वाराणसी के विश्वप्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट के एक हिस्से को तोड़ा जा रहा है। यहां रखी मूर्तियों में भी टूट-फूट हुई है। यह जानकारी लगने के बाद खासगी देवी अहिल्याबाई होलकर चैरिटीज ट्रस्ट के प्रेसीडेंट यशवंतराव होलकर तृतीय आज घाट पर पहुंचे। उन्होंने प्रतिमाओं की पूजा कर सफेद कपड़े से ढंक दिया ताकि उन्हें नुकसान न पहुंचे।
वाराणसी के घाट पर प्रतिमाओं की पूजा कर कपड़े से ढंकते यशवंतराव होलकर।
उन्होंने वाराणसी के निगमायुक्त, संभागायुक्त और अन्य अफसरों से मुलाकात कर वस्तुस्थिति बताई। यशवंतराव होलकर ने कहा कि क्षतिग्रस्त मूर्तियां हमें सौंप दी जाए, ताकि हम उन्हें यहां फिर से स्थापित कर सकें, जिससे लोगों की श्रद्धा बनी रहे।
वाराणसी के कलेक्टर सत्येंद्र ने कहा कि घाट की मूर्तियों को नुकसान नहीं पहुंचाया गया है। उन्हें सुरक्षित रखा गया है। कुछ लोग AI से घाट के गलत वीडियो बनाकर जारी कर रहे हैं। ऐसे लोगों को ट्रेस किया जा रहा है।
मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार के लिए हर साल लाखों लोग आते हैं। जगह की कमी रहती है और सफाई व्यवस्था बनाए रखने में कठिनाई आती है। उन समस्याओं को देखते हुए परियोजनाओं को विकसित किया गया है।
प्रशासन ने इस मामले में स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद मूर्तियों को उसी स्थान पर लगाया जाएगा। मणिकर्णिका का घाट पर कलाकृतियां को संरक्षित कराया गया है। जो इसे लेकर भ्रम फैला रहे हैं उन्हें चिह्नित किया जा रहा है। आवश्यकता पड़ने पर उन पर कार्रवाई भी की जाएगी।

यशवंतराव बोले- घाट की हालत खराब, हमने मांगी प्रतिमाएं इधर, यशवंतराव होलकर ने वाराणसी से वीडियो जारी कर घटनाक्रम के बारे में बताया और कहा कि स्थानीय प्रशासन से पूरा सहयोग मिल रहा है। वीडियो में उन्होंने आगे कहा कि ‘मणिकर्णिका घाट पर मां अहिल्या देवी द्वारा विकसित घाट की तोड़फोड़ के बाद आज मैं यहां काशी आया हूं।
आज उसकी हालत क्या हो गई है, मेरे पीछे देख सकते हैं। स्थानीय प्रशासन संभागायुक्त और निगमायुक्त से मुलाकात कर घटनाक्रम की जानकारी दी है। मैंने उनसे मांग की है कि इस घटना की जांच की जाए। जो जिम्मेदार लोग हैं, उन पर कार्रवाई की जाए।
ये सबसे महत्वपूर्ण बात है कि मां साब की चार प्राचीन प्रतिमा जो मां साब ने खुद स्थापित की थी, अब दो बची है। तोड़फोड़ के बाद सरकार ने उन प्रतिमाओं को सुरक्षित कर लिया है।
हमने प्रशासन से मांग की है कि इन प्रतिमाओं को खासगी ट्रस्ट को सौंप दिया जाए। ताकि हम सही ढंग से उन्हें मंदिर में रख सकें।
अफसरों ने हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है।
हम मां से प्रार्थना करते हैं कि जिन लोगों ने ये गलती की है उन्हें माफ करें। और हम इस प्राचीन घाट को फिर से बनाएं।’

इंदौर के इतिहासकार बोले- देवी अहिल्या द्वारा विकसित घाटों में ये प्रमुख इंदौर के इतिहासकार और समाजसेवी सुनील मतकर ने दैनिक भास्कर को बताया कि देवी अहिल्या बाई होलकर ने देशभर में कई घाटों का निर्माण और मंदिरों का पुनर्निर्माण कराया है। इनमें मणिकर्णिका घाट प्रमुख है। देवी अहिल्या बाई होलकर द्वारा विकसित किए जाने के कारण इसके लिए हमारी आस्था और बढ़ जाती है।
प्रशासन द्वारा यहां जो कार्रवाई की गई है हम उसका विरोध करते हैं। मूर्तियों को संरक्षित किया जाए और इन्हें फिर से स्थापित किया जाए इसके लिए क्षत्रिय धनगर समाज की ओर से गुरुवार शाम को बैठक रखी गई है। इसमें हम आगे की रणनीति तय करेंगे।
यह है पूरा मामला
वाराणसी के मणिकर्णिका महाश्मशान घाट के पुनर्विकास का कार्य चल रहा। संस्था ने घाट पर निर्माण का कार्य शुरू किया है। इस बीच पक्के घाटों के पत्थरों को तोड़ा जा रहा है। उन्हें बड़ी नाव की मदद से गंगा पार भेजा जा रहा।
वहीं, इस कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि वहां मौजूद 300 साल पुरानी मणि (पत्थर की बनी हुई संरचना) भी हटाई गई है। लोगों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया। लेकिन, प्रशासन ने लोगों को समझा-बुझाकर कर शांत कराया। विरोध की सूचना मिलने पर मौके पर पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची।

अब जानिए क्या है प्रोजेक्ट
18 करोड़ से मिलेगा नया स्वरूप
मणिकर्णिका का पुनर्विकास कार्य CSR फंड से 18 करोड़ रुपए में किया जाना है। इससे नगर निगम की देख-रेख में कार्यदायी संस्था बना रही है। संस्था के अधिकारियों के अनुसार, 29 हजार 350 वर्गमीटर एरिया में काम कराया जाना है। यहां की मिट्टी दलदली है। इसलिए 15 से 20 मीटर नीचे तक पाइलिंग कराई गई है। सख्त मिट्टी तक पाइलिंग का काम किया गया है। जिससे बाढ़ में यहां के निर्माण में किसी भी तरह की दिक्कत न हो।
25 मीटर ऊंची चिमनी बनेगी ताकि घरों तक न पहुंचे राख
इस श्मशान घाट पर 25 मीटर ऊंची चिमनी लगाई जाएगी। जिससे चिता की रखा हवा के साथ उड़ जाए और आसपास रहने वाले लोगों के घरों में न जाए। कायाकल्प में शवों के स्नान के लिए पवित्र जलकुंड, अपशिष्ट ट्रॉलियां, मुंडन क्षेत्र होंगे।
चारों तरफ से कवर दाह संस्कार क्षेत्र में पांच बर्थ, सर्विस एरिया, अपशिष्ट संग्रह की व्यवस्था, सीढ़ियां, वेटिंग एरिया, भूतल पर पंजीकरण कक्ष, खुले में दाह संस्कार के लिए 18 प्लेटफॉर्म, लकड़ी भंडारण क्षेत्र, सामुदायिक प्रतीक्षाकक्ष, दो सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया जाएगा। यहां पूरा निर्माण कार्य चुनार और जयपुर के पत्थरों से किया जाएगा।

84 प्रमुख घाटों में शामिल है मणिकर्णिका
मणिकर्णिका काशी के 84 प्रमुख घाटों में शामिल है। यह देवी अहिल्याबाई होल्कर के बनाए 5 घाटों में से एक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी जगह पर भगवान विष्णु की मणि गिरी थी, जिससे इसका नाम मणिकर्णिका पड़ा।
घाट पर पारंपरिक स्थापत्य, ऐतिहासिक शिल्पकला और धार्मिक आस्था जुड़ी हुई है। देवी अहिल्याबाई ने यहां तीर्थयात्रियों के लिए कई सुविधाओं का विकास कराया था।

घाट के एक हिस्से को ध्वस्त कर दिया गया है। यहां बड़ी-बड़ी ड्रिल मशीनें तोड़फोड़ कर रही हैं।
