इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से फैली बीमारी ने अब सिर्फ सेहत ही नहीं, बल्कि लोगों की रोजी-रोटी पर भी गहरा असर डाल दिया है। अब तक 18 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। हालात ऐसे हैं कि इलाके में रहने वाले लोग पानी उबालकर पीने को मजबूर हैं।
भागीरथपुरा मामले का असर छोटे कारोबारियों पर पड़ा है।
डर का माहौल इस कदर है कि एक परिवार ने तो भागीरथपुरा छोड़कर अपने शहर लौटने की तैयारी शुरू कर दी है। दूषित पानी के कारण लोगों की दिनचर्या पूरी तरह बदल गई है। इसका सबसे ज्यादा असर खाने-पीने से जुड़े छोटे कारोबारियों पर देखने को मिल रहा है।
फास्ट फूड, चाय-नाश्ता और ठेले-खोमचे लगाने वालों की दुकानें कई दिनों तक पूरी तरह बंद रहीं। कुछ दुकानदारों ने दुकानें खोल तो ली हैं, लेकिन ग्राहकी न के बराबर है। लोग बाहर का खाना खाने से बच रहे हैं, जिससे कारोबार लगभग ठप हो गया है।
दुकानें बंद रहने और ग्राहकों की कमी का सीधा असर दुकानदारों की आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है। कई छोटे व्यापारी रोज का खर्च निकालने के लिए जूझ रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक पानी को लेकर भरोसा नहीं बनता, तब तक हालात सुधरने की उम्मीद कम है।
बता दें, इंदौर में मंगलवार रात तक की स्थिति में 99 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं। 16 आईसीयू में हैं, जिनमें से 3 वेंटिलेटर पर हैं। अब तक 429 लोग भर्ती हुए थे। जिनमें से मंगलवार शाम तक की स्थिति में 330 डिस्चार्ज हो चुके हैं।
अब जानिए, कैसे प्रभावित हुआ कारोबार

31 दिसंबर-1 जनवरी पर होती सबसे ज्यादा कमाई भागीरथपुरा में फास्ट फूड की दुकान संचालित करने वाले राजवीर सिंह कुशवाह ने बताया कि मैं चायनीज आइटम की शॉप लगाता हूं। बर्गर, पिज्जा, सैंडविच, मंचूरियन बनाकर बेचता हूं। यह मामला सामने आने के बाद पिछले एक-डेढ़ हफ्ते से दुकान बंद ही थी। पानी खराब आ रहा था। हमारे आइटम्स में से कुछ पानी से ही बनते हैं।
माहौल भी ऐसा था कि दुकान बंद रखना बेहतर लगा। नए साल पर 31 दिसंबर और 1 जनवरी को सबसे ज्यादा ग्राहकी होती, लेकिन 28 दिसंबर से 5 जनवरी तक दुकान बंद रही। अब 6 जनवरी को दुकान तो खोल तो ली, लेकिन ग्राहक नहीं आ रहे हैं। इस पूरे मामले का हमारे बिजनेस पर खराब असर हुआ है। हालांकि, उम्मीद है कि जल्द स्थिति बेहतर होगी।

8-10 दिनों से ठेला ही नहीं लगा पा रहे भागीरथपुरा में पानीपुरी, चाट का ठेला लगाने वाले महेश हार्डिया ने बताया कि 8 से 10 दिनों से दुकान बंद हैं। अधिकारी यहां घूमते हैं। उसके कारण ठेला चला नहीं पा रहे हैं। पानी गंदा आया था उसके कारण प्रशासन ने कहा था ठेला बंद कर दो। पानी की समस्या के कारण 8 से 10 दिनों से काम बंद है।
कई लोग अब ठीक भी हो गए हैं। हम 700-800 रुपए रोज कमाते थे, जिसका नुकसान हो रहा है। अब क्या करें, हमारा तो रोज कमाओ रोज खाओ वाला काम है। जो थोड़ी बहुत सेविंग है, उससे काम चल रहा है। ठेला चालू हो जाए तो हमारा काम चालू हो जाएगा।

अब पहले की तरह नहीं हो रही ग्राहकी इलाके में नाश्ते की दुकान संचालित करने वाली महिला सीमा सिकरवार का कहना है कि दूषित पानी के कारण व्यापार पर असर हुआ है। दूषित पानी के कारण पहले की तरह ज्यादा ग्राहकी नहीं हो पा रही है। पिछले कई दिनों से ये समस्या है। थोड़ा बहुत ही काम चल रहा है। बोरिंग का पानी ही हम इस्तेमाल कर रहे हैं।

भागीरथपुरा से कर रहे पलायन, लौटेंगे सागर महिला रोशनी कोरी ने बताया कि हम कपड़े की दुकान पर काम करते हैं। दूषित पानी के कारण यहां से पलायन कर रहे हैं। कई दिनों से खराब पानी आ रहा है। बेटे परीक्षित कोरी की तबीयत ज्यादा खराब हो गई थी, अब वह ठीक है।
सास की भी तबीयत खराब हुई है। परिवार में पति-पत्नी, सास और दो बच्चे हैं। हम यहां पिछले 8-9 महीने से किराए के मकान में रह रहे थे, लेकिन अब यहां से वापस सागर जा रहे हैं।
