मध्य प्रदेश में निर्माण पर सख्ती: मकान-दुकान या कमर्शियल बिल्डिंग शुरू करने से 30 दिन पहले लेबर इंस्पेक्टर को सूचना जरूरी, 10 लाख से ऊपर निर्माण पर 1% लेबर सेस; नियम तोड़ने पर जेल संभव

आप अगर घर, दुकान या कोई कमर्शियल बिल्डिंग बनाने की सोच रहे हैं तो यह खबर आपके काम की है। दरअसल, मध्य प्रदेश श्रम विभाग ने निर्माण कार्यों को लेकर नियमों को और सख्त कर दिया है।

अब किसी भी तरह का निर्माण कार्य शुरू करने से कम से कम 30 दिन पहले संबंधित क्षेत्र के लेबर इंस्पेक्टर को सूचना देना अनिवार्य होगा। ऐसा नहीं करने पर मकान मालिक या बिल्डर (नियोक्ता नियोजक) को 3 महीने की जेल या जुर्माना हो सकता है।

पिछले सप्ताह श्रम विभाग ने राजधानी में अधिकारियों की बैठक कर प्रेजेंटेशन दिया और इन नियमों और प्रावधानों को तुरंत लागू करने के निर्देश दिए, वहीं क्रेडाई ने भी इन नए नियमों से अपने सभी बिल्डर्स को अवगत करा दिया है।

श्रम विभाग के अधिकारियों ने बताया कि 10 लाख रुपए से ज्यादा की लागत से बनने वाले निजी मकान के निर्माण की सूचना श्रम विभाग को देना होगी। कंस्ट्रक्शन कॉस्ट का एक फीसदी लेबर सेस, यानी श्रमिक उपकर विभाग को देना होगा, वहीं हर प्रकार की कमर्शियल बिल्डिंग भले ही उसकी लागत एक लाख रुपए हो उसके निर्माण की सूचना देना होगी।

क्यों लिया गया यह फैसला?

श्रम विभाग का कहना है कि हमारा मुख्य उद्देश्य कंस्ट्रक्शन साइट पर श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाना है। श्रम विभाग के अनुसार, कई निर्माण स्थलों पर न तो सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा, न ही मजदूरों का रजिस्ट्रेशन किया जा रहा।

निर्माण शुरू करने से 30 दिन पहले नोटिस जरूरी

भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार अधिनियम 1996 की धारा 46 के तहत यह कानूनी बाध्यता है। यदि आप कोई भी भवन या व्यावसायिक निर्माण शुरू करने जा रहे हैं तो काम शुरू होने की तारीख से कम से कम 30 दिन पहले इसकी लिखित सूचना उस क्षेत्र के लेबर इंस्पेक्टर को देना होगी।

इसमें निर्माण की प्रकृति, स्थान और संभावित मजदूरों की संख्या का विवरण होना चाहिए। सूचना नहीं देने पर इसे नियमों का उल्लंघन मानकर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

10 लाख से अधिक के निजी निर्माण पर 1% सेस

नियमों के मुताबिक, सभी व्यावसायिक निर्माण कार्यों पर निर्माण लागत का 1% उपकर (सेस) जमा करना अनिवार्य है। इसके साथ ही यदि आप अपना निजी मकान बना रहे हैं और उसकी निर्माण लागत 10 लाख रुपए से अधिक है तो आपको भी यह 1% राशि मंडल में जमा कराना होगी।

यह पैसा सीधे तौर पर मजदूरों के कल्याण, उनकी मेडिकल और बच्चों की शिक्षा जैसी सरकारी योजनाओं में उपयोग किया जाता है।

श्रमिक सुरक्षा और स्वास्थ्य के कड़े मानक

नियोक्ता यानी मालिक या बिल्डर की यह जिम्मेदारी है कि वह निर्माण स्थल पर काम करने वाले हर मजदूर को सुरक्षा किट उपलब्ध कराए। इसमें मुख्य रूप से सिर की सुरक्षा के लिए हेलमेट, पैरों के लिए सुरक्षा जूते और हाथों के लिए दस्ताने। ऊंचाई पर काम करने के लिए सेफ्टी बेल्ट।

साथ ही मजदूरों की नियमित स्वास्थ्य जांच और कार्यस्थल पर प्राथमिक चिकित्सा (फर्स्ट एड) की सुविधा देना भी अनिवार्य है।

पोर्टल और मोबाइल एप पर अनिवार्य रजिस्ट्रेशन

श्रम विभाग ने प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए श्रम सेवा पोर्टल और मोबाइल एप लॉन्च किया है। नियोक्ताओं को अब ऑनलाइन माध्यम से निर्माण स्थल का पूरा विवरण देना होगा। इसमें निर्माण स्थल की सटीक लोकेशन (जियो टैगिंग), कार्यरत कर्मचारियों और मजदूरों की कुल संख्या।

मजदूरों के लिए उपलब्ध कराई जा रही बुनियादी सुविधाएं (पीने का पानी, शौचालय आदि)। यदि जानकारी में कोई बदलाव होता है तो 2 दिन के भीतर पोर्टल पर उसे अपडेट करना भी जरूरी है।

श्रम विभाग की ओर से जारी नियम।

नियमों की अनदेखी पर जेल और लगेगा भारी जुर्माना

यदि कोई नियोजक धारा 46 के तहत सूचना देने में विफल रहता है तो अधिनियम की धारा 50 के तहत सख्त सजा का प्रावधान है। इसमें नियोक्ता को 3 महीने तक की जेल हो सकती है। 2000 रुपए तक का आर्थिक दंड लगाया जा सकता है।

गंभीर मामलों में जेल और जुर्माना दोनों एक साथ भुगतना पड़ सकते हैं। इसके अलावा निर्माण स्थल पर किसी भी प्रकार की दुर्घटना होने पर यदि सुरक्षा मानकों में कमी पाई गई तो अलग से कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

श्रम विभाग मजदूरों के लिए चला रहा 25 स्कीम

मप्र भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार मंडल के जरिए श्रम विभाग श्रमिकों के लिए 25 योजनाएं चला रहा है। इनमें मजदूरों के बच्चों की शिक्षा के लिए श्रमोदय विद्यालय चलाए जा रहे हैं। वहीं श्रमिक की सामान्य मौत पर 2 लाख और दुर्घटना में मृत्यु होने पर 4 लाख रुपए की अनुग्रह सहायता राशि दी जाती है।

शहरों में नगर निगम के जरिए मिलता है उपकर

बडे़ शहरों खासकर नगर निगम क्षेत्रों में श्रम विभाग को उपकर नगर निगम के जरिए मिलता है, जो लोग निर्माण शुरू कर रहे हैं, वे नगर निगम से अनुमति लेने जाते हैं तो उसी दौरान एक फीसदी उपकर की राशि जमा हो जाती है। बाद में नगर निगम श्रम विभाग को यह उपकर की राशि ट्रांसफर कर देता है।

श्रम विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हमारा उद्देश्य निर्माण श्रमिकों के लिए कंस्ट्रक्शन साइट पर सभी जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित करना है। इसलिए अब निर्माण कार्यों को लेकर निगरानी तेज की जाएगी।

नए नियम आए हैं, हमने शेयर किए हैं: क्रेडाई

क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज सिंह मीक ने कहा कि रियल एस्टेट डेवलपर लंबे समय से लेबर सेस नगर निगम की अनुमति लेते समय जमा करता रहा है। नए श्रम कानूनों के तहत अभी लेबर की सुरक्षा के लिए नए नियम आए हैं।

इसके लिए विभाग ने कार्यशाला की थी, उसमें क्रेडाई ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जो भी दस्तावेज हमें मिले हैं, वो अपने रियल एस्टेट डेवलपर्स के साथ शेयर किए हैं। क्रेडाई के जो डेवलपर हैं, वो श्रमिकों की सुरक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। इसके लिए हम लगातार ट्रेनिंग करते रहते हैं।

क्रेडाई नेशनल के अवेयरनेस प्रोग्राम के तहत हम नेशनल लेवल और भोपाल में श्रमिकों के स्किल डेवलपमेंट और उनकी सुरक्षा के लिए काम करते रहते हैं। श्रमिकों की सुरक्षा के लिए आधुनिक टूल्स उपलब्ध हैं, उनकी जानकारी उपलब्ध कराई जाए और निर्माण में शामिल संस्थाएं, डेवलपर्स उनका उपयोग करें।

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