नई दिल्ली:राजपाल यादव को दिल्ली हाइकोर्ट से बिजनेस माधव गोपाल अग्रवाल द्वारा किए गए फाइनेंशियल विवाद के केस में 17 फरवरी को जमानत मिल गई है. दरअसल, 9 करोड़ के चेक बाउंस केस में एक्टर को तिहाड़ जेल में रहना पड़ा.

राजपाल यादव को कर्ज देने वाले माधव गोपाल ने किया खुलासा
इसके बाद भतीजी की शादी में शामिल होने की याचिका के साथ-साथ कुछ रकम जमा करने के बाद एक्टर को जमानत मिली. लेकिन हाल ही में में कर्ज देने वाले माधव गोपाल अग्रवाल ने एएनआई को दिए इंटरव्यू में बताया कि एक्टर को 5 करोड़ का लोन दिया गया था. वहीं उन्होंने खुलासा किया कि क्यों एक्टर की फिल्म अता पता लापता की रिलीज रोकी गई थी. को कर्ज देने वाले ने कही ये बात
माधव गोपाल अग्रवाल ने कहा, शुरुआत तो देखिए बहुत पुराना चल रहा है लगभग 2011 से चल रहा है तो शुरुआत तो आप लोगों को मालूम ही होगी. 2010 में हमने इनको एक शाहजहांपुर होने के नाते और इनके बार-बार रिक्वेस्ट करने के चलते इनको लोन दिया था 5 करोड़ का और बाद में उसके कई तीन चार तीन सप्लीमेंट्री एग्रीमेंट भी हुए और मैं कई बार क्योंकि ये पैसा मिथिलेश जी जो पूर्व सांसद हैं और वर्तमान में राज्यसभा के सांसद हैं उनके साथ भी कई बार गया. अब वो पूरा मामला माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय में चल रहा. है और इसमें कहीं किसी प्रकार का कोई वो नहीं है. जो न्यायालय का निर्णय है वो चल रहा है.
आगे उनसे पूछा गया कि फिल्म पर रोक लगने के बारे में पूछा गया कि फिल्म से जो कमाई होनी थी उससे पैसा मिलना था. जो भी इनकम होना थी तो इस सब की क्या हकीकत है? तो माधव गोपाल ने कहा, नहीं नहीं फिल्म को जब शुरू हुई थी जब हमें टीवी से देख के मालूम पड़ा था कि इनका म्यूजिक लांच अमिताभ बच्चन जी द्वारा हुआ है और कि हमारे एग्रीमेंट में ये लिखा हुआ था कि इनको नेगेटिव पीरियड मॉर्गेज रखने थे तो उस कंप्लायंस ना होने की वजह से स्टे हुई थी. फिर इनके कहने के बाद कि भाई पिक्चर तो चलने दीजिए. तो पांच छ दिन बाद एक हफ्ते के अंदर ही हमने दिल्ली माननीय उच्च न्यायालय में उसको वापस ले लिया था और उस स्टे को वापस ले लिया था. फिर उनकी
पिक्चर रिलीज हुई थी.
राजपाल यादव के परिवार से कभी नहीं हुई मुलाकात
माधव गोपाल ने आगे कहा, नहीं नहीं इनके परिवार से ना मैं कभी आज तक इनके घर गया हूं ना मुझे कुंडरा मालूम कहां है. जिस दौरान इनको पैसे दिए थे तो जो भी मीटिंग होती थी राधा जी और राजपाल जी करते थे और एक दो बार इनके जो बड़े भाई हैं या श्रीपाल यादव मेरी फैक्ट्री में मई 2012 में बहुत बड़ी फायर हो गई थी. तो उस सहानुभूति में वो फैक्ट्री में मिलने आए थे मेरे से. इसके अलावा मेरी इनके किसी भाई से या और किसी से कभी कोई किसी प्रकार की कोई बात नहीं हुई.