एमपी में आयुष्मान योजना मेडिकल माफिया के कब्जे में: कागजों पर अस्पताल, किराए के डॉक्टर और सरकारी मिलीभगत—1 करोड़ में अस्पताल, 20 लाख में आयुष्मान रजिस्ट्रेशन का खुला खेल

एमपी में केंद्र की महत्वाकांक्षी आयुष्मान योजना मेडिकल माफिया के कब्जे में है। एक शख्स के नाम पर कई अस्पतालों का संचालन हो रहा है। योजना में अस्पताल का रजिस्ट्रेशन कराने के लिए प्राइवेट अस्पताल डॉक्टरों को किराए पर रखते हैं। कई निजी अस्पताल ऐसे चल रहे हैं, जहां डॉक्टर केवल कागजों और सरकारी पोर्टल पर मौजूद हैं।

यह पूरा खेल कागजों, ऑनलाइन सिस्टम और सरकारी मशीनरी की मिलीभगत से चल रहा है। दैनिक भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम जब इस पूरे मामले की तह तक पहुंचीं, तो खुलासा हुआ कि 10 से 30 बेड का अस्पताल खोलना अब चुटकियों का काम है। हमें ऐसा शख्स मिला जिसने दावा किया कि वह अब तक 17 अस्पताल खुलवा चुका है। उसने ये भी कहा कि वह इन अस्पतालों में पार्टनर है।

इस शख्स ने दावा किया कि वह 1 करोड़ में अस्पताल खोल देगा और 20 लाख में अस्पताल आयुष्मान स्कीम में रजिस्टर्ड हो जाएगा। इन पूरे खेल को समझने के लिए भास्कर रिपोर्टर कभी मरीज, कभी फाइनेंसर और कभी एजेंट बनकर अस्पतालों और सरकारी दफ्तरों तक पहुंचा।

1.अस्पताल में नाम का दुरुपयोग: एक प्राइवेट अस्पताल की पैथोलॉजिस्ट डॉ. निधि राठौर ने 11 नवंबर 2025 को भोपाल के निशातपुरा थाने और आयुष्मान विभाग को एक शिकायत की थी। जिसमें उन्होंने लिखा था कि उनका नाम करोंद के सृष्टि अस्पताल के डॉक्टरों की लिस्ट में दर्ज है। वह कभी इस अस्पताल में काम करने नहीं गईं। अस्पताल उनके नाम का दुरुपयोग कर रहा है।

2. फर्जी हस्ताक्षर और सरकारी आदेशों का उल्लंघन: एमडी पैथोलॉजी डॉ. सुशील कुमार शर्मा का नाम दो अस्पतालों में दर्ज है। पहला सृष्टि अस्पताल और दूसरा सिटी पैथ लैब। डॉ. शर्मा की दोनों जगह की रिपोर्ट्स पर हस्ताक्षर अलग-अलग हैं। डॉ. शर्मा से  ने पूछा तो बोले- सृष्टि हॉस्पिटल की रिपोर्ट पर जो साइन हैं, वे मेरे नहीं हैं।

3. एक मरीज के नाम से दो सरकारी योजनाओं को चूना: 10 नवंबर 2025 को विदिशा की ललिता राजपूत ने कलेक्टर को शिकायत दी कि सृष्टि हॉस्पिटल ने आयुष्मान योजना और मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान, दोनों से इलाज के नाम पर 35-35 हजार रुपए निकाल लिए। जांच के बाद अस्पताल ने 35 हजार रुपए वापस जमा किए।

4. एक ही दिन, दो अलग मेडिकल मरीज राशिद खान की एक ही दिन भोपाल इमेजिंग सेंटर से दो रिपोर्ट बनीं। पहली रिपोर्ट में लिखा कि कोई तकलीफ नहीं। वहीं दूसरी रिपोर्ट में ब्रेन में इंटरनल ब्लीडिंग बताई। दूसरी रिपोर्ट के आधार पर आयुष्मान योजना से भुगतान निकाला गया।

 

डॉ. ताहिर बोले- मैं तो मैनेजमेंट संभालता हूं पड़ताल में पता चला कि डॉ. ताहिर एक आयुर्वेदिक डॉक्टर हैं, लेकिन वे मरीजों का एलोपैथिक इलाज कर रहे थे। हैरानी की बात यह है कि अस्पताल की ऑफिशियल वेबसाइट पर जिन डॉक्टरों के नाम दिए गए हैं, उनमें ताहिर का नाम कहीं नहीं था। भास्कर को सूचना के अधिकार के तहत ग्रीन सिटी अस्पताल की पार्टनरशिप डीड मिली जिसमें डॉ. ताहिर का नाम पार्टनर के तौर पर दर्ज है।

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