दावोस WEF में भारत का झंडा नदारद, पाकिस्तान तीसरे नंबर पर: इंदौर की बेटी डॉ. रोहिणी घावरी ने सरकार से पूछा सवाल, पीएमओ को किया टैग

यूनाइटेड नेशंस (यूएन) में जय श्री राम का नारा लगाकर और भारत के दलितों की तुलना दूसरे देशों से बेहतर बताकर चर्चाओं में आई पीएचडी स्कॉलर और इंदौर की बेटी डॉ. रोहिणी घावरी ने रविवार को सरकार से सवाल पूछा है। रोहिणी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सरकार से पूछा है कि दावोस (स्विट्जरलैंड) में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) में भारत का प्रतिनिधित्व बेहतरीन होता है, पर वहां हमारा झंडा नहीं है।

दावोस से रोहिणी

दावोस में भारत का प्रतिनिधित्व बेहतरीन होता है लेकिन फिर भी इस बार दावोस के मेन कांफ्रेंस हॉल जहां पर ट्रम्प और अन्य नेताओं ने काॅन्फ्रेंस की वहां पर भारत का झंडा नहीं था !! क्या वजह हो सकती है

पाकिस्तान जैसे देश का झंडा तीसरे नंबर पर था लेकिन भारत का नहीं क्यों?

रोहिणी ने कहा कि भारत का झंडा नहीं होने से ज्यादा निराशा पाकिस्तान का झंडा होने से मिली। दावोस और WEF में पाकिस्तान का मुकाम भारत की तुलना में बहुत कम है।

रोहिणी ने इस ट्वीट को पीएमओ के साथ को भी टैग किया है। रोहिणी ने उस जगह का फोटो भी शेयर किया है।

रोहिणी  इसमें कोई शक नहीं कि यहां भारत को नई उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है। पूरी दुनिया भारत की ओर देख रही है, और जल्द ही यूरोपियन यूनियन के साथ मदर ऑफ ऑल डील्स करने जा रही है। ताकि यूरोपीय देशों की चीन पर निर्भरता कम की जा सके।

रोहिणी ने आगे कहा कि वहां भारत के अलग-अलग राज्यों के दस मुख्यमंत्री भी शामिल हुए, जो WEF में हमारी ताकत दिखाता है। लेकिन दावोस (स्विट्जरलैंड) में जहां विश्व के सभी नेता, उद्योगपति और नीति-निर्माता हर साल वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की बैठक के दौरान संबोधित करते हैं, उस कांग्रेस सेंटर पर भारत का झंडा नहीं होना निराशाजनक रहा है।

रोहिणी ने अपने पीछे दावोस कांग्रेस सेंटर का फोटो भी शेयर किया। इसमें पाकिस्तान का झंडा तीसरे नंबर पर है। जबकि भारत का झंडा कहीं नहीं है।

इंदौर में वाल्मिकी परिवार की बेटी हैं डॉ. रोहिणी घावरी

डॉ. रोहिणी घावरी इंदौर की रहने वाली हैं और वाल्मीकि समुदाय से आती हैं। उनके पिता इंदौर के एक बीमा अस्पताल में सफाई कर्मचारी के पद पर कार्यरत हैं। बेहद साधारण बैकग्राउंड से आने के बावजूद रोहिणी ने शिक्षा और आत्मविश्वास के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई।

उन्होंने स्विट्जरलैंड की एक यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा प्राप्त की और पीएचडी के लिए एक करोड़ रुपए की स्कॉलरशिप भी हासिल की थी।

उन्होंने बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में पीएचडी की है। इससे पहले उन्होंने इंस्टीट्यूट ऑफ कॉमर्स से फॉरेन ट्रेड में बीबीए किया और उसके बाद इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट से मार्केटिंग में एमबीए की पढ़ाई की थी।

रोहिणी बीते पांच सालों से स्विट्जरलैंड में यूएन में स्कॉलर हैं और एक NGO भी चला रही हैं, जो सामाजिक मुद्दों पर काम करता है। साल 2019 में वह पढ़ाई के सिलसिले में विदेश गई थीं और वहीं से उनका संपर्क यूपी के नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद से हुआ। इसके बाद दोनों के बीच विवाद हुआ और रोहिणी ने आत्महत्या की धमकी दी थी।

दावोस का मेन कान्फ्रेंस हॉल

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *