
भारतीय प्रतिभूति एवं विनियम बोर्ड (सेबी) ने एनडीटीवी के प्रवर्तकों प्रणय रॉय और राधिका रॉय के अलावा आरआरपीआर होल्डिंग पर नियामकीय नियमों के उल्लंघन के लिए कुल 27 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। इन इकाइयों पर यह जुर्माना शेयरधारकों से कुछ ऋण करारों से संबंधित सूचनाओं को छिपाकर विभिन्न नियमों के उल्लंघन के लिए लगाया गया है। आरआरपीआर होल्डिंग नई दिल्ली टेलीविजन लिमिटेड (एनडीटीवी) की प्रमोटर संस्था है।
सेबी के मुताबिक, रॉय दंपती और आरआरपीआर होल्डिंग पर 25 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जिसे ये तीनों संयुक्त रूप से जमा कराएंगे। इसके साथ ही प्रणय और राधिका रॉय से 1-1 करोड़ रुपये का अतिरिक्त जुर्माना भी वसूले जाने का निर्देश दिया गया है। सेबी के 52 पेज के आदेश के अनुसार, कई कर्ज समझौतों में ऐसी शर्तें शामिल की गई हैं, जो एनडीटीवी शेयरधारकों के निजी हितों पर बुरा प्रभाव डालती हैं।
बाजार नियामक ने कहा कि उसने अपनी जांच 2017 में क्वांटम सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड की तरफ से की गई शिकायतों के आधार पर शुरू की थी। क्वांटम सिक्योरिटीज भी एनडीटीवी का शेयरधारक है और उसने आरोप लगाया था कि विश्वप्रधान कॉमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड (वीसीपीएल) के साथ कर्ज समझौते के बारे में शेयरधारकों से तथ्य छिपाकर नियमों का उल्लंघन किया गया है।
ऐसा एक कर्ज समझौता आईसीआईसीआई बैंक के साथ था, जबकि दो अन्य समझौते वीसीपीएल से किए गए थे। सेबी के मुताबिक, 2009 में वीसीपीएल के साथ 350 करोड़ रुपये का कर्ज समझौता किया गया। यह कर्ज आईसीआईसीआई बैंक का कर्ज चुकाने के लिए लिया गया था। इसके एक साल बाद वीसीपीएल से 53.85 करोड़ रुपये का एक अन्य समझौता किया गया।
एक समझौते की कुछ शर्तों के हिसाब से वीसीपीएल को वारंट को इक्विटी शेयर में बदलकर आरआरपीआर होल्डिंग्स के जरिये एनडीटीवी की 30 फीसदी हिस्सेदारी अधिग्रहित करने की इजाजत दी गई है। इससे एनडीटीवी की कार्य पद्धति प्रभावित हो सकती है। रॉय दंपती ने इस मामले में एनडीटीवी के पार्टी नहीं होने का मुद्दा उठाया, लेकिन सेबी के अजूडिकैटिंग अधिकारी ने उनके इस तर्क को खारिज कर दिया।