चोरल रेंज में बाघों के 37 और तेंदुओं के 89 पगमार्क, फिर भी रेल लाइन की भेंट चढ़ेगा जंगल—495 हेक्टेयर घना वन कटेगा, 2.5 लाख पेड़ों के साथ वन्यजीवों के पलायन का खतरा

इंदौर वन मंडल की चोरल रेंज में वन्य जीवों की गणना में बाघों के 37 और तेंदुओं के 89 पगमार्क मिले हैं। यह संख्या यहां की चारों रेंज में सर्वाधिक है। हालांकि इस क्षेत्र में बाघों के मूवमेंट की यह खुशी अधिक दिनों तक नहीं रहेगी। अगले साल यहां का 495 हेक्टेयर घना जंगल रेल लाइन के लिए काट दिया जाएगा। इसमें 2.50 लाख से ज्यादा पेड़ कटने की आशंका है।

यानी बाघ और तेंदुओं की आवाजाही वाला यह जंगल जल्द उजाड़ हो जाएगा। 18 से 24 दिसंबर तक हुई गणना के दौरान 18 दिसंबर को ही चोरल में बाघों के 13 और तेंदुओं के 28 पगमार्क मिले थे। इसके बाद 19 और 20 दिसंबर को भी लगातार पगमार्क मिले। चोरल रेंज की 33 बीट में गणना हुई। जिन बीटों में पगमार्क मिले, वे सभी रेल लाइन से प्रभावित होंगी। जंगल कटने से जानवरों का पलायन होगा।

इंदौर में नहीं लगेंगे नए पेड़

महू से सनावद तक रेल लाइन के लिए जंगल काटा जाएगा। इसकी भरपाई के लिए 10 लाख पौधे लगाए जाएंगे, लेकिन ये पौधे इंदौर में नहीं लगेंगे। इन्हें धार, झाबुआ और आलीराजपुर में लगाया जाएगा। इंदौर जिले में वन विभाग को देने लायक राजस्व जमीन नहीं बची है। धार, झाबुआ और आलीराजपुर में बंजर जमीनें हैं, इसलिए वहां पौधे लगाए जाएंगे। वन विभाग यहां 10 से 20 साल तक मानसून में पौधे लगाएगा।

2.5 लाख पेड़ कटेंगे इस क्षेत्र में, बाघ-तेंदुए का बसेरा उजड़ेगा

इंदौर में बाघ के 5, तेंदुओं के 40 पगमार्क बाघों के पगमार्क की बात करें तो 18 दिसंबर को चोरल में 13, 19 को 6 और 20 को 18 पगमार्क मिले। कुल 37 पगमार्क चोरल में मिले। इंदौर में 5, महू में 7 और मानपुर में 2 पगमार्क मिले। रालामंडल में कोई पगमार्क नहीं मिला। वहीं तेंदुओं के पगमार्क सबसे ज्यादा चोरल में मिले। 18 दिसंबर को 28, 19 को 28 और 20 को 33 पगमार्क मिले। कुल 89 पगमार्क चोरल में दर्ज हुए। इंदौर में 40, महू में 32, मानपुर में 34 और रालामंडल में 3 पगमार्क मिले।

100 साल पुराने पेड़ भी कट जाएंगे

चोरल और महू में 50 से 100 साल पुराने पेड़ काटे जाएंगे। लेकिन उनकी भरपाई के लिए जो जंगल तैयार होंगे, वे कई साल बाद बनेंगे। जंगल की कटाई महू रेंज के ग्राम भगोरा से शुरू होगी। चोरल से बलवाड़ा तक पेड़ काटे जाएंगे। डीएफओ प्रदीप मिश्रा ने बताया, कोशिश रहेगी कि कम से कम पेड़ काटे जाएं। गेज कन्वर्जन के ट्रैक में जो पेड़ आएंगे, सिर्फ उन्हें ही काटा जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *