रीवा: सत्ता के दुरुपयोग से जुड़े एक पुराने मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. हाईकोर्ट ने 2018 विधानसभा चुनाव के दौरान एक निर्दोष नागरिक पर झूठी FIR दर्ज कराने के आरोप में तत्कालीन कलेक्टर प्रीति मैथिल नायक (IAS) और तत्कालीन SDM नीलमणि अग्निहोत्री को नोटिस जारी किया है.

यह कार्रवाई फरियादी सर्वेश कुमार सोनी की याचिका पर की गई है, जिन्होंने दोनों प्रशासनिक अधिकारियों पर अपनी पदीय शक्तियों का दुरुपयोग करने और दुर्भावना से प्रेरित होकर कार्रवाई करने का आरोप लगाते हुए भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज करने की मांग की है.
विधानसभा चुनाव 2018 के दौरान तत्कालीन SDM नीलमणि अग्निहोत्री ने कलेक्टर के आदेश पर सर्वेश सोनी के विरुद्ध आचार संहिता उल्लंघन का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज कराई थी. सर्वेश सोनी ने बाद में RTI से दस्तावेज जुटाकर साबित किया कि जिस तस्वीर को राजनीतिक गतिविधि बताकर FIR दर्ज हुई, वह दरअसल वन विभाग द्वारा आयोजित ‘पावन घिनौची धाम पियावन के लोकार्पण कार्यक्रम’ की थी.
मामले की सुनवाई के बाद, हाईकोर्ट ने 17 मई 2019 को SDM द्वारा दर्ज कराई गई इस FIR को दुर्भावनापूर्ण करार देते हुए खारिज कर दिया था. FIR खारिज होने के बावजूद, सर्वेश सोनी ने अधिकारियों के विरुद्ध न्याय की लड़ाई जारी रखी. उन्होंने अपनी याचिका (MCRC 6042/2022) में आरोप लगाया है कि दोनों अधिकारियों ने जानबूझकर “त्रुटिपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों की रचना” की और लोकार्पण कार्यक्रम को गलत तरीके से राजनीतिक कार्यक्रम बताकर उन्हें परेशान किया.
याचिका में मांग की गई है कि सत्ता का दुरुपयोग करने और झूठे दस्तावेज़ तैयार करने के लिए इन अधिकारियों पर आपराधिक मुकदमा चलाया जाए. न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए दोनों अनावेदक अधिकारियों को चार सप्ताह के भीतर अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है. इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नित्यानंद मिश्र और शुभम कुमार मिश्रा ने पैरवी की.