
“??””””जटाधरं पाण्डुराङ्गं शूलहस्तं कृपानिधिम् ।””
“””””सर्वरोगहरं देवं दत्तात्रेयमहं भजे ॥”””””??
?–?दिगम्बरा दिगम्बरा श्री पद वल्लभ दिगम्बरा?-?
?प्राचीन हनुमान मंदिर मुकेरिपुरा इंदौर ।
?पं बद्रीप्रसाद जी पुजारी ज्यौतिष संस्थान ।? संस्थापक स्व. पं राधेश्याम जी शर्मा
?मार्गशीर्ष (अगहन) मास शुक्ल पूर्णिमा
व्रत पूर्णिमा ,दत्तात्रेय जी जयंती 29-12-20 मंगलवार
?सूर्य उदयात तिथि चतुर्दशी–सुबह 7-53 मिनट तक ।
?पूर्णिमा तिथि प्रारंभ– सुबह 7-54 मिनट से —
?मंगलवार व मंगल स्वामी नक्षत्र मृगशिरा का योग शाम 5-31 मिनट तक —
? व्रत की पूर्णिमा व श्राद्ध पूर्णिमा व राजाधिराज योगीराज सद्गुरू श्री दत्तात्रेय जी जयंती का महापर्व– 29-12-20 मंगलवार को है।
?पूर्णिमा का व्रत करने वाले – 29-12-20 मंगलवार को करे ।
??30-12-20 बुधवार— कै सूर्य उदयात तिथि पूर्णिमा है जो सुबह 8-57 मिनट तक है । देव कार्य, पौष स्नान व्रत का प्रारंभ की पूर्णिमा 30 तारिख को है ।
?मार्ग शीर्ष मास शुक्ल पक्ष पूर्णिमा को प्रदोष काल मे मृगशिरा नक्षत्र मे – भगवान नारायण के षष्ठ अवतार -महायोगीश्वर गुरू देव दत्तात्रेय जी अवतरण चित्र कूट मे हुआ ।
?–?दिगम्बरा दिगम्बरा श्री पद वल्लभ दिगम्बरा?-?
?श्रीमद्भागवत में आया है कि पुत्र प्राप्ति की इच्छा से महर्षि अत्रिके व्रत करने पर ‘दत्तो मयाहमिति यद् भगवान् स दत्तः’ मैंने अपने-आपको तुम्हें दे दिया-विष्णु जी के ऐसा कहने से भगवान विष्णु जी ही अत्रि के पुत्र रूप में अवतरित हुए और दत्त कहलाए। अत्रिपुत्र होने से ये आत्रेय कहलाते हैं। आज भी चित्रकूट धाम मे अनुसुइया जी का आश्रम है जहा भगवान का प्रकाट्य हुआ। रामावतार मे भगवान राम ने वनवास के समय अनुसुइया जी के आश्रम पर जाकर भेट की व सीता माता को माता अनुसुइया जी ने दिव्य आभूषण भेट किये ।
?श्री दत्तात्रेय की जयंती पर — प्रात काल तीर्थ स्नान तर्पण करके नित्य कर्म से निर्वत होकर सदाचार रहकर दिन व्यतीत करे । सूर्यास्त से 3 घडी ( 1-12 मिनट) पहले स्नान करके – शुद्ध चित व शुद्ध वस्त्रो को धारण करके पूजन की तैयारी करके — सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल मे
भगवान दत्तात्रेय जी का प्रतिमा यंत्र , शलिग्राम जी या चल चित्र या गुरू चरण पादुका पर आवाहन पूजा अभिषेक श्रृंगार भोग आरती करे । षोडशोपचार, राजोपचार अंग पूजा करे । अष्टोत्तर नाम अर्चना करे ।
?भगवान दत्तात्रेय जी के गुरू चरित्र या नारद पुराण के अंतर्गत दत्तात्रेय स्रोत या दत्तस्तवन का पाठ करे ।
?नारद पुराण के अनुसार भगवान दत्तात्रेय जीवन-मरण के चक्र से मुक्त हैं और आज भी योगबल से संसार में भ्रमण करते हैं। । दत्तात्रेय प्रतिदिन प्रातः काशी में गंगा-स्नान करते हैं। कोल्हापुर में नित्य जप और माहुरीपुर में भिक्षा ग्रहण करते हैं।सह्याद्रि की कन्दराओं में यह विश्राम किया करते हैं।
?तन्त्र शास्त्रके मूल ग्रन्थ रुद्रयामल के हिमवत् खण्ड में इस बात का उल्लेख किया गया है कि दत्तात्रेय भगवान का मन से स्मरण चितंण करने मात्र से भक्तों के कष्ट दूर करते हैं। इसलिए इन्हें स्मृतिगामी भी कहा जाता है।
? भगवान दत्तात्रेय प्रातः काल में ब्रह्मा रूप दोपहर में विष्णु रूप में तथा शाम के समय शिव रूप में समाहित रहते हैं।
?गिरनार क्षेत्र् श्री दत्तात्रेयजी का सिद्धपीठ् है। जहा गिरनार पर्वत पर भगवान दत्तात्रेय जी ने दस हजार वर्षों तक खडे होकर तपस्या करी , आज भी वहा प्रभु के श्री चरणों के दर्शन होते है ।
माउंट आबू मे गुरू शिखर पर्वत श्री दत्तात्रेयजी का सिद्धपीठ् है।व पूर्ण भारत वर्ष मे भगवान दत्तात्रेय जी के सिद्ध स्थान है ।
?शैव पंथ के अनुयायी व साधु संत नागा साधु व जूना अखाड़ा के अधिष्ठात्री भगवान है ।
? वैष्णव पंथ के अनुयायी भगवान विष्णु का अंशावतार मानते हैं।
? दत्तात्रेय जी को नाथ संप्रदाय की नवनाथ परंपरा का भी अग्रज माना गया है। यह रसेश्वर संप्रदाय के प्रवर्तक भी दत्तात्रेय है । भगवान दत्तात्रेय से वेद और तंत्र मार्ग का विलय कर एक ही संप्रदाय बनाया है ।
?दत्तात्रेय भगवान को– गुरू – सद्गुरु– आचार्य – योगीराज- योगेश्वर– अवधूत — नाम से संबोधित किया जाता है ।
?तंत्र –मंत्र– ज्योतिष — व समस्त विद्या को सिद्ध करने के लिए दत्तात्रेय जी की उपासना करना चाहिए।
?इंद्र को देवताओं का राजा बनाने हैतु गुरूवर आचार्य योगीराज अवधूत जी ने समस्त विद्यायो का ज्ञान दिया । इस
ज्ञान के ग्रंथ का नाम बृहद् इन्द्रजाल है जो आज भी उपलब्ध है ।
?दत्तात्रेयाय विद्महे। अवधूताय धीमहि। तन्नो दत्तः प्रचोदयात्।
?आदौ ब्रह्मा मध्ये विष्णुरन्ते देवः सदाशिवः
मूर्तित्रयस्वरूपाय दत्तात्रेयाय नमोस्तु ते।
ब्रह्मज्ञानमयी मुद्रा वस्त्रे चाकाशभूतले
प्रज्ञानघनबोधाय दत्तात्रेयाय नमोस्तु ते।।?
?जो आदि में ब्रह्मा, मध्य में विष्णु तथा अन्त में सदाशिव है, उन भगवान दत्तात्रेय को बारम्बार नमस्कार है। ब्रह्मज्ञान जिनकी मुद्रा है, आकाश और भूतल जिनके वस्त्र है तथा जो साकार प्रज्ञानघन स्वरूप है, उन भगवान दत्तात्रेय को बारम्बार नमस्कार है।
?आप महापर्व पर भगवान दत्तात्रेय जी की आराधना करे । गुरू ग्रह की पीडा हो तो जप पूजन दान करे ।
?मंदिर पुजारी पं राजाराम शर्मा 9826057023
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