“ओंकारेश्वर में ‘मौतों वाला घाट’: असुरक्षित घाट, अवैध नावें और डैम के उतार-चढ़ाव में नर्मदा की हजार फीट गहराई—11 महीने में 24, 5 साल में 86 श्रद्धालु डूबे”

तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में नर्मदा नदी में स्नान करना आस्था का प्रतीक है, लेकिन यह जानलेवा भी साबित हो रहा है। इस साल अब तक 24 और पिछले चार साल में 62 श्रद्धालु अपनी जान गंवा चुके हैं। अधिकांश पीड़ित इंदौर, महाराष्ट्र और गुजरात से हैं, जिन्हें नदी की गहराई का अंदाजा नहीं होता।

ओंकारेश्वर के घाट असुरक्षित हैं, रेलिंग नहीं हैं और नावों का जमावड़ा रहता है। बांध के कारण जलस्तर में उतार-चढ़ाव होता रहता है, जिससे काई जम जाती है और खतरा बढ़ जाता है। गोताखोरों की कमी और बचाव कार्यों में मुश्किलों के कारण स्थिति और भी गंभीर हो जाती है।

ओंकारेश्वर आने वाले भक्त मां नर्मदा में स्नान कर भगवान भोलेनाथ के दर पर पहुंचते हैं।

नर्मदा घाट असुरक्षित, यहां रेलिंग तक नहीं ओंकारेश्वर में नर्मदा नदी के किनारे लगभग एक दर्जन घाट स्थित हैं, जिनमें अभय घाट, नवीन घाट, नागर घाट, गौमुख घाट, कोटितीर्थ घाट, ब्रह्मपुरी घाट, केवलराम घाट, ओंकार मठ घाट, बिछलिया घाट, चक्रतीर्थ घाट, बर्फानी घाट और नर्मदा-कावेरी संगम पर बना संगम घाट शामिल है।

इनमें से कुछ घाट ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के पास स्थित हैं और प्राचीन हैं, जबकि कुछ घाट बाद में बनाए गए हैं। हालांकि, ये सभी घाट स्नान के लिए असुरक्षित हैं। किसी भी घाट पर रेलिंग नहीं है और सुरक्षा के लिए कोई अन्य संसाधन भी उपलब्ध नहीं है। कुछ समय पहले प्रशासन ने पानी में ट्यूब छोड़े थे, लेकिन इसका कोई खास असर नहीं हुआ।

घाट पर बोटिंग की सुविधा भी है। कई लोग घाट किनारे नहाने के दौरान नदी में उतरते हैं और पत्थरों में उनका पैर फंस जाता है, जिससे हादसे होते हैं।

घाटों को नावों ने घेरा, स्नान के लिए जगह नहीं घाटों पर नाव भी हादसों की एक बड़ी वजह है। दो-तीन घाटों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश घाटों पर नावों का जमावड़ा रहता है। प्रशासन ने नाव स्टैंड के लिए कोई एक स्थान तय करके नहीं रखा है। यहां प्रत्येक घाट नावों से घिरा हुआ है। ऐसे में श्रद्धालुओं को स्नान के दौरान तकलीफ होती है। जिसे जहां नहाने को मिल जाए, वो वहां अपनी सहूलियत के हिसाब से स्नान करता है।

खास बात यह है कि तीर्थनगरी में लाइसेंसी से ज्यादा अवैध नाव हैं। सुरक्षा के बतौर कुछ सरकारी नाव भी हैं, जो नगर परिषद और ओंकारेश्वर मंदिर ट़्रस्ट के पास अलग-अलग संख्या में है। इनके नाविकों को परिषद और ट़्रस्ट के द्वारा मानदेय दिया जाता है। हादसों के दौरान यह नाव खड़ी रहती है और इनके नाविक दूसरे धंधों में व्यस्त रहते हैं।

मना करने के बाद भी कई लोग एकांत में जाकर पत्थरों पर बैठ जाते हैं, कई बार सेल्फी लेने के दौरान अनियंत्रित होकर ये नदी में गिर जाते हैं।

ओंकारेश्वर में नर्मदा नदी में कई जगह बहुत गहरी खाई है, कई बार अनजाने में लोग यहां तक पहुंच जाते हैं।

अब पढ़िए स्थानीय और प्रशासनिक लोगों के तर्क…

डैम से जलस्तर को सामान्य रखा जाए, या अपर डैम बनाएं ओंकारेश्वर परियोजना के अंतर्गत नर्मदा नदी पर 2001 से 2007 के बीच एक बांध का निर्माण हुआ। नाविक संघ के सचिव अरुण वर्मा के अनुसार, इस बांध के बनने के बाद से ही डूबने की घटनाओं में वृद्धि हुई है। इसका मुख्य कारण यह है कि ओंकारेश्वर बांध से पानी का जलस्तर सामान्य नहीं रहता। जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव के कारण काई जम जाती है, जिस पर तीर्थयात्रियों का ध्यान नहीं जाता और वे दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं।

अरुण वर्मा ने बताया कि अधिकांश घाटों पर गोताखोरों की तैनाती नहीं है। नाविक संघ ने कई बार प्रशासन को आवेदन और ज्ञापन देकर गोताखोरों की तैनाती की मांग की है। कई बार नाविकों ने ही डूबते हुए लोगों को बचाया है।

इन घटनाओं को रोकने के लिए दो सुझाव थी दिए हैं: पहला, जलस्तर को सामान्य बनाए रखने के लिए एक अपर डैम का निर्माण किया जाए, और दूसरा, ओंकारेश्वर बांध से जलस्तर को नियंत्रित रखा जाए। इन उपायों से जलस्तर में अचानक होने वाले बदलावों को रोका जा सकता है, जिससे काई जमने की समस्या कम होगी और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।

नर्मदा का जलस्तर ओंकारेश्वर बांध पर निर्भर पुलिस थाना मांधाता के टीआई अनोक सिंधिया ने बताया कि घाटों पर जो डूबने की घटनाएं होती हैं, वो दर्दनाक होती है। जिस परिवार का व्यक्ति डूबता है, वो परिवार काफी परेशान होता है। क्योंकि पानी में से 24 से 36 घंटे के बाद ही बॉडी रिकवर होती है।

अधिकतर घटनाएं जब होती है, तब डैम से पानी रोका जाता है। टरबाइन बंद हो जाते हैं तो जलस्तर कम हो जाता है। जहां नहाने का स्थान है, वहां पानी नहीं रहता है। ऐसे में यात्री आगे की ओर जाता है। स्नान करने वालों का इक्के-दुक्के घाट पर फैलाव हो जाता है। जिससे कि डूबने की घटना के बारे भी घंटों तक सूचना नहीं मिल पाती है।

गहराई नापी तो हजार फीट का रस्सा छोटा पड़ गया होमगार्ड के डिस्ट्रिक्ट कमांडेंट आशीष कुशवाहा के मुताबिक, ओंकारेश्वर में डूबने की घटनाओं के पीछे सबसे बड़ी वजह तो नर्मदा का जलस्तर है, जो कि बांध पर निर्भर है। श्रद्धालु स्नान के लिए पानी ढूंढते हैं, जहां चट्टानें रहती हैं, वहां जाकर नहाते हैं। लेकिन किसी को भी नर्मदा की गहराई का अंदाजा नहीं है। यही कारण है कि अच्छे से अच्छा गोताखोर भी पानी के भीतर जाकर रेस्क्यू का जोखिम नहीं उठाना चाहता।

एक बार गुजरात से आया पुलिसकर्मी डूब गया था, जिसकी सर्चिंग की गई, लेकिन वो दो दिन तक नहीं मिला। फिर हमने नर्मदा की गहराई नापने के लिए स्कूबा डाइविंग की मदद ली। लेकिन वे लोग भी 100 फीट से ज्यादा गहराई के भीतर नहीं जा सके। फिर हमने एक हजार फीट के रस्से में पत्थर बांधकर उसे डुबाया, वो रस्सा सीधे-सीधे जाकर डूबता रहा, रस्सा पूरा डूब गया, लेकिन गहराई का अंदाजा नहीं लगा पाए।

बताते हैं कि, होमगार्ड का एक गोताखोर था, जो कि 200 से ज्यादा लोगों की जान बचा चुका था। इतनी ही लाशें निकाल चुका था। लेकिन वह खुद एक बार रेस्क्यू के लिए उतरा और डूबा तो उसका शव भी नहीं मिल पाया।

फिलहाल बोट दौड़ाते हैं, मांजरी डालकर रेस्क्यू करते हैं होमगार्ड के प्लाटून कमांडर रविंद्र महिवाल के अनुसार, ओंकारेश्वर के घाटों पर होमगार्ड जवान तैनात रहते हैं। इसी बीच कोई डूबता है ताे वह चंद मिनटों में गायब हो जाता है। पानी में बोट दौड़ाकर गोताखोर सर्चिंग करते हैं, लेकिन कोई सुराग नहीं मिल पाता है। फिर पानी मांजरी (डूबने वाले को खींचने का देशी यंत्र) डालकर प्रयास करते हैं।

डूबने वाला शख्स ऊपरी चट्टानों पर रहता है तो मांजरी की पकड़ में आ जाता है, लेकिन जो गहराई में जाता है, वो तीन-चार दिन बाद शरीर फूलकर स्वत: ही ऊपर आता है। अधिकतर केसों में देखा गया है कि, जो व्यक्ति जिस जगह डूबता है, उसकी लाश उसी जगह पर मिलती है।

ओंकारेश्वर में अलग-अलग नर्मदा घाटों पर हुए झकझोर कर देने वाले हादसे

1. युवक दोस्त को बचाने में खुद डूब गया, राजस्थान से आए थे

ये घटना 7 सितंबर 2025 रविवार देर शाम की थी। ओंकारेश्वर में ओंकार मठ के पास नर्मदा नदी में स्नान के दौरान चिराग (25) अपने साथी को बचाने के लिए नदी में कूदा, लेकिन तेज बहाव में वह दूर बह गया। राजस्थान के पाली शहर से आए 6 दोस्तों के ग्रुप में से चिराग अपने साथी को बचाने के लिए नदी में कूदा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *