चीन की सेना में बड़ी उथल-पुथल: शी जिनपिंग ने सबसे ताकतवर जनरल झांग यूक्सिया को हटाया, तख्तापलट की साजिश की अटकलें तेज

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपने सबसे ‘करीबी दोस्त’ और चीन के सबसे ताकतवर जनरल झांग यूक्सिया को पद से हटा दिया है। झांग, चीन की ‘सेंट्रल मिलिट्री कमीशन’ यानी CMC के वाइस चेयरमैन थे।

इससे पहले भी CMC के 4 जनरलों को पद से हटाया जा चुका है। कहा जा रहा है कि झांग, बाकीझांग CMC के वाइस चेयरमैन थे। यानी जिनपिंग के बाद ‘पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के सर्वेसर्वा झांग ही थे। जनरलों के साथ मिलकर जिनपिंग के तख्तापलट की साजिश रच रहे थे। इनमें से कुछ जनरल मार दिए गए हैं।

आखिर कौन हैं झांग यूक्सिया जिन्हें जिनपिंग ने पद से हटाया, क्या वाकई जिनपिंग के तख्तापलट की साजिश चल रही, उनके बाद चीन की सत्ता का दावेदार कौन होगा; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में…

झांग CMC के वाइस चेयरमैन थे। यानी जिनपिंग के बाद ‘पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के सर्वेसर्वा झांग ही थे।

सवाल-1: कौन हैं जनरल झांग यूक्सिया, जिन्हें चीनी सेना में टॉप पद से हटाया गया?

जवाब: चीन में सिंगल पार्टी सिस्टम है। आमतौर पर

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना यानी CCP का जनरल सेक्रेटरी ही राष्ट्रपति और चीन की सेना पर कंट्रोल करने वाले सेंट्रल मिलिट्री कमीशन यानी CMC का चेयरमैन होता है। जिनपिंग के पास अभी ये तीनों पद हैं। उनके बाद झांग CMC के वाइस चेयरमैन थे।

झांग, जिनपिंग के पुराने करीबी और दोस्त रहे हैं। झांग के पिता झांग झोंगसुन और जिनपिंग के पिता सही झोंगशुन दोनों चीन के शानक्सी प्रांत के वेनान इलाके के रहने वाले थे। 1949 में माओ जेडोंग की अगुआई में हुई चीनी क्रांति के दौरान दोनों सेना में जनरल थे। इस क्रांति के चलते ही चीन पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना बना था।

चीनी क्रांति के दौरान के एलीट क्लास के नेता और टॉप सैन्य अफसरों के बेटों को ‘प्रिंसलिंग’ यानी ‘छोटा राजकुमार’ कहा जाता है। झांग भी ऐसे ही एलीट क्लास के एक राजकुमार थे। 1968 में 18 साल की उम्र में झांग चीनी सेना में शामिल हुए। 1979 के चीन-वियतनाम युद्ध में झांग भी मोर्चे पर भेजे गए और इसके बाद तेजी से उनकी तरक्की होने लगी।

राजकुमार’ कहा जाता है। झांग भी ऐसे ही एलीट क्लास के एक राजकुमार थे। 1968 में 18 साल की उम्र में झांग चीनी सेना में शामिल हुए। 1979 के चीन-वियतनाम युद्ध में झांग भी मोर्चे पर भेजे गए और इसके बाद तेजी से उनकी तरक्की होने लगी।

अगस्त 2000 में झांग 13वीं ग्रुप आर्मी के कमांडर बने और 2011 में चीनी जनरल के पद तक पहुंचे। 2012 में जब जिनपिंग राष्ट्रपति बने, तो उन्होंने झांग को चीनी जनरल आर्मामेंट डिपार्टमेंट यानी चीनी हथियारों के विभाग का प्रमुख बनाया।

अक्टूबर 2017 में वे पार्टी की सबसे ताकतवर सेंट्रल कमेटी यानी पोलित ब्यूरो के मेंबर और CMC के वाइस चेयरमैन बने। 2020 में झांग 70 साल के हो गए, ये चीन में आर्मी ऑफिसर्स के रिटायर होने की उम्र होती है, लेकिन जिनपिंग ने उन्हें पद पर बनाए रखा।

2023 में जिनपिंग को तीसरी बार राष्ट्रपति बनाने में जनरल झांग ने मदद की थी, लेकिन फिर उनके जिनपिंग से मतभेद गहरे होते गए। इस समय तक झांग ही PLA में बड़े फैसले ले रहे थे।

जनरल झांग और CMC के एक और जनरल लियू कई महीनों से कम्युनिस्ट पार्टी की बैठकों से गायब रहने लगे। झांग पहले भी कई बार गायब हो चुके थे। चीन में ऐसा तब होता है, जब किसी ऑफिसर को हटाया जाना होता है या उसकी जिनपिंग से वफादारी पर संदेह खड़ा होता है।

24 जनवरी 2026 को झांग के खिलाफ ‘पार्टी के कानून और अनुशासन के उल्लंघन’ का आरोप लगा और उनके खिलाफ जांच शुरू हुई। चीन में भ्रष्टाचार और टॉप लीडरशिप के प्रति वफादारी न दिखाने पर ऐसे ही आरोपों के तहत जांच शुरू की जाती है। कई ऑफिसर इस जांच के पहले ही गायब हो जाते हैं या पद से हटा दिए जाते हैं। ऐसा बहुत कम होता है कि चीन में किसी ऑफिसर के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में जांच शुरू हो और वह बाद में निर्दोष साबित हो जाए। झांग से पहले भी कई ऑफिसर इसी तरह हटाए गए हैं।

 

सवाल-2: इससे पहले चीनी सेना में और कितने ऑफिसर हटाए गए?

जवाब: 2012 में जिनपिंग ने सत्ता में आने के बाद से

एक पर्ज कैंपेन यानी सफाई अभियान चलाया हुआ है। ये एक तरह का भ्रष्टाचार विरोधी अभियान है, जिसमें सेना में भ्रष्टाचार करने वाले या जिनपिंग की वफादारी न रखने वाले ऑफिसर्स को पद से हटा दिया जाता है। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, इसके तहत 2012 से अब तक 2 लाख से ज्यादा सैन्यकर्मियों को सजा मिल चुकी है। जबकि आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के करीब 120 ऑफिसर या कमांडर पद से हटाए गए।

2023 के बाद ये ‘पर्ज कैंपेन’ और तेज हुआ। इसके तहत सबसे ज्यादा वो ऑफिसर्स हटाए गए, जो चीनी हथियार बनाने वाली सरकारी कंपनियो में टॉप कमांडर थे या इससे किसी न किसी तरह जुड़े थे। सबसे पहले चीन की रॉकेट फोर्स को निशाना बनाया गया, जो चीनी न्यूक्लियर और ट्रेडिशनल मिसाइल्स का कंट्रोल देखती है।

एशिया सोसाइटी ऑर्गेनाइजेशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की सेंट्रल कमेटी यानी पोलित ब्यूरो में 2022 में 44 यूनिफॉर्ड सैन्य ऑफिसर थे। इनमें से 29 या तो हटा दिए गए हैं या लापता हैं।

मुताबिक, चीन की सेंट्रल कमेटी यानी पोलित ब्यूरो में 2022 में 44 यूनिफॉर्ड सैन्य ऑफिसर थे। इनमें से 29 या तो हटा दिए गए हैं या लापता हैं।

इसके अलावा अक्टूबर 2025 से अब तक PLA के 9 सबसे सीनियर ऑफिसर भी हटाए गए हैं। इनमें CMC के मेंबर्स और कई टॉप मिलिट्री कमांडर थे।

कम्युनिस्ट पार्टी ने जो CMC नाम की संस्था बनाई है, वो PLA में सबसे टॉप कंट्रोलिंग बॉडी है। इसके चेयरमैंन जिनपिंग के अलावा कुल 6 सबसे टॉप लेवल के ऑफिसर्स होते हैं। जिनपिंग के बाद झांग और हे वीडोंग इसके वाइस चेयरमैन थे। जबकि 4 और टॉप ऑफिसर-मियाओ हुआ, लियू झेनली, ली शांगफू, और झांग शेंगमिन थे। अब इसमें जिनपिंग के बाद सिर्फ झांग शेंगमिन बचे हैं। बाकी सभी को हटा दिया गया है। जिनपिंग के इस ‘सफाई अभियान’ में शेंगमिन उनका साथ दे रहे थे।

सवाल-3: तो क्या वाकई चीनी सेना में भ्रष्टाचार चल रहा है?

जवाब: चीनी सेना में टॉप मिलिट्री ऑफिसर्स भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और ताकत के गलत इस्तेमाल करते रहे हैं।

पूर्व चीनी डिफेंस मिनिस्टर ली शांगफू पर हथियार खरीद में रिश्वतखोरी, कॉन्ट्रैक्ट्स की कीमतों में धांधली के आरोप थे। द डिप्लोमैट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी सेना में रिश्वतखोरी आम है और पैसे देकर भी ऑफिसर्स का प्रमोशन होता है।

अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन के मिसाइल प्रोडक्शन में सबसे ज्यादा धांधली हुई। कुछ मिसाइलों में फ्यूल के बजाय पानी भरा मिला। पश्चिमी चीन में कई मिसाइल में खराब टूल्स लगाए गए, जिससे मिसाइलें लॉन्च नहीं हो सकती थीं। CMC के वाइस चेयरमैन रहे हे वीडोंग ने मार्च 2024 में सेना को दिए जा रहे खराब क्वालिटी के हथियारों पर सवाल उठाया था।

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट यानी SIPRI की रिपोर्ट के अनुसार, चीन की 8 टॉप डिफेंस कंपनियों का रेवेन्यू 2024 में 10% तक गिर गया था। 2024 के बाद से भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते चीन की कई बड़े हथियारों के कॉन्ट्रैक्ट्स कैंसिल कर दिए गए।

फाइटर जेट्स की धीमी डिलीवरी के चलते चीन की सबसे बड़ी डिफेंस कंपनी एविएशन इंडस्ट्री कॉर्पोरेशन ऑफ चाइना यानी AVIC का रेवेन्यू भी घटा है।

झांग सहित कई टॉप सैन्य लीडर्स पर भ्रष्टाचार के आरोप थे। झांग के परिवार के लोग सेना के करप्शन में शामिल थे। हालांकि झांग जैसे टॉप लीडर्स को हटाने के पीछे सिर्फ करप्शन अकेली वजह नहीं है। जिनपिंग इन लोगों को अपनी सत्ता के लिए संभावित खतरे की तरह देख रहे थे। जून 2025 में जिनपिंग दो हफ्तों के लिए गायब हो गए थे। तब यह कहा जा रहा कि झांग और कई अन्य टॉप ऑफिसर्स जिनपिंग का तख्तापलट करने की कोशिश में थे।

सवाल-4: क्या वाकई झांग, जिनपिंग के तख्तापलट की साजिश कर रहे थे?

जवाब: जब जिनपिंग गायब हुए, तो कहा गया कि

उनकी तबीयत थी नहीं है। हालांकि इससे पहले भी ऐसी अटकलें लगीं, लेकिन इसका कोई सबूत नहीं मिला था। इसके अलावा दूसरी वजह चीन में जारी राजनीतिक उठापटक थी…

चीन के अंदरूनी मामलों के जानकार टैंग जिंगयुआन के मुताबिक, ‘जिनपिंग की गैर-मौजूदगी में सभी बड़े फैसले लेने का अधिकार नई बॉडी ‘एजेंसी ऑफ डिसीजन मेकिंग’ और ‘डेलिब्रेशन एंड कोऑर्डिनेशन’ के पास चला गया था।

5 जून 2025 को चीन के कई मीडिया चैनल्स ने पहली बार शी जिनपिंग के नाम के साथ राष्ट्रपति नहीं लगाया। हालांकि बाद में इस चूक को सुधारा गया।

इधर जिनपिंग की गैर-मौजूदगी में झांग यूक्सिया का प्रभुत्व बढ़ रहा था। उनके और जिनपिंग के अलावा मिलिट्री कमीशन में सिर्फ दो लोग ही 2027 में होने वाली कांग्रेस की बैठक तक पद पर बने रह सकते थे।

31 जून को जिनपिंग के करीबी और चीन के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर झेंग यानशियोंग को पद से हटा दिया गया। सरकार के खिलाफ लोकतांत्रिक आंदोलन को दबाने में झेंग का अहम रोल था। 29 जून को CMC के पॉलिटिकल वर्क डिपार्टमेंट के चीफ जनरल मियाओ हुआ को हटा दिया गया।

जापान फॉरवर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, झांग ने जिनपिंग की गैर-मौजूदगी का फायदा उठाकर सैन्य नेतृत्व में अपनी पकड़ मजबूत की। झांग ने सेंट्रल मिलिट्री कमीशन यानी CMC के सदस्य लियू झेनली और झांग शेंगमिन के साथ सीक्रेट मीटिंग्स कीं, ताकि सेना पर कंट्रोल बना रहे।

चीन में किसी नेता के गायब रहने के बाद उसे हटाने का ट्रेंड है। चीन के विदेश मंत्री रहे किन गांग दिसंबर 2022 से जुलाई 2023 तक गायब रहे। 25 जुलाई 2023 को उन्हें पद से हटा दिया गया। वहीं रक्षा मंत्री ली शांगफू 29 अगस्त 2023 के बाद गायब हो गए। अक्टूबर 2023 में शांगफू नजर आए और उनका रक्षा मंत्री का पद चला गया। इसी तरह यह भी अटकलें लगाई गईं कि ऐसा ही कुछ जिनपिंग के साथ भी हो सकता है।

इंटरनेशनल प्रेस एसोसिएशन की मेंबर जेनिफर गैंग के मुताबिक, ‘जिन जनरल्स को जिनपिंग ने खुद दो साल पहले प्रमोशन दिया था, अब उन्हें हटाना शुरू कर दिया है। कुछ को मार भी दिया गया। साफ तौर पर CCP के अंदर सत्ता को लेकर संघर्ष हो रहा है। जिनपिंग अपनी सत्ता बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं।’ कुछ रिपोर्ट्स में ये भी कहा जा रहा है कि जिनपिंग 2027 में खुद ही इस्तीफा दे सकते हैं।

सवाल-5: चीन में सत्ता पलटने पर अगला राष्ट्रपति कैसे चुना जाता है?

जवाब: चीन में राष्ट्रपति बनने की प्रक्रिया के 2 मुख्य फेज हैं-

चीन में हर 5 साल में CCP की एक बॉडी ‘नेशनल कांग्रेस’ की बैठक होती है। इसमें पूरे देश से चुने हुए करीब 2300 प्रतिनिधि पार्टी के शीर्ष नेता यानी महासचिव का चुनाव करते हैं। कांग्रेस की अगली बैठक 2027 में होगी। महासचिव ही आम तौर पर देश का राष्ट्रपति बनता है।

महासचिव को चीन का राष्ट्रपति चुनने का काम चीन की संसद यानी नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (NPC) करती है। NPC को अक्सर ‘रबर स्टैम्प’ कहा जाता है, क्योंकि राष्ट्रपति चुनने या दूसरे बड़े फैसलों में संसद की भूमिका बस औपचारिकता ही होती है। राष्ट्रपति का नाम पार्टी पहले ही तय कर चुकी होती है।

चीन के संविधान के तहत एक ही व्यक्ति अधिकतम दो कार्यकाल यानी 10 साल तक राष्ट्रपति रह सकता था, लेकिन 2018 में जिनपिंग की सरकार ने संविधान में संशोधन करके ये नियम हटा दिया था। चीन में राष्ट्रपति का पद औपचारिक होता है। असली सत्ता पार्टी के

चीन के संविधान के तहत एक ही व्यक्ति अधिकतम दो कार्यकाल यानी 10 साल तक राष्ट्रपति रह सकता था, लेकिन 2018 में जिनपिंग की सरकार ने संविधान में संशोधन करके ये नियम हटा दिया था। चीन में राष्ट्रपति का पद औपचारिक होता है। असली सत्ता पार्टी के महासचिव और केंद्रीय सैन्य आयोग यानी सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के पास होती है। फिलहाल जिनपिंग के पास ही तीनों पद हैं।

जिनपिंग को नवंबर 2012 में CCP का महासचिव और मिलिट्री कमीशन का चीफ चुना गया था। मार्च 2013 में चीन की संसद ने उन्हें औपचारिक तौर पर राष्ट्रपति चुना। अक्टूबर 2022 में जिनपिंग को दोबारा पार्टी का महासचिव चुना गया और 2023 में जिनपिंग तीसरी बार राष्ट्रपति बने।

सवाल-6: चीन में जिनपिंग के बाद सत्ता का अगला दावेदार कौन हो सकता है?

जवाब: झांग चीन के पूर्व राष्ट्रपति और पार्टी के

सीनियर नेता हू जिंताओ के भी करीबी हैं। पार्टी में हू-जिंताओ का गुट जिनपिंग का विरोधी माना जाता है। अक्टूबर 2022 में पार्टी की बैठक में जिनपिंग ने हू जिंताओ को सरेआम बैठक से बाहर निकलवा दिया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पार्टी में जिनपिंग के विरोधी गुट और जनरल झांग ने वांग यांग को पार्टी का नया लीडर नियुक्त किया था।

कम्युनिस्ट पार्टी के सुधारवादी नेता वांग यांग, जून में जिनपिंग के गायब रहने के दौरान चर्चा में आए। वांग यांग ने खुलकर कोई भाषण या इंटरव्यू तो नहीं दिया, लेकिन जिनपिंग की सख्त नीतियों के समर्थक झेंग यानशियोंग को पद से हटाया जाना वांग यांग की वापसी से जोड़ा गया। उनके हटने से वांग जैसे सुधारवादी नेता का प्रभाव बढ़ा।

30 जून को खुफिया सूत्रों के हवाले से कई मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि वांग यांग को अगले नेता के रूप में तैयार किया जा रहा था।

वांग 2023 तक चीन की पीपुल्स पॉलिटिकल कॉन्फ्रेंस की नेशनल कमेटी के चेयरमैन थे। 2017 में पोलित ब्यूरो के स्थायी सदस्य भी बने। वे 2013 से 2018 तक चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग की सरकार में उप-प्रधानमंत्री भी रहे।

70 साल के वांग यांग औपचारिक रूप से राजनीति से रिटायर्ड हो चुके हैं।

वांग यांग की छवि एक शांत नेता की बताई जाती है। चीन के किसी राजनीतिक धड़े से उनका टकराव नहीं रहा है। जिंताओ की अगुआई वाली यूथ विंग ‘कम्युनिस्ट यूथ लीग’ सुधारवादी विचारधारा पर जोर देती है। वांग यांग इससे जुड़े हैं। साथ ही हू जिंताओ और उनके गुट के दूसरे बड़े नेता जैसे- हू चुनहुआ के करीबी हैं।

अमेरिकी न्यूज चैनल CNN की एक खबर के मुताबिक, ‘वांग को एक सुधारवादी, टेक्नोलॉजी के प्रति पॉजिटिव रुख रखने वाले टेक्नोक्रेट और भविष्य के नेता के तौर पर तैयार किया जा रहा है।’

लगाई जा रही थी कि वांग यांग को राष्ट्रपति बनाने के साथ ही मिलिट्री कमीशन की कमान वाइस प्रेसिडेंट जनरल झांग संभाल सकते हैं।

सवाल-7: चीनी सेना में चल रही उथल-पुथल का भारत पर क्या असर?

जवाब: अमेरिकी राजनयिक ग्रेगरी स्लेटन कहते हैं कि

चीन पर करीब 50 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज है। दंगे, कारखानों में आगजनी और सरकार विरोधी प्रदर्शन भड़क गए हैं। जब भी घरेलू समस्याएं खड़ी होती हैं तो चीन बाहर की तरफ देखता है।’

जून 2020 में चीन के सैनिकों ने गलवान घाटी इलाके में भारतीय सैनिकों के साथ झड़प के बाद हमला बोल दिया था। इस दौरान पूरे चीन में कोरोना महामारी फैल चुकी थी। कहा जाता है कि जिनपिंग कोरोना के मिस-मैनेजमेंट से दुनिया का ध्यान हटाना चाहते थे। इसलिए भारत से विवाद छेड़ दिया था।

कूटनीतिक मामलों के जानकार सुशांत सरीन कहते हैं कि अगर वाकई में जिनपिंग का तख्तापलट की कोशिश होती है तो वह अमेरिका के प्रेशर के चलते ताइवान और जापान के खिलाफ तो कोई कार्रवाई नहीं कर पाएंगे, लेकिन भारत के खिलाफ सीमा पर कोई लिमिटेड एक्शन ले सकते हैं। हालांकि अभी यह सोचना ठीक नहीं होगा कि भारत के खिलाफ किसी मिलिट्री एक्शन जैसे हालात बन रहे हैं।

कूटनीतिक मामलों के जानकार सुशांत सरीन कहते हैं कि अगर वाकई में जिनपिंग का तख्तापलट की कोशिश होती है तो वह अमेरिका के प्रेशर के चलते ताइवान और जापान के खिलाफ तो कोई कार्रवाई नहीं कर पाएंगे, लेकिन भारत के खिलाफ सीमा पर कोई लिमिटेड एक्शन ले सकते हैं। हालांकि अभी यह सोचना ठीक नहीं होगा कि भारत के खिलाफ किसी मिलिट्री एक्शन जैसे हालात बन रहे हैं।

ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन में स्ट्रैटजिक स्टडीज प्रोग्राम के डिप्टी डायरेक्टर विवेक मिश्र कहते हैं कि चीन का 12 देशों से सीमा विवाद है। वह कब क्या कदम उठाएगा, ये भी किसी को पता नहीं होता है। हालांकि इन दिनों चीन, भारत से रिश्ते बेहतर करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में इसकी संभावना बहुत कम है कि वह भारत के खिलाफ कोई एक्शन लेगा।’

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