“प्रिंसिपल अजय जैन की कार्डियक अरेस्ट से मौत के बाद 11 माह तक GPF-ग्रेच्युटी को तरसा परिवार; अफसरों की लापरवाही पर इंदौर हाईकोर्ट सख्त, 40 लाख की राशि 30 दिनों में देने के आदेश”

इंदौर में पिछले साल जनवरी में स्कूल के लिए निकले प्रिंसिपल की रास्ते में कार्डियक अरेस्ट से मौत हो गई थी। तब से पति की जीपीएफ, ग्रेच्युटी की राशि के लिए उनकी पत्नी भटकती रहीं। उन्हें जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। आखिरकार उन्हें हाईकोर्ट की इंदौर बेंच की शरण लेनी पड़ी।

प्रिंसिपल अजय जैन की मौत के बाद उनकी GPF-ग्रेच्युटी की राशि देने के आदेश इंदौर हाईकोर्ट ने दिए हैं।

सुनवाई के बाद 3 दिसंबर को कोर्ट ने आदेश जारी किया है। जिसमें कहा है कि प्रिंसिपल की पत्नी को उनके हक के जीपीएफ, ग्रेज्युटी के 40 लाख रुपए 30 दिनों में प्रदान करें। अगर ब्याज का प्रावधान है तो वह भी उन्हें समयावधि में दें।

बता दें, परदेशीपुरा निवासी अजय जैन (61) रुणजी गौतमपुरा में शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल में बतौर प्रिंसिपल पदस्थ थे। 11 जनवरी 2025 की सुबह वे लक्ष्मी बाई नगर रेलवे स्टेशन से गौतमपुरा के लिए जाने वाले थे।

तभी स्टेशन पर सीढ़ियां चढ़ने के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई। वे गिर पड़े। वहां मौजूद लोगों ने उन्हें उठाया और एंबुलेंस से जिला अस्पताल भिजवाया। वहां पहुंचने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। डॉक्टरों ने बताया कि उनकी मौत कार्डियक अरेस्ट से हुई है।

खास बात यह है कि प्रिंसिपल अपने कार्य के प्रति जिम्मेदार रहे हैं। जब उनकी मौत हुई तो उनके 300 से ज्यादा अवकाश बकाया थे। नजदीकी लोगों के मुताबिक वे बहुत ही जरूरी काम होने पर ही अवकाश लेते थे।

प्रिंसिपल की पत्नी कल्पना पेंशन, जीपीएफ और ग्रेच्युटी के लिए 11 माह भटकती रहीं।

एक माह बाद रिटायरमेंट था, अनुकंपा नहीं मिली अजय जैन के परिवार में पत्नी कल्पना, बड़ा बेटा उदित, छोटा बेटा मोहित और बेटी यशस्वी हैं। दुखद पहलू यह कि वे एक माह बाद रिटायर्ड होने वाले थे। परिवार ने उनके बेटे मोहित की उनके स्थान पर अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू की। फाइल भोपाल तक पहुंच गई लेकिन नियुक्ति नहीं मिल सकी है

रुणजी गौतमपुरा के स्कूल में प्रिंसिपल रहे अजय जैन की कार्डियक अरेस्ट से मौत हो गई।

जल्द हो जाएगा कहकर टालते रहे जिम्मेदार उनकी पत्नी कल्पना हाउस वाइफ हैं। दोनों बेटों और बेटी की शादी नहीं हुई है।

पत्नी ने फैमिली पेंशन, जीपीएफ, ग्रेच्युटी राशि के लिए आवेदन दिए लेकिन शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कहते रहे कि अभी मामला चल रहा है। जल्द हो जाएगा। अफसरों के अवकाश पर होने की बात भी कहते रहे।

अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अजय जैन के समकालीन रहे कुछ टीचर इस दौरान सेवानिवृत्त हो गए। इनमें से अधिकांश का पेंशन, जीपीएफ, ग्रेच्युटी सहित संबंधी सारे काम तुरत-फुरत हो गए और पेंशन भी शुरू हो गई लेकिन अजय जैन के मामले में जिम्मेदारों ने पेंशन तक शुरू नहीं की।

इसे लेकर परिवार ने अपने स्तर पर प्रयास किए तो जून 2025 से उनकी पेंशन मिलना शुरू हुई लेकिन जीपीएफ, ग्रेच्युटी की राशि के लिए पत्नी भटकती रही।

पत्नी कल्पना, और बेटी यशस्वी के साथ अजय जैन।

संकुल से लेकर भोपाल तक गुहार, 25 से ज्यादा चक्कर पत्नी कल्पना ने इसे लेकर बीईओ (देपालपुर), संकुल कार्यालय रुणजी गौतमपुरा, जिला शिक्षा कार्यालय, लोक शिक्षण विभाग, ज्वाइंट डायरेक्टर (JDO) , कलेक्टर की जनसुनवाई, लोक शिक्षण संचानालय (भोपाल) सहित प्रत्येक संबंधितों को 4 से 5 बार आवेदन दिए लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुए। कल्पना ने बताया कि इस दौरान उनके बेटे अमित, मोहित ने उनके साथ इंदौर, भोपाल के 25 से ज्यादा चक्कर लगाएं।

जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों ने बैठाया और आश्वस्त किया लेकिन जीपीएफ, ग्रेच्युटी को लेकर कोई काम नहीं किया। यह राशि करीब 40 लाख रुपए है।

पति की मौत के बाद पत्नी कल्पना ने हर जगह आवेदन दिए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

सारे दस्तावेज पूरे होने के बावजूद अलग ही मंशा आखिरकार उन्होंने नवंबर 2025 में एडवोकेट ऋषि आनंद चौकसे के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका लगाई। कोर्ट ने इस मामले को गंभीर माना और इस पर सुनवाई शुरू की।

एडवोकेट ऋषि आनंद चौकसे ने बताया कि चौंकाने वाले और दुखद पहलू यह कि पत्नी कल्पना ने हर स्तर पर आवेदन जो आवेदन दिए उसमें सभी जरूरी दस्तावेज सभी पूरे थे।

इसके बावजूद जिम्मेदारों की मंशा पूरी नहीं हुई तो काम नहीं किया जबकि यह शासन का नियम है कि जो शासकीय कर्मचारी की सेवानिवृत्ति हो गई हो या अचानक मौत हो उसमें संबंधित के परिवार (नॉमिनी) को समयावधि में पूरी राशि दी जाती है।

बिना लेन-देन के फाइल आगे नहीं बढ़ती स्कूल के स्टाफ और अजय जैन के नजदीकी लोगों के मुताबिक दंपती काफी सरल और ईमानदार प्रवृत्ति के रहे हैं। अजय जैन न तो कभी रिश्वत ली और ही वे भ्रष्टाचार तवज्जो देकर काम कराने में विश्वास रखते थे।

ऐसा ही स्वभाव पत्नी का है। खुद विभाग का स्टाफ मानता है यहां बिना लेन-देन के किसी का काम नहीं होता। कोई भी टीचर, प्रिंसिपल, कर्मचारी अगर सेवानिवृत्त होता है तो बिना लेन-देन के फाइल आगे नहीं बढ़ती।

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