इंदौर नगर निगम में सामने आए करोड़ों के घोटाले की परतें एक बार फिर खुलने लगी हैं। निगम के ऑडिट विभाग में पदस्थ अधिकारी के खिलाफ आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने जांच शुरू कर दी है। चौंकाने वाली बात यह है कि जिस अधिकारी ने इस मामले की शिकायत की थी, उनकी अब मौत हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद EOW ने जांच को आगे बढ़ाने का फैसला लिया है।
अर्पिता उमड़ेकर की शिकायत पर इओडब्ल्यू ने जांच शुरू की
EOW का साफ कहना है शिकायत दर्ज हो चुकी है, अब जांच को रोका नहीं जा सकता। जांच एजेंसी के पास शिकायत के साथ दिए गए कई अहम दस्तावेज मौजूद हैं, जिनके आधार पर पूरे घोटाले की परतें खुल सकती हैं।
इस मामले में शरद कतरोलिया का नाम पहले भी सामने आ चुका है। पिछले साल उजागर हुए 150 करोड़ के नगर निगम घोटाले के बाद वे कुछ समय तक फरार भी रहे थे। अर्पिता उमड़ेकर की शिकायत पर अब शुरू हुई जांच से दावा किया जा रहा है कि निगम के अंदर चल रहे खेल का बड़ा खुलासा हो सकता है।

ED की जांच पहले से जारी, छापों में मिले सुराग इस बहुचर्चित घोटाले की जांच पहले ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रहा है। घोटाला सामने आने के बाद कई ठिकानों पर छापेमारी की जा चुकी है। ED को मिले दस्तावेज और डिजिटल सबूत अब EOW की जांच के लिए भी अहम साबित हो सकते हैं।
EOW का बड़ा बयान: मौत से नहीं रुकेगी जांच
EOW की एडिशनल एसपी नंदिनी शर्मा ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि शिकायत को विधिवत रजिस्टर किया गया है और जांच लगातार जारी है। उन्होंने कहा “शिकायतकर्ता ने पर्याप्त दस्तावेज दिए हैं। उनकी मृत्यु की जानकारी हमें बाद में लगी, लेकिन इससे केस की जांच पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।”
पांच साल पहले की थी शिकायत नगर निगम के ऑडिट विभाग से रिटायर्ड अर्पिता उमड़ेकर ने करीब पांच साल पहले निगम में पदस्थ शरद कतरोलिया, सहायक संचालक स्थानीय निधि संपरीक्षा के खिलाफ आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) में शिकायत की थी।
शिकायत के साथ लगाए गए भ्रष्टाचार से जुड़े दस्तावेजों की जांच के बाद अब जाकर EOW ने मामले में औपचारिक जांच शुरू कर दी है। हालांकि इस बीच अर्पिता उमड़ेकर की मौत हो चुकी है। अब उनके पति विलास उमड़ेकर न्याय की मांग कर रहे हैं।
दो बार बयान का बुलावा, तब खुला जांच का राज

ईमानदार थीं अर्पिता, कमीशन के लिए बनाया जाता था दबाव पति विलास उमड़ेकर का दावा है कि उनकी पत्नी नगर निगम में ईमानदार कर्मचारियों में गिनी जाती थीं।उन्होंने आरोप लगाया कि वरिष्ठ अधिकारी उन्हें कमीशनखोरी के लिए दबाव डालते थे, लेकिन मेरी पत्नी ने कभी भ्रष्टाचार में सहयोग नहीं किया।
उन्होंने कहा कि अर्पिता अपने खिलाफ कार्रवाई से डरती थीं। इसी वजह से उन्होंने नौकरी से रिटायर होने के बाद वरिष्ठ अधिकारी शरद कतरोलिया के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के साथ उन्होंने भ्रष्टाचार से जुड़े अहम दस्तावेज भी लगाए थे।
पति की दो टूक मांग
विलास उमड़ेकर ने कहा मेरी पत्नी भ्रष्टाचार के खिलाफ न्याय के लिए लड़ रही थीं। अगर जांच में अधिकारी दोषी पाया जाता है, तो उस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

इओडब्ल्यू ने अर्पिता उमड़ेकर को बयान के लिए बुलाया। लेकिन इससे पहले ही उनकी मौत हो चुकी थी।

ऐसे हुआ फर्जी बिल घोटाला
नगर निगम में जो काम हुए ही नहीं, ठेकेदारों ने अधिकारी-कर्मचारियों की मिलीभगत से उन कामों के दस्तावेज और बिल पर तैयार कर पेमेंट ले लिया। ऐसे एक नहीं कई मामले हैं। ये भी साल 2022 के पहले के हैं।
मास्टर माइंड इंजीनियर अभय राठौर (अभी जेल में है) ने नगर निगम में असिस्टेंट इंजीनियरों के नाम से फर्जी फाइलें बनाई। फिर इसमें फर्जी वर्कऑर्डर हुए। फिर एग्जीक्यूटिव इंजीनियरों और सुपरवाइजिंग इंजीनियरों के साइन हुए। इसी कड़ी में अपर कमिश्नर के भी फर्जी साइन हुए।

फिर बिल अकाउंट विभाग में लगाए गए और यहां भी फर्जी तरीके से ही पेमेंट हो गया। यह पूरा काम ठेकेदारों की मिलीभगत से हुआ था। उन्होंने ड्रेनेज के कामों को लेकर फर्जी बिल दिए थे जबकि काम ही नहीं हुए थे