अमेरिका के अहम राज्य टेक्सास में नए H-1B वीजा जारी करने पर रोक लगा दी गई है। गवर्नर ग्रेग एबट ने अगले साल मई तक H-1B कैटेगरी के वीजा जारी नहीं करने के आदेश दिए हैं।
पहले फेज में टेक्सस के सभी सरकारी दफ्तरों और यूनिवर्सिटी में यह रोक लगेगी। इस आदेश से करीब 15 हजार भारतीयों पर असर पड़ सकता है।
टेक्सास वर्कफोर्स कमीशन से सभी H-1B वीजा होल्डर्स की संख्या, जॉब रोल, मूल देश और वीसा एक्सपायरी के बारे में 27 मार्च तक डेटा रिपोर्ट मांगी गई है। नए आदेशों के अनुसार H-1B वीजा पर रोक इसके कथित दुरुपयोग के कारण लगाई गई है।
टेक्सास H-1B वीजा जारी करने वाला दूसरा बड़ा राज्य
टेक्सास H-1B वीजा जारी करने वाला अमेरिका का दूसरा बड़ा राज्य है। पहले नंबर पर कैलिफोर्निया आता है। अमेरिका में हर साल भारतीयों को मिलने वाले लगभग दो लाख H-1B वीजा में से लगभग 40 हजार टेक्सास में जारी होते हैं।
इनमें से लगभग 25 हजार आईटी कंपनियों और बाकी 15 हजार सरकारी दफ्तरों और यूनिवर्सिटीज के लिए जारी किए जाते हैं। ऑस्टिन यूनिवर्सिटी में बड़ी संख्या में भारतीय कार्यरत हैं।
दुनिया की 8वीं बड़ी इकोनॉमी है टेक्सास
2.77 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी वाला टेक्सास दुनिया की 8वीं सबसे बड़ी इकोनॉमी है। ये कनाडा, इटली, द. कोरिया, रूस और ऑस्ट्रेलिया से भी बड़ी इकोनॉमी है। टेक्सास का ऑस्टिन शहर बड़ा टेक हब है।
भारत में वीजा इंटरव्यू डेट अब अगले साल की
भारत में H-1B वीजा इंटरव्यू के लिए अमेरिकी दूतावासों से इंटरव्यू डेट अब अगले साल अप्रैल-मई की मिल रही है। जनवरी में स्टैम्पिंग के लिए अप्लाई करने वालों के लिए स्लॉट उपलब्ध नहीं है।
दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, चेन्नई और हैदराबाद के अमेरिकी दूतावासों में H-1B के लिए सोशल मीडिया जांच हो रही है।
H-1B वीजा होल्डर्स को हर दूसरे साल स्टैम्पिंग के लिए अपने मूल देश आना पड़ता है। स्टैम्पिंग में देरी से बड़ी संख्या में लोग अटक गए हैं।

नए वीजा क्यों रोके गए?
टेक्सास ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी का राज्य है। ये अमेरिका फर्स्ट की नीति को फॉलो करता है। जानकारों का कहना है कि भारत-ईयू डील के तुरंत बाद टेक्सास के फैसले की टाइमिंग सवाल पैदा करती है।
वहीं, वैध वीजा जारी रहेगा, लेकिन रिन्यू कराने में दिक्कतें आ सकती हैं। अभी प्राइवेट कंपनियों को वीजा जारी होंगे, लेकिन जिस प्रकार से सभी के डेटा जमा हो रहे, आशंका उठ रही है।
टेक्सास नए वीजा अगले साल मई तक यानी राज्य संसद की अवधि तक नहीं देगा। ऐसे में, इसे फेडरल कोर्ट में ही चुनौती दी जा सकती है। 20 राज्य पहले ही चुनौती दे चुके।
