इंदौर में बीआरटीएस को तोड़ने में हो रही लेतलाली को लेकर लगी जनहित याचिका पर सोमवार को हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। इसमें अधिकारियों द्वारा दिए गए तर्कों को लेकर कोर्ट ने नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। इसके साथ ही दो हफ्ते में स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को को कहा है।

दरअसल मामले व ट्रैफिक के अन्य मुद्दों को लेकर जनहित याचिकाएं दायर हैं जिन पर सुनवाई हुई। बीआरटीएस के मामले में अधिकारियों ने सफाई दी कि रेलिंग तोड़ने वाला कॉन्ट्रेक्टर फिर भाग गया है। उसे नोटिस दिए गए हैं लेकिन वह सुन नहीं रहा है। इस पर सीनियर एडवोकेट अजय बागड़िया ने कहा कि ठेकेदार को भी इसमें अगली सुनवाई में बुलाया जाना चाहिए। हर बार यही दोहराया जाता है कि कि ठेकेदार काम नहीं कर रहे हैं। एक साल होने को है और बीआरटीएस की रेलिंग तक अधिकारी नहीं हटवा सके हैं।
एलिवेटेड कॉरिडोर का काम भी अटका सुनवाई में अधिकारियों के स्टेटस रिपोर्ट में सफाई दी गई कि एलिवेटेड कॉरिडोर के चलते एलआईजी से नवलखा तक काम रुका है। इस पर बागड़िया ने कहा कि यह प्रोजेक्ट को कांग्रेस सरकार के समय 2019 का है और फिर इसमें वर्तमान सीएम डॉ. मोहन यादव तो शुरूआत कर चुके हैं, ऐसे में यह तो सिर्फ मामला सरकारी विभागों का है। हाईकोर्ट ने दिखाई सख्ती कोर्ट ने निर्देश दिए कि दो हफ्ते में बीआरटीएस की रेलिंग हटाई जाए। साथ ही अगली सुनवाई 19 जनवरी को तीनों अधिकारियों के साथ ही अब कॉन्ट्रेक्टर, पीडब्ल्यूडी चीफ इंजीनियर, एक्जीक्यूटिव इंजीनियर को भी तलब किया गया है। सुनवाई में कलेक्टर शिवम वर्मा, ट्रैफिक डीसीपी आनंद कलादगी और निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल उपस्थित हुए। अन्य जनहित याचिकाओं में एडवोकेट मनीष यादव, शिरिन सिलावट आदि उपस्थित थी। डीसीपी ने नोडल अधिकारी ही नियुक्त नहीं किया इस मामले में हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि सभी विभाग नोडल अधिकारी नियुक्त करेंगे जो हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त वकीलों की कमेटी के साथ डिस्कस करेंगे, लेकिन पहले कहा गया कि ट्रैफिक डीसीपी ने नोडल अधिकारी ही नियुक्त नहीं किया। जब इस पर नाराजगी जताई गई कि एक माह में नोडल अधिकारी तक नहीं नियुक्त कर सके तो फिर जवाब दिया गया कि बना दिया है लेकिन कमेटी को सूचित नहीं कर सके। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की। धार्मिक अतिक्रमण पर दो एक्शन रिपोर्ट सुनवाई में अवैध कब्जा कर ट्रैफिक को बाधित करने वाले अवैध धर्मस्थलों को चिन्हित करने पर बताया गया कि चार ही हैं। इस पर याचिकाकर्ता की ओर आपत्ति लेते हुए कहा कि इसका मतलब है कि हाईकोर्ट के आदेश को ही नहीं पढ़ा है जिसमें पूरे शहर में चिन्हित करने और हटाने के लिए कहा गया था। इस पर कोर्ट ने कलेक्टर को दो हफ्तों में एक्शन रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा गया। हाईकोर्ट ने अपने अक्टूबर 2019 के पुराने आदेश को लेकर भी कहा कि 24 घंटे ट्रैफिक लाइट चालू रहना चाहिए। बैटरी बैकअप व्यवस्था होना चाहिए अभी लाइट जाते ही हालत खराब होती है। इसके लिए शासन क्या कर रहा है, इस पर जवाब मांगा गया।