युद्ध का असर: इंदौर-पीथमपुर उद्योगों में उत्पादन घटा, निर्यात प्रभावित; सरकार ने मांगी रिपोर्ट, उद्योगों ने राहत पैकेज व कच्चा माल उपलब्ध कराने की मांग उठाई

अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध के असर से इंदौर-पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में उत्पादन घटने और रोजगार प्रभावित होने के मामले को मध्यप्रदेश सरकार ने गंभीरता से लिया है। सरकार ने स्थानीय औद्योगिक संगठनों से उद्योगों में आ रही दिक्कतों पर रिपोर्ट मांगी, जिसके बाद संगठनों ने विस्तृत रिपोर्ट सौंप दी है।

युद्ध के कारण आ रही समस्याओं को प्रमुखता से उठाया था, जिसके बाद सरकार ने औद्योगिक संगठनों से स्थिति की जानकारी ली। आला अधिकारियों ने संगठनों के प्रतिनिधियों से चर्चा कर एमएसएमई और बड़ी इकाइयों की स्थिति पर नजर रखने की बात कही है।

एमएसएमई और छोटे उद्योगों की हालत बिगड़ी पीथमपुर औद्योगिक संगठन ने सरकार को भेजे नोट में बताया कि हालात आर्थिक आपातकाल जैसे बन गए हैं। कई इकाइयां बंद होने की कगार पर पहुंच गई हैं। भुगतान संतुलन बिगड़ने से उद्योगों के सामने पूंजी का संकट गहरा गया है।रिपोर्ट में बताया गया कि कच्चे माल, गैस और अन्य सामग्री के लिए उद्योगों को अग्रिम भुगतान करना पड़ रहा है। वहीं सप्लाई के बाद भुगतान में देरी हो रही है, जिससे आर्थिक चक्र प्रभावित हो रहा है और वर्किंग कैपिटल पर दबाव बढ़ गया है।

कच्चे माल की कमी और कीमतों में बढ़ोतरी उद्योग कच्चे माल के लिए 70% से अधिक आयात पर निर्भर हैं। युद्ध के कारण इसकी उपलब्धता प्रभावित हुई है, जिससे कीमतें बढ़ रही हैं और उत्पादन लागत में वृद्धि हो रही है।पीएनजी और एलपीजी की सप्लाई भी प्रभावित हुई है। एलपीजी की कमी बनी हुई है, जबकि पीएनजी के दाम बढ़ गए हैं। साथ ही कंपनियों ने पहले दी जा रही राहत भी वापस ले ली है।

निर्यात प्रभावित, माल बंदरगाहों पर अटका पीथमपुर से निर्यात भी प्रभावित हुआ है। बड़ी मात्रा में माल बंदरगाहों पर अटका है, जिससे बैंकों में पूंजी ब्लॉक हो रही है और उद्योगों की वित्तीय स्थिति कमजोर हो रही है।रिपोर्ट के अनुसार फ्रेट लागत बढ़कर 2400 डॉलर तक पहुंच गई है, जो पहले की तुलना में लगभग दोगुनी है। इसके अलावा युद्ध सरचार्ज भी अतिरिक्त रूप से लगाया जा रहा है।

उद्योग संगठनों ने रखीं अपनी समस्याएं

एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्री एमपी, फार्मा, प्लास्टिक, ऑटो एंसिलरी और पैकेजिंग उद्योगों ने भी अपनी-अपनी समस्याएं सरकार के सामने रखी हैं और तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

सरकार से राहत पैकेज और सपोर्ट की मांग औद्योगिक संगठनों ने सरकार से एलपीजी और गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करने, बढ़ी कीमतों पर नियंत्रण करने और वैट में कमी करने की मांग की है। वर्तमान में वैट 14% है, जबकि अन्य राज्यों में यह करीब 5% है।संगठनों ने बिजली दरों में बढ़ोतरी को स्थगित करने और पॉवर पर टैरिफ सब्सिडी देने की मांग की है, ताकि उत्पादन लागत को नियंत्रित किया जा सके।

वर्किंग कैपिटल और रोजगार बचाने के उपाय सुझाए उद्योगों ने वर्किंग कैपिटल के लिए ब्याज सहायता, पूंजी सपोर्ट और रोजगार बनाए रखने के लिए इम्प्लॉयमेंट सब्सिडी देने की मांग भी सरकार के सामने रखी है।

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