इंदौर ट्रैफिक अव्यवस्था पर हाई कोर्ट सख्त: बीआरटीएस तोड़ने में देरी पर कलेक्टर-निगम कमिश्नर व डीसीपी ट्रैफिक तलब, 15 दिन में एक लेन तोड़कर रिपोर्ट पेश करने के आदेश; 16 दिसंबर को अगली सुनवाई

शहर में बिगड़ते ट्रैफिक को लेकर लगी जनहित याचिका के मामले में सोमवार को इंदौर हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। इसमें बीआरटीएस तोड़ने में हो रही देरी पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए 15 दिन में बीआरटीएस की एक तरफ की लाइन का हिस्सा तोड़कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए।

साथ ही कोर्ट ने शहर के ट्रैफिक सुधार के कामों पर निगरानी के लिए वकीलों की पांच सदस्यीय कमेटी गठित कर कमेटी को भी रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए। अगली सुनवाई 16 दिसंबर को होगी।

कोर्ट ने 15 दिन में बीआरटीएस की एक तरफ की लाइन का हिस्सा तोड़कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए।

सोमवार को हुई सुनवाई में कलेक्टर शिवम वर्मा और नगर निगम कमिश्नर दिलीप कुमार यादव उपस्थित हुए। कोर्ट ने अगली सुनवाई में डीसीपी ट्रेफिक को भी हाजिर होने के आदेश दिए। सुनवाई जस्टिस विजयकुमार शुक्ला और जस्टिस बिनोद कुमार द्विवेदी की डबल बेंच में हुई।

इस केस में याचिकाकर्ता के वकील अजय बागडिया ने शहर के यातायात के मुद्दे को लेकर एक और आवेदन दिया, जिसमें बीआरटीएस तोड़ने में हो रही देरी के साथ ही प्रशासन के आदेश के बावजूद रात 10 बजे बाद धड़ल्ले से बज रहे डीजे, शहर की सड़कों पर जगह-जगह अतिक्रमण व धार्मिक चबूतरों के कारण यातायात बाधित होने, शाम को यातायात का दबाव बढ़ने से अस्त-व्यस्त यातायात को रोकने के लिए अफसरों को सड़क पर तैनात रखने, शहर के लगभग सभी उद्यानों में अतिक्रमण कर बने मंदिर आदि मुद्दे उठाए गए हैं।

बीआरटीएस इंदौर।

कोर्ट ने सुनवाई के बाद कहा कि याचिका में कोर्ट के पुराने आदेश का पालन किया जाएं। इसके साथ ही याचिकाकर्ता के नए आवेदन में यातायात संबंधी उठाए गए मुद्दों के निराकरण के आदेश के साथ 16 दिसंबर के पूर्व बीआरटीएस की एक लाइन तोड़कर स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने 16 दिसंबर तय करते हुए कलेक्टर और निगम कमिश्नर को फिर से उपस्थित होने के साथ डीसीपी ट्रैफिक को भी पेश होने के निर्देश दिए हैं।

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