इंदौर में नगर निगम की जनसुनवाई में मंगलवार को कुछ लोग पार्षद कमलेश कालरा की शिकायत लेकर पहुंच गए। उन्होंने पार्षद पर अवैध वसूली का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उनसे 10 हजार रुपए की मांग की गई है। नहीं देने पर दुकान तोड़ने की बात कही थी। वे डिमांड पूरी नहीं कर पाए तो दुकानों को तोड़ दिया गया।
पार्षद कमलेश कालरा की दुकानों को लेकर की गई बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। जिसमें वे दुकानों को लेकर बातचीत कर रहे थे।

10 हजार की डिमांड का आरोप
शिकायतकर्ता विजय चौहान ने बताया कि हमारी 30-35 साल पुरानी दुकानें खातीवाला टैंक में महाकाल चौराहे के पास थी। पार्षद ने हमें अवैध वसूली के लिए धमकाया कि दस हजार रुपए महीना हमें दो, नहीं तो दुकान तोड़ दी जाएगी। नगर निगम की पीली गाड़ी भी आकर कहती थी, पार्षद से बात कर लो, नहीं तो दुकान तोड़ देंगे। विजय ने आरोप लगाते हुए कहा कि हमने जब पार्षद से बात की और बताया कि हम गरीब व्यक्ति है इतना पैसा कहां से देंगे। हम पैसे नहीं दे पाए तो हमारे दुकानों को तुड़वा दिया गया। अधिकारियों ने जांच का आश्वासन दिया है। सांची पाइंट, प्रेस की दुकान, चाय की दुकान, कपड़ों पर रंग करने सहित ऐसी सात दुकानें यहां पर थी।
दो महीने पहले ही हुई पति की मौत, कहां से दूं पैसा
चाय की दुकान संचालित करने वाली अनिता बाई ने बताया कि हमें दुकान तोड़ने की धमकी दी। नगर निगम की पीली गाड़ियां आती थी। बोले पार्षद से बात कर लो। दस हजार देने का बोला था, नहीं दे पाए तो दुकान तोड़ दी। मेरे पति की मौत को दो महीने भी पूरे नहीं हुए और मुझसे दस हजार रुपयों की डिमांड की जा रही थी। मैं कहां से देती। मैं परिवार चलाऊं या उन्हें पैसा दूं।

मास्टर प्लान की सड़क को लेकर भी शिकायत
नगर निगम की जनसुनवाई में मंगलवार को 45 मामले आए। इसमें दीप पैलेस, निपानिया मेन रोड के कुछ रहवासी भी शिकायत लेकर पहुंचे। रहवासी आशीष शर्मा ने बताया कि तीन से चार बार आ चुके हैं, लेकिन शिकायत का निराकरण नहीं हुआ है। ये कॉलोनी 96 की है, तब ही टीएनसी अप्रूव कॉलोनी है।
यहां के नक्शे भी कुछ सालों पहले तक 60 फीट रोड पर ही सेग्शन हुए। रजिस्ट्रियां भी वैसे ही हुई। प्रशासन ने कह दिया है कि मास्टर प्लान की ये रोड 60 फीट नहीं 100 फीट ही बनेगी। कई लोगों ने यहां पर नए कंस्ट्रक्शन भी किए हैं। रहवासियों की इसमें क्या गलती है। कई लोगों की यहां पर कमर्शियल प्रॉपर्टी है

आजाद नगर में गंदे पानी पर फूटा गुस्सा कलेक्टर कार्यालय में कई आवेदक अपनी समस्या लेकर पहुंचे। इनमें स्कूल शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक सहायता, परिवार विवाद, जमीन और अन्य संबंधित मामले शामिल थे। एक मामला आज़ाद नगर क्षेत्र में दूषित पानी की समस्या को लेकर था। इसे लेकर रहवासियों का आक्रोश खुलकर सामने आया। लंबे समय से गंदे पानी की आपूर्ति से परेशान महिलाओं ने पहले सड़क पर उतरकर चक्काजाम किया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसके बाद बड़ी संख्या में महिलाएं कलेक्टर कार्यालय पहुंची और ज्ञापन सौंपकर समस्या के समाधान की मांग की।
महिलाओं का कहना है कि क्षेत्र में कई दिनों से लगातार गंदा और दूषित पानी सप्लाई हो रहा है, जिससे बच्चों और परिवार के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो आजाद नगर भी भगीरथपुरा जैसी स्थिति की ओर बढ़ सकता है।
प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने मोबाइल में रिकॉर्ड किए गए वीडियो अधिकारियों को दिखाए, जिनमें पानी की खराब गुणवत्ता साफ नजर आ रही है। उनका आरोप है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जिससे मजबूर होकर उन्हें सड़कों पर उतरना पड़ा।

पुलिस की जनसुनवाई में आया नाइजीरियन
पुलिस की जनसुनवाई में एमआईजी क्षेत्र में रहने वाला रिचर्डसन पहुंचा। उसने पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह को बताया कि उसके सभी दस्तावेज कोर्ट में हैं जिसके चलते वीजा ओर अन्य दस्तावेज नहीं बनवा पा रहा है। मामले में पुलिस कमिश्नर ने अधिकारियों को निर्देशित किया है।