को दबा दिया गया। यह चुप्पी यह दिखाती है कि या तो मामले को अनदेखा किया गया, या फिर किसी बड़े संरक्षण का संकेत है।
यह पूरा घोटाला केवल एक RTI की वजह से सामने आया है। एक RTI ने अस्पतालों के दस्तावेज दिखाए, जबकि दूसरी ने उनकी सच्चाई खोली। CMHO के जरिए दिए गए दस्तावेज और नगर निगम व फायर फर्मों के असली जवाब में फर्क था। इसने यह साफ कर दिया कि इंदौर में कई अस्पताल फर्जी दस्तावेजों से चल रहे थे। इसके बावजूद प्रशासन आंखें बंद किए बैठा था।

ये फर्जीवाड़ा सिर्फ नियम उल्लंघन नहीं, कानूनन अपराध
यह पूरा मामला स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के साथ कानूनन अपराध भी है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) धारा ), धारा 338, धा 540(2) इन धाराओं के बनता है।
हाईकोर्ट में चल रहा मामला
जब विभाग ने शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं की, तो चर्चित शास्त्री ने जनहित याचिका दायर की। यह मामला इंदौर हाईकोर्ट की डबल बेंच में चल रहा है। बेंच में विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी सुनवाई कर रहे हैं।
कोर्ट ने 34 अस्पतालों की विस्तृत जांच रिपोर्ट छह सप्ताह में पेश करने का आदेश दिया है। मामले में शासन की तरफ से अतिरिक्त महाधिवक्ता आनंद सोनी पैरवी कर रहे हैं।