बेहतर है ‘उत्सव’ नहीं ‘समीक्षा’ में पूरे हो रहे मोहन के दो साल… कौशल किशोर चतुर्वेदी

बेहतर है ‘उत्सव’ नहीं ‘समीक्षा’ में पूरे हो रहे मोहन के दो साल…
वर्ष 2023 में सोलहवीं विधानसभा के लिए तीसरी बार सदस्य निर्वाचित हुए डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गरिमामय उपस्थिति में 13 दिसंबर 2023 को भोपाल में प्रदेश के 19वें मुख्यमंत्री के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली थी। 12 दिसंबर 2025 को डॉ. मोहन यादव के कार्यकाल के दो साल पूरे हो रहे हैं। इससे पहले मुख्यमंत्री ने अलग-अलग विभागों की समीक्षा कर विभागों को उपलब्धियों और कमियों के कांटे पर तौलकर हकीकत के पैमाने पर अपनी सरकार को परखा है। और समीक्षा के इस दौर में यह भी सामने आ चुका है कि मंत्रिमंडल के सदस्य रिपोर्ट कार्ड के लिहाज से कहाँ पर खड़े नजर आ रहे हैं? हालांकि इसका मतलब यह कतई नहीं है कि समीक्षा और रिपोर्ट कार्ड के आधार पर मंत्रियों को आगामी समय में कोई परिणाम भुगतना पड़ेगा। पर यह बात जरूर है कि मंत्रियों की समझ में यह आ गया होगा कि मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव के लिए यह दो साल उत्सव के नहीं है बल्कि समीक्षा के आधार पर सर्वोत्तम करने की सरकार की परीक्षा के दिन वास्तव में अब शुरू हो रहे हैं। और इस कड़ी परीक्षा में
सभी जिम्मेदारों की सहभागिता के साथ ही सरकार को खुद को साबित करना है। भले ही यह समीक्षा का सॉफ्ट दौर रहा हो, लेकिन वास्तव में सरकार के लिए जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने का कठिन दौर अब सामने है।
समीक्षा का यह दौर यह भी बता रहा है कि विपक्ष का काम आइना दिखाना है लेकिन वास्तविक तौर पर सरकार को हर दिन खुद आईना देखकर अपनी कमियों को दूर करने का हरसंभव प्रयास करना है, मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव की यही मंशा है। हालांकि प्रदेश सरकार ने दो साल में यह साबित कर दिया है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पिछली सरकार के सभी अच्छे कामों को आगे बढ़ाते हुए खुद का विजन भी सामने रख चुके हैं। ग्लोबल इन्वेस्टर समिट और रीजनल इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव
का मोहन विजन एक बड़ी लकीर खींचने में कामयाब रहा है। इंडस्ट्रीज के साथ रोजगार सृजन की महत्वपूर्ण उपलब्धि ही सरकार का लक्ष्य है। हालांकि औद्योगिक निवेश के क्षेत्र में सरकार तेजी के साथ कदम आगे बढ़ा रही है लेकिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के लिए उनका यह विजन चिंतन, मनन और चुनौतियों से भरा हुआ भी है। प्रदेश की तस्वीर बदलने के लिए
सरकार को अपने इस महत्वाकांक्षी विजन पर खुद ही खरा उतरना पड़ेगा। सरकारी तौर पर हर क्षेत्र में उपलब्धियों की लंबी सूची जन-जन तक पहुंचाने का काम सरकार करेगी तो विपक्ष सरकार की कमियों की लंबी सूची बनाकर प्रदेश की जनता के सामने लाने में कोई कंजूसी नहीं करेगा। पर जनता के भरोसे पर खरा उतरकर उनका दिल जीतने की एक सफल कोशिश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने की है, इसमें कोई दो मत नहीं है। हाल ही में उज्जैन में सामूहिक विवाह सम्मेलन में अपने पुत्र डॉ.अभिमन्यु का विवाह कर मुख्यमंत्री मोहन ने यही संदेश दिया है कि शादियों में फिजूलखर्ची को रोककर सामाजिक हित के दूसरे कामों को बढ़ावा दिया जा सकता है। किसानों के लिए भावांतर योजना मध्य प्रदेश को पूरे देश में अलग पहचान दिला रही है। भावांतर का सफलतापूर्वक संचालन एक बड़ी चुनौती थी जिसे मोहन सरकार ने पार कर लिया है। सिंहस्थ 2028 की तरफ दुनिया की निगाहें हैं तो महाकाल के आशीर्वाद से मुख्यमंत्री बने मोहन का सबसे महत्वाकांक्षी लक्ष्य पूरी दुनिया को श्रेष्ठतम व्यवस्थाओं के साथ सिंहस्थ के आयोजन का सहभागी बनाना है। इस दिशा में सरकार सबसे तेज रफ्तार के साथ हर दिन आगे बढ़ी जा रही है। लाडली बहनों को हर महीने 1500 रुपये की राशि देने की शुरुआत हो चुकी है तो हर महीने 3000 रुपये तक पहुंचाने की की दिशा में सरकार बढ़ रही है, यह भरोसा मध्य प्रदेश की आधी आबादी को हो चुका है। कृष्ण तो यदुवंशी मोहन के मन में बसे हैं और कृष्ण पाथेय की कल्पना साकार करने में सरकार जुटी है तो राम वन पथगमन और विक्रमादित्य के साथ ही संस्कृति और पर्यटन यानी विरासत के साथ विकास मोहन सरकार के पर्याय के रूप में सामने हैं। केन बेतवा लिंक परियोजना, चम्बल काली सिंध पार्वती और ताप्ती बेसिन जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाएं पूरे देश में मध्य प्रदेश की पहचान के साथ ही मोहन की तस्वीर उकेर रही हैं।
खैर उपलब्धियों की विभागवार सूची सरकार सबके सामने लाएगी तो सरकार की कमियाँ सामने लाने में विपक्ष की भूमिका कमतर नहीं है। कर्ज, भ्रष्टाचार, कानून व्यवस्था, महिला अत्याचार, किसानों की बदहाल स्थिति बेरोजगारी सहित सैकड़ों मुद्दों पर विपक्ष हमेशा आक्रामक रहा है। तो यह हकीकत है कि स्वास्थ्य, शिक्षा कानून-व्यवस्था, राजस्व, परिवहन, खनन, महिला सशक्तिकरण, युवा, पिछड़ा वर्ग, दलित और आदिवासी सहित सभी क्षेत्र चिंतन-मनन और आत्मावलोकन की परिधि में मोहन सरकार को सोचने पर तब तक मजबूर करते रहेंगे जब तक कि प्रदेश की नौ करोड़ आबादी फील गुड कर यह फीडबैक नहीं देती कि मोहन सरकार के काम पहले की सभी सरकारों और मुख्यमंत्रियों के कार्यकालों से बेहतर हैं। पर इस बात में कोई संशय नहीं है कि मोहन की दो साल के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि यही है कि अब मध्य प्रदेश की नौ करोड़ आबादी के मन में कहीं न कहीं मोहन हैं… अस्थिरता का दौर खत्म हो चुका है और स्थायित्व के साथ मोहन की प्रदेश को विकसित बनाने की यात्रा आगे बढ़ रही है। ऐसी स्थिति में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव यदि दो साल के कार्यकाल पूरा होने का उत्सव न मनाकर समीक्षा को आगामी 3 साल का आधार बना रहे हैं तो इसे बेहतर मध्य प्रदेश की संभावनाओं से भरा माना जा सकता है…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं

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