
दूषित पानी को लेकर जहां पूरे प्रदेश में विशेष सतर्कता बरती जा रही है, वहीं सम्राट विक्रमादित्य विवि में जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते अध्ययनशालाओं में लगे वाटर कूलर की सफाई तक नहीं हो पाई है। स्थिति यह है कि कुछ वाटर कूलर के अंदर चूहों की गंदगी और मकड़ी के जाले नजर आ रहे हैं।
दो दिन पहले ही गुरुवार को एनएसयूआई ने विवि परिसर स्थित अध्ययनशालाओं की जांच की थी, तब कॉमर्स डिपार्टमेंट के वाटर कूलर के अंदर छिपकली चलते हुई मिली थी। कई अन्य अध्ययनशालाओं में भी वाटर कूलर में सफाई नहीं थी।
अध्ययनशालाओं में कुछ जगह तो सफाई हुई, लेकिन सभी वाटर कूलर की सफाई को लेकर जिम्मेदारों ने गंभीरता नहीं दिखाई। वाग्देवी भवन में ही एक वाटर कूलर का ढक्कन खोलने पर उसमें पानी के ऊपर मकड़ी के जाले दिखाई दिए।
वाटर कूलर के नल से पानी भी आ रहा था। ऐसे में अगर कोई यह पानी पी ले तो उसके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। वहीं एक वाटर कूलर में चूहों की गंदगी पड़ी थी। कुछ वाटर कूलर के आसपास इतनी गंदगी जमा है कि वहां मच्छर व अन्य सूक्ष्म जीव पानी के आसपास मंडराते रहते हैं।
एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष हिमांशु शर्मा ने बताया कई डिपार्टमेंट ऐसे हैं, जहां वाटर कूलर बंद पड़े है। स्वच्छ पानी मिले और सभी विभागों में वाटर कूलर से पानी सप्लाई करने की मांग को लेकर जल्द आंदोलन किया जाएगा।
स्वच्छ पानी उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए इधर, कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज के आदेश पर कुलसचिव डॉ. अनिलकुमार शर्मा ने शनिवार को सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए कि वे विद्यार्थियों के लिए पीने का स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाने की व्यवस्था करें। यदि पानी का वाटर प्यूरीफायर आरओ खराब है तो उसे ठीक करवाएं। कुलसचिव ने बताया विभागाध्यक्षों को सफाई की व्यवस्था के निर्देश दिए है।